एक वक्त था जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पाकिस्तानी टीम का दबदबा हुआ करता था और दिग्गज टीमें भी उसके खिलाफ मैदान पर उतरने से कतराती थीं, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि मामूली टीमें भी उसे मात दे रही हैं। पाकिस्तानी क्रिकेट की इस दयनीय स्थिति को देखकर पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद यूसुफ ने अपनी पीड़ा जाहिर की है। उनका कहना है कि देश में क्रिकेट का मौजूदा संकट साल 2021 में दुबई में खेले गए टी20 विश्व कप के दौरान भारत के खिलाफ मिली 10 विकेट की ऐतिहासिक जीत के बाद ही पैदा हुआ था।
ऐतिहासिक जीत के बाद शुरू हुआ पतन
इससे पहले पाकिस्तानी टीम कभी भी विश्व कप के मंच पर भारत को मात नहीं दे पाई थी। उस मुकाबले में बाबर आजम ने नाबाद 68 रन बनाए थे और मोहम्मद रिजवान ने 79 रनों की पारी खेली थी, जिसकी बदौलत पाकिस्तान ने बिना कोई विकेट गंवाए 152 रन के लक्ष्य को आसानी से हासिल कर लिया था। इस कामयाबी को पूरे देश में एक बड़े ऐतिहासिक पल के रूप में मनाया गया था, लेकिन यूसुफ के अनुसार यही वह मोड़ था जहां से टीम का पतन शुरू हो गया।
खिलाड़ियों में आ गया था घमंड
समा टीवी के साथ हुई बातचीत में मोहम्मद यूसुफ ने विस्तार से बताया कि कैसे उस एक मैच ने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ उस जीत ने टीम को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया क्योंकि खिलाड़ियों को यह भ्रम हो गया कि उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी जंग जीत ली है और वे यह भूल गए कि आगे का सफर अभी बाकी है। जब कोई खिलाड़ी या टीम बेहतरीन प्रदर्शन करती है, तो उसे हमेशा जमीन से जुड़े रहना चाहिए, लेकिन कॉलर खड़े करके चलने और प्रतिद्वंद्वी का सम्मान न करने से मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं जो आज पाकिस्तानी क्रिकेट में साफ नजर आ रही हैं।
कप्तानी की होड़ और आंतरिक कलह
मोहम्मद यूसुफ ने टीम के भीतर चल रही गुटबाजी और पद की लालसा पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उस ऐतिहासिक जीत के बाद हर खिलाड़ी पाकिस्तान टीम की कमान संभालने की जुगत में लग गया था, जिससे टीम को भारी क्षति उठानी पड़ी। पिछले चार-पांच सालों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो चाहे वनडे विश्व कप हो, टी20 विश्व कप हो, एशिया कप हो या चैंपियंस ट्रॉफी हो, पाकिस्तान का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है।
पीसीबी के फैसलों का समर्थन
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने हर मोर्चे पर खिलाड़ियों का पूरा साथ दिया है। टीम की बेहतरी के लिए अनगिनत कोच बदले गए और तमाम बदलाव किए गए, मगर किसी भी खिलाड़ी ने आगे आकर अपनी नाकामी की जिम्मेदारी नहीं ली। अंत में पीसीबी को जो कड़े कदम उठाने पड़े, वे पूरी तरह से उचित थे और वे बोर्ड के इन फैसलों के साथ खड़े हैं।



















