पाकिस्तान क्रिकेट टीम इन दिनों भारी उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। हाल ही में इंग्लैंड दौरे के बीच से ही सात खिलाड़ियों को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जबकि कोचिंग स्टाफ में सरफराज अहमद और उमर गुल की छुट्टी कर दी गई। चयन समिति से जुड़े बड़े बदलावों के बीच अब पूर्व मुख्य चयनकर्ता मिस्बाह उल हक ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है। बोर्ड से नाता टूटने के बाद उन्होंने खुले तौर पर नाराजगी जाहिर की है और खेल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विदेशी और स्थानीय कोचों के साथ भेदभाव का आरोप
एक टेलीविजन शो के दौरान बातचीत करते हुए उन्होंने पाकिस्तानी क्रिकेट सेटअप में दोहरे मानदंडों का खुलकर जिक्र किया। उनका कहना था कि घरेलू स्तर के कोचों और विदेशी प्रशिक्षकों के साथ बोर्ड का रवैया बिल्कुल अलग होता है। विदेशी दिग्गजों को जहां अधिक अधिकार और छूट मिलती है, वहीं स्थानीय लोगों को हर हार के बाद कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि खराब नतीजे आने के बावजूद विदेशी कोचों से उतनी सख्ती से जवाब नहीं मांगा जाता जितनी सख्ती स्वदेशी दिग्गजों पर दिखाई जाती है।
सतही बदलावों से समस्याओं का समाधान नहीं
बोर्ड की ओर से उठाए जा रहे कदमों की आलोचना करते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि केवल दिखावटी या सतही बदलाव करने से क्रिकेट की स्थिति में कोई सुधार नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा, “हमें दबाव में आकर घबराना नहीं चाहिए और सतही बदलाव नहीं करने चाहिए।” उनका मानना है कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए टीम के प्रदर्शन और पूरी व्यवस्था का गहराई से विश्लेषण करने की जरूरत है, तभी सही दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के मजबूत ढांचे का उदाहरण देते हुए पड़ोसी देश की कार्यप्रणाली का भी जिक्र किया।



















