भारतीय घरेलू क्रिकेट में कई ऐसे नाम रहे हैं जिनका सफर सिर्फ राज्यों की टीमों तक ही सीमित रह गया और उन्हें कभी देश की जर्सी पहनने का अवसर नहीं मिला। ऐसा ही एक नाम सुभादीप घोष का भी है जिन्होंने असम और रेलवे की तरफ से क्रिकेट खेला। हालांकि, समय का पहिया ऐसा घूमा कि अब वह भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के ड्रेसिंग रूम में सबसे अहम भूमिकाओं में से एक निभाते नजर आएंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन्हें टीम का नया फील्डिंग कोच नियुक्त करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। अगस्त महीने में श्रीलंका के खिलाफ खेली जाने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज से वह अपनी इस नई जिम्मेदारी की आधिकारिक शुरुआत करेंगे। सुभादीप के जीवन का यह सफर बेहद रोचक और संघर्षों से भरा रहा है, जिसमें एक समय ऐसा भी आया था जब घरेलू क्रिकेट के एक मुकाबले में महान विकेटकीपर एमएस धोनी ने उन्हें स्टंप आउट कर दिया था।
टी दिलीप की जगह संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी
सुभादीप घोष भारतीय टीम के फील्डिंग कोच के रूप में टी दिलीप का स्थान लेंगे। टी दिलीप ने साल 2021 से टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं और पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज से ठीक पहले उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, इंग्लैंड का दौरा समाप्त होने के बाद उनका कार्यकाल पूरा हो गया और बोर्ड ने उनके अनुबंध को आगे न बढ़ाने का फैसला लिया। हालिया महीनों में भारतीय टीम की फील्डिंग के स्तर पर लगातार सवाल खड़े हो रहे थे। मैदान पर आसान कैच टपकाने और लचर प्रदर्शन के बाद आलोचनाओं का दौर शुरू हुआ, जिसके बाद बीसीसीआई ने पूरे कोचिंग और सपोर्ट सिस्टम की गहन समीक्षा की। इसी प्रक्रिया के तहत बोर्ड ने सुभादीप घोष को यह बड़ी कमान सौंपने का निर्णय लिया।
असम के डिगबोई से लेकर मैदान की फुर्ती तक का सफर
घरेलू क्रिकेट जगत में 'जॉय' के नाम से चर्चित 57 वर्षीय सुभादीप घोष मूल रूप से असम के डिगबोई के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 1994-95 से लेकर 2004-05 के सत्र के दौरान असम और रेलवे के लिए घरेलू मैच खेले। अपने इस करियर के दौरान उन्होंने कुल 17 फर्स्ट क्लास और 17 लिस्ट-ए मुकाबलों में हिस्सा लिया। उनके करियर का एक दिलचस्प वाकया साल 2005 का है, जब असम और झारखंड के बीच खेले गए एक लिस्ट-ए मैच के दौरान दिग्गज भारतीय कप्तान एमएस धोनी ने उन्हें स्टंप आउट किया था। सुभादीप अपने समय में दाएं हाथ के मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज और ऑफ स्पिन गेंदबाज हुआ करते थे, लेकिन उनकी असली पहचान बल्लेबाज़ी से ज्यादा मैदान पर उनकी चीते जैसी फुर्ती और शानदार फील्डिंग के लिए थी। उनकी यही खासियत आज उन्हें इस मुकाम पर ले आई है जहां वह एक सफल कोच बन चुके हैं।
राहुल द्रविड़ के कार्यकाल से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का अहम हिस्सा
सुभादीप घोष पिछले 6 से 7 वर्षों से राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी यानी मौजूदा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का एक अनिवार्य हिस्सा रहे हैं। भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज राहुल द्रविड़ के कोचिंग कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई उभरते हुए युवा खिलाड़ियों के साथ करीब से काम किया था। उन्होंने इंडिया ए, अंडर-19 और यहां तक कि सीनियर खिलाड़ियों को भी अपनी फील्डिंग स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रशिक्षित किया है। उनके इस लंबे अनुभव ने बोर्ड का भरोसा जीतने में बहुत बड़ा योगदान दिया है।
आईपीएल से लेकर महिला क्रिकेट टीम तक का शानदार अनुभव
घोष के पास घरेलू स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक कोचिंग का एक लंबा और समृद्ध अनुभव मौजूद है। वह साल 2014 में कोलकाता नाइट राइडर्स की उस टीम का हिस्सा रहे थे जिसने आईपीएल का खिताब अपने नाम किया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के खेमे के साथ भी फील्डिंग कोच की जिम्मेदारी संभाली। सिर्फ पुरुषों के क्रिकेट तक ही उनका दायरा सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने साल 2021 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम के फील्डिंग कोच के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी थीं। इसके अलावा वह लगातार इंडिया ए और भारत की अंडर-19 टीम के साथ भी जुड़े रहे हैं और साल 2024 के अंडर-19 वर्ल्ड कप अभियान में भी उनकी अहम भूमिका थी।
तकनीक और अनुशासन पर रहता है पूरा जोर
कोचिंग के मामले में सुभादीप घोष की शैली बेहद अनुशासित मानी जाती है। वह खिलाड़ियों से नेट प्रैक्टिस के दौरान लगातार ग्राउंड फील्डिंग ड्रिल, रिएक्शन टाइम सुधारने के अभ्यास और कैचिंग प्रैक्टिस करवाते हैं। उनका मुख्य फोकस मैदान पर होने वाली छोटी-छोटी चूकों को जड़ से खत्म करने और खिलाड़ियों की शारीरिक चपलता बढ़ाने पर रहता है। भारतीय टीम आगामी अगस्त 2026 में श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी और यही मुकाबला सुभादीप के लिए बतौर कोच पहली बड़ी परीक्षा होगी। टीम इंडिया की फील्डिंग में पैनापन लाने की पूरी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर आ चुकी है। यदि उनकी यह खास रणनीति मैदान पर रंग लाती है, तो वह उन खिलाड़ियों को एक नई पहचान दिला सकते हैं जिन्हें अपनी फील्डिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए अभी और कड़ी मेहनत की दरकार है।



















