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भारत-पाकिस्तान क्रिकेट की चमक फीकी, स्पॉन्सर्स और ब्रॉडकास्टर्स की बढ़ी चिंताक्रिकेट
7 सित॰ 2026, 11:34 pm (42 मिनट पहले)· 2

भारत-पाकिस्तान क्रिकेट की चमक फीकी, स्पॉन्सर्स और ब्रॉडकास्टर्स की बढ़ी चिंता

भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबलों में अब वह रोमांच और प्रतिस्पर्धा नहीं बची है, जिसके लिए यह प्रतिद्वंद्विता जानी जाती थी। महिला एशिया कप जैसे टूर्नामेंट्स में एकतरफा प्रदर्शन और पाकिस्तान टीम के लगातार खराब खेल से अब ब्रॉडकास्टर्स और प्रायोजकों का भरोसा डगमगाने लगा है।

कुछ समय पहले तक खेल प्रेमियों की यही चाहत होती थी कि भारत और पाकिस्तान के बीच ज्यादा से ज्यादा क्रिकेट मुकाबले खेले जाएं। दोनों टीमों के बीच होने वाले मैच बेहद रोमांचक होते थे और ब्रॉडकास्टर्स इस मुकाबले को क्रिकेट जगत की सबसे बड़ी जंग के रूप में पेश किया करते थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और समय के साथ यह प्रतिद्वंद्विता अपनी चमक खोती जा रही है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए तो यही लगता है कि दोनों टीमों के बीच जितने कम मैच हों, उतना ही बेहतर है।

आने वाले एशियाई खेलों पर नजर डालें तो वहां भी कुछ वैसी ही स्थिति देखने को मिल सकती है, जैसी महिला एशिया कप में सामने आ रही है। शनिवार के मुकाबले को यदि पैमाना माना जाए तो भारत और पाकिस्तान के बीच का यह मुकाबला पूरी तरह एकतरफा साबित हुआ। इस तरह के मुकाबलों को आखिर कितने लंबे समय तक बेचा जा सकता है? क्रिकेट दर्शक इस झूठी कहानी पर आखिर कब तक भरोसा बनाए रखेंगे? दर्शक कब तक उस कृत्रिम हाइप का हिस्सा बनते रहेंगे, जो अब सच्चाई से कोसों दूर हो चुकी है? अब तो भारतीय फैंस के मन में यह डर भी सताने लगा है कि पाकिस्तान को मैदान पर तो जीत मिल नहीं रही है, तो क्या इस बार मोहसिन नकवी महिलाओं वाली ट्रॉफी ही लेकर गायब ना हो जाएं।

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पाकिस्तान मैच पर अब पैसा लगाने से क्यों कतरा रहे हैं प्रायोजक

पाकिस्तान क्रिकेट टीम की हालत वर्तमान में बेहद खराब दौर से गुजर रही है। उनकी बल्लेबाजी में जरा भी दम नहीं बचा है और जब तक इस कमजोरी को दूर नहीं किया जाता, तब तक दोनों टीमों के बीच किसी भी तरह की बराबरी की उम्मीद करना बेमानी है। जिस टीम का स्कोर 55 रन पर ही सिमट जाए और पूरी टीम ऑलआउट हो जाए, उसे एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। यहां सबसे बड़ी चिंता खेल से ज्यादा ब्रॉडकास्टिंग के नजरिए को लेकर है, क्योंकि सारा पैसा वहीं से आता है। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच को पूरे खेल जगत का सबसे बड़ा कमाई वाला मुकाबला माना जाता है।

महिला एशिया कप अपने आप में एक सीमित दर्शक वर्ग वाला टूर्नामेंट है। अगर भारत और पाकिस्तान के मुकाबले को अलग कर दिया जाए, तो बाकी मैचों के प्रसारण अधिकार बेचना भी बेहद मुश्किल हो जाता है। आखिर कौन स्पॉन्सर थाईलैंड या हांगकांग के मैचों के लिए अपनी तरफ से पैसे खर्च करेगा? ब्रॉडकास्ट राइट्स होल्डर के लिए केवल भारत और पाकिस्तान का मैच ही ऐसा जरिया है जो बड़ी कमाई करा सकता है। उसी कमाई के जरिए टूर्नामेंट के बाकी छोटे मैचों के खर्च को मैनेज किया जाता है। यही मुख्य वजह है कि भारत और पाकिस्तान को अक्सर टूर्नामेंट के एक ही ग्रुप में रखा जाता है ताकि वित्तीय संतुलन बना रहे।

कमजोर प्रदर्शन से संकट में पड़ रहा है पूरा टूर्नामेंट ढांचा

यदि ब्रॉडकास्टिंग से मिलने वाला यह पैसा बंद हो जाए, तो इस स्तर के टूर्नामेंटों का आयोजन करना ही मुश्किल साबित हो सकता है। लेकिन असली संकट तब पैदा होता है, जब पाकिस्तान इस इकलौते अहम मुकाबले में भी कोई ठोस चुनौती पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहता है। यदि भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच की अहमियत ही समाप्त हो गई, जैसा कि वर्तमान परिदृश्य में साफ दिखाई दे रहा है, तो फिर पूरे टूर्नामेंट को बाजार में कैसे बेचा जाएगा? ब्रॉडकास्टर्स के पास विज्ञापनदाताओं को दिखाने के लिए क्या विकल्प बचेगा? और अंत में, स्पॉन्सर्स इस तरह के एकतरफा आयोजनों में अपना पैसा क्यों लगाएंगे?

