डरबन के किंग्समीड मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के सामने ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज मैथ्यू रेनशॉ ने जुझारू बल्लेबाजी का ऐसा नमूना पेश किया जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा. चुनौतीपूर्ण हालात और लगातार गिरते विकेटों के बीच रेनशॉ ने एक छोर संभाले रखा और अपने टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर खड़ा किया. इस मैराथन पारी की बदौलत उन्होंने भारतीय स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के नाम दर्ज एक खास रिकॉर्ड को भी अपने नाम कर लिया. कोहली ने यह कीर्तिमान दस साल पहले स्थापित किया था, जिसे अब ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने पार कर लिया है.
शुरुआती झटकों से उबारने वाली 190 रनों की जुझारू पारी
मुकाबले के दूसरे दिन ऑस्ट्रेलियाई टीम की पहली पारी 390 रनों के मजबूत योग पर समाप्त हुई. इस पारी में पवेलियन लौटने वाले अंतिम बल्लेबाज मैथ्यू रेनशॉ ही रहे. उन्होंने कुल 397 गेंदों का सामना करते हुए 190 रनों की धैर्यपूर्ण पारी खेली. इस पारी के दौरान उन्होंने 21 शानदार चौके और एक छक्का जमाया. रेनशॉ जब बल्लेबाजी करने उतरे थे, तब मेहमान टीम की स्थिति काफी नाजुक थी. टीम ने सिर्फ 84 रनों के कुल स्कोर पर अपने तीन शीर्ष बल्लेबाज गंवा दिए थे. ऐसे समय में रेनशॉ ने बिना किसी हड़बड़ाहट के पारी को आगे बढ़ाया और दक्षिण अफ्रीकी आक्रमण की धार को कुंद कर दिया.
निचले क्रम के साथ साझेदारी का नया वैश्विक कीर्तिमान
इस पूरी पारी की सबसे बड़ी खासियत निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ रेनशॉ का तालमेल रहा. अपने बनाए 190 रनों में से उन्होंने अकेले 174 रन आठवें से ग्यारहवें नंबर के बल्लेबाजों के साथ मिलकर जोड़े. इसके साथ ही उन्होंने साल 2016 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ बनाए गए विराट कोहली के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया. कोहली ने उस समय अपनी 235 रनों की दोहरी शतकीय पारी के दौरान निचले क्रम के साथ 171 रन जोड़े थे. अब रेनशॉ वर्ष 2002 के बाद से टेस्ट क्रिकेट में निचले क्रम के साथ सबसे अधिक रन जुटाने वाले दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज बन चुके हैं.
पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क के साथ संकटमोचक साझेदारियां
ऑस्ट्रेलियाई पारी को संभालने में कप्तान पैट कमिंस ने रेनशॉ का बेहतरीन साथ निभाया. दोनों खिलाड़ियों ने मिलकर आठवें विकेट के लिए 86 रनों की बेहद अहम साझेदारी पूरी की. इस साझेदारी में रेनशॉ के बल्ले से 41 मूल्यवान रन निकले, जिसने टीम को बड़े संकट से पूरी तरह बाहर निकाला. इसके बाद तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क क्रीज पर आए. स्टार्क और रेनशॉ के बीच 20 रनों की साझेदारी हुई, जिसमें सलामी बल्लेबाज का योगदान 12 रनों का रहा. यह साझेदारी भले ही आंकड़ों में छोटी नजर आए, लेकिन इसने विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बरकरार रखने में पूरी मदद की.
नाथन लियोन संग शतकीय भागीदारी और दोहरे शतक से चूक
पारी का सबसे निर्णायक और आक्रामक दौर तब देखने को मिला जब स्पिनर नाथन लियोन बल्लेबाजी करने उतरे. रेनशॉ और लियोन के बीच नौवें विकेट के लिए 134 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी हुई. इस दौरान रेनशॉ ने तेजी से रन बटोरे और अकेले 100 रन जोड़े. पारी के अंतिम क्षणों में उन्होंने जोश हेजलवुड के साथ मिलकर भी 26 रन जोड़े, जिसमें उनके खुद के 21 रन शामिल थे. इन सभी महत्वपूर्ण साझेदारियों के सहारे रेनशॉ ने निचले क्रम के साथ अपने 174 रन पूरे किए. हालांकि, वह अपने पहले टेस्ट दोहरे शतक से महज 10 रन दूर रह गए और साइमन हार्मर की गेंद पर आउट होकर 190 पर पवेलियन लौटे, लेकिन तब तक ऑस्ट्रेलिया 390 का विशाल स्कोर खड़ा कर चुका था.



















