भारतीय क्रिकेट टीम के कई स्टार खिलाड़ी इस समय स्वास्थ्य और फिटनेस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। राष्ट्रीय टीम के मुख्य खिलाड़ियों की लगातार बढ़ती मेडिकल सूची को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड एक्शन मोड में आ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया रविवार को बेंगलुरु स्थित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (सीओई) का दौरा करेंगे। वहां वे क्रिकेट प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक में खिलाड़ियों की रिकवरी, मेडिकल स्थिति और रिहैबिलिटेशन प्रक्रियाओं का विस्तृत जायजा लेंगे।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में समीक्षा बैठक की तैयारी
बेंगलुरु के सीओई परिसर में आयोजित होने वाली इस बैठक में भारतीय खिलाड़ियों के इलाज और मैदान पर उनकी वापसी की समयसीमा पर विस्तार से चर्चा होगी। बैठक के दौरान इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और चयन समिति के अध्यक्ष अजित अगरकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा में शामिल हो सकते हैं। इस समीक्षा बैठक का प्राथमिक उद्देश्य यह समझना है कि खिलाड़ियों की फिटनेस और चोट प्रबंधन में कहां कमियां रह रही हैं और उन्हें जल्द से जल्द मैच फिट कैसे बनाया जाए।
रेड बॉल और टेस्ट टीम के प्रमुख खिलाड़ियों का मेडिकल अपडेट
भारतीय टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी अलग-अलग शारीरिक समस्याओं के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं हैं। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के घुटने में सूजन (वॉटर रिटेंशन) की समस्या देखी गई है, जिसके कारण उन्हें ठीक होने में अनुमान से अधिक समय लग रहा है। शुरुआती तौर पर चयनकर्ताओं को उम्मीद थी कि बुमराह और बी साई सुदर्शन कम से कम दो टेस्ट मैचों में से एक के लिए फिट हो जाएंगे, लेकिन सीओई के चिकित्सा विशेषज्ञों ने एहतियात बरतने की सलाह दी है।
सलामी बल्लेबाज बी साई सुदर्शन प्रतिदिन 75 मिनट तक बल्लेबाजी अभ्यास कर रहे थे, लेकिन उनके बाएं पैर के बड़े अंगूठे में लगातार दर्द बना हुआ है। इसके अलावा ऑलराउंडर नीतिश कुमार रेड्डी ने अपनी गेंदबाजी की गति में 7 से 8 किमी प्रति घंटे का इजाफा करने की कोशिश की, जिससे उनकी हैमस्ट्रिंग और क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियों में खिंचाव आ गया। ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या का सामना कर रहे हैं, जबकि तेज गेंदबाज हर्षित राणा भी मांसपेशियों में खिंचाव से जूझ रहे हैं। तेज गेंदबाज आकाश दीप स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण सबसे लंबे समय से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से बाहर हैं; वे बंगाल की रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में हुई हार के बाद से ही मैदान में नहीं उतरे हैं।
सफेद गेंद विशेषज्ञों का रिहैबिलिटेशन और प्रशासनिक दबाव
केवल रेड बॉल ही नहीं, बल्कि सफेद गेंद के कई प्रमुख विशेषज्ञ भी सीओई में अपना रिहैबिलिटेशन पूरा कर रहे हैं। ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव से उबर रहे हैं, जबकि स्पिनर वरुण चक्रवर्ती और तेज गेंदबाज प्रिंस यादव भी मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या के कारण मेडिकल टीम की देखरेख में हैं। सीओई की खेल विज्ञान टीम पर इस समय काम का अत्यधिक दबाव है। विशेष रूप से वर्ष 2025 की शुरुआत में नितिन पटेल के इस्तीफे के बाद से इस महत्वपूर्ण विभाग में किसी नए प्रमुख की नियुक्ति नहीं हो सकी है, जिससे प्रशासनिक और चिकित्सकीय समन्वय में चुनौतियां आ रही हैं।
चयन समिति और सीओई के बीच समन्वय तथा मतभेद
खिलाड़ियों की चोट प्रबंधन को लेकर राष्ट्रीय चयन समिति और सीओई के चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच मतभेदों की बातें भी सामने आई हैं। चयन समिति और सीओई प्रबंधन के बीच खिलाड़ियों की वापसी की समयसीमा तथा पूर्ण फिटनेस मानकों से पहले खिलाड़ियों को मैच खेलने के लिए रिलीज किए जाने के फैसलों पर हमेशा सहमति नहीं बन सकी है। इसके अतिरिक्त, इंग्लैंड पहुंचने पर तेज गेंदबाज हर्षित राणा का वजन आवश्यकता से काफी अधिक पाया जाना भी चयनकर्ताओं की नाराजगी का कारण बना था। इन सभी घटनाक्रमों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस समीक्षा बैठक के बाद बीसीसीआई और सीओई प्रबंधन की ओर से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है या नहीं।



