बीते शनिवार को पाकिस्तान की ओर से जिस बात ने सबसे ज्यादा निराश किया, वह मैदान पर संघर्ष करने की पूरी तरह कमी थी। महज़ 55 रन के स्कोर पर पूरी टीम के आउट होने के बाद फातिमा सना का शैफाली वर्मा की तरफ इशारा करना एक अनावश्यक आक्रामकता जरूर थी, लेकिन इसके अलावा पाकिस्तान का पूरा खेमा बेहद बेजान नजर आया। किसी भी बल्लेबाज ने भारतीय गेंदबाजी के सामने टिकने या मुकाबला करने की कोई ठोस कोशिश नहीं की। भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने पाकिस्तानी बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। टीम में न तो कोई साफ इरादा नजर आया और न ही कोई रणनीतिक तैयारी दिखी। इसके बावजूद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से किसी तरह के कड़े सवाल पूछे जाने की कोई उम्मीद नहीं है। नकवी का पूरा ध्यान शायद सिर्फ पुरस्कार वितरण करने और फोटो खिंचवाने के मौकों पर ही केंद्रित रहता है।

बदहाली के दौर से गुजर रहा है पाकिस्तान क्रिकेट

पाकिस्तान क्रिकेट अब पतन के ऐसे मुकाम पर आ पहुंचा है, जहां से बाहर निकलने का कोई व्यावहारिक रास्ता फिलहाल नजर नहीं आ रहा है। महिला क्रिकेट लगातार गिरते स्तर का शिकार हो रहा है और पुरुष टीम की स्थिति भी इससे कुछ खास अलग नहीं है। भारत और पाकिस्तान के मैच को लेकर गढ़ी जाने वाली कृत्रिम हाइप भी अब अधिक दिनों तक नहीं टिक पाएगी। अगर लोगों ने इस कड़वी हकीकत को अब तक नहीं पहचाना है, तो वे बहुत जल्द इसे अपनी आंखों से देख लेंगे। सोनी चैनल पर चर्चा के दौरान अंजुम चोपड़ा और मिताली राज दोनों का यह मानना था कि भारत को अपनी बल्लेबाजी में और अधिक प्रयोग करने चाहिए थे। यह बात अपने आप में बहुत कुछ बयां करती है।

मामला अब उस स्थिति तक पहुंच चुका है जहां भारत जैसी मजबूत टीम पाकिस्तान के खिलाफ खुलकर प्रयोग कर सकती है, क्योंकि मैदान पर अब उस स्तर की प्रतिस्पर्धा बची ही नहीं है। मोहसिन नकवी और उनके सहयोगी अधिकारियों को इस जमीनी हकीकत पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्हें विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपने और एक के बाद एक नए विवाद खड़े करके फोटो खिंचवाने से ज्यादा जरूरी यह है कि पाकिस्तान क्रिकेट की इस दयनीय स्थिति का कोई स्थायी समाधान तलाशा जाए।

सवाल-जवाब

महिला एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के मुकाबले में क्या स्थिति रही?
मैच पूरी तरह एकतरफा रहा जिसमें भारतीय गेंदबाजों के आगे पाकिस्तानी टीम महज 55 रन पर ऑलआउट हो गई।
भारत-पाकिस्तान मुकाबले ब्रॉडकास्टर्स के लिए क्यों जरूरी हैं?
इन मुकाबलों से होने वाली बड़ी कमाई के जरिए टूर्नामेंट के बाकी छोटे मैचों के खर्च को सब्सिडाइज किया जाता है।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष कौन हैं?
मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
सोनी चैनल पर चर्चा के दौरान किन पूर्व खिलाड़ियों ने अपने विचार रखे?
अंजुम चोपड़ा और मिताली राज ने सोनी पर चर्चा के दौरान कहा कि भारत को अपनी बल्लेबाजी में और प्रयोग करने चाहिए थे।
शनिवार के मैच के दौरान पाकिस्तानी खिलाड़ी ने क्या प्रतिक्रिया दी?
55 रन पर आउट होने के बाद फातिमा सना ने शैफाली वर्मा की तरफ इशारा किया जिसे अनावश्यक आक्रामकता माना गया।
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