राजस्थान के बूंदी स्थित जिला अस्पताल में तैनात संविदा सफाईकर्मियों ने मानदेय न मिलने के विरोध में कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया है। ठेका एजेंसी के अधीन कार्यरत लगभग 36 महिला और पुरुष कर्मचारियों ने अपनी लंबित पगार की मांग को लेकर चिकित्सालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर एकत्रित होकर धरना दिया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने सेवा प्रदाता ठेका कंपनी की कार्यशैली के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उनके महीनों से लटके बकाए का निस्तारण नहीं किया जाता, तब तक परिसर में स्वच्छता का कोई भी काम नहीं होगा। कार्य बहिष्कार शुरू होते ही अस्पताल परिसर की नियमित सफाई व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है, जिससे वहां आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए असुविधाजनक स्थिति पैदा होने की आशंका बन गई है।
कई महीनों से बकाया पगार, उधार पर चल रहा परिवार
धरने पर मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले 4 से 5 महीने से पारिश्रमिक नहीं दिया गया है। संविदा व्यवस्था के तहत काम करने वाले इन कामगारों को प्रतिमाह 6400 रुपये का मानदेय तय किया गया है। कर्मियों का आरोप है कि इतने कम मेहनताने में भी ठेका एजेंसी कथित रूप से कटौती कर लेती है, और जो राशि बचती है उसका भुगतान भी समय पर नहीं किया जा रहा है। महीनों से पैसा न आने के कारण कर्मियों के घरों में गंभीर आर्थिक तंगी पैदा हो गई है। कर्मचारियों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि दैनिक घरेलू खर्च और बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें जान-पहचान वालों से कर्ज लेना पड़ रहा है। लगातार कर्ज के बोझ तले दबने और बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का कोई स्थायी समाधान न निकलने पर कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे गया।
मांग पूरी होने तक झाड़ू न उठाने की सख्त चेतावनी
आक्रोशित महिला व पुरुष कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर झाड़ू और अन्य सफाई उपकरण छोड़कर मुख्य द्वार पर डेरा डाल दिया है। आंदोलनकारी कर्मियों ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया है कि जब तक ठेका फर्म द्वारा उनके पूरे बकाया वेतन का हिसाब नहीं किया जाता, तब तक कोई भी कर्मचारी झाड़ू नहीं उठाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी वाजिब मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह विरोध प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा। स्वास्थ्य केंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर सफाई ठप होने से वार्डों, गलियारों और ओपीडी क्षेत्रों में गंदगी जमा होने का खतरा मंडराने लगा है, जिससे संक्रमण फैलने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
पीएमओ ने दिया समाधान का भरोसा, फैसले पर टिकी निगाहें
अस्पताल परिसर में आंदोलन तेज होने के बाद सफाई कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल के पीएमओ डॉ. गोविंद गुप्ता से मुलाकात की। कर्मियों ने प्रशासनिक अधिकारी के समक्ष अपनी आर्थिक परेशानियां रखीं और ठेका एजेंसी द्वारा किए जा रहे कथित वेतन कटौती व महीनों की देरी का ब्योरा पेश किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएमओ डॉ. गोविंद गुप्ता ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि आगामी 1 से 2 दिन के भीतर उनके बकाया भुगतान की प्रक्रिया पूरी करवा दी जाएगी। प्रशासनिक आश्वासन मिलने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तय समय सीमा में सफाईकर्मियों को उनका वेतन मिल पाता है या नहीं, और क्या कर्मचारी इस वादे के बाद हड़ताल वापस लेकर अस्पताल में सफाई व्यवस्था को बहाल करते हैं।

















