आधुनिक क्रिकेट के दौर में टी20 प्रारूप का रोमांच दुनिया भर के प्रशंसकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। सिर्फ दर्शक ही नहीं, बल्कि आज के खिलाड़ी भी ज्यादा से ज्यादा टी20 मुकाबले खेलना पसंद करते हैं। इस फटाफट क्रिकेट के कारण वनडे और टेस्ट क्रिकेट जैसे पारंपरिक प्रारूपों की लोकप्रियता में कुछ गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद दुनिया भर के लगभग हर क्रिकेटर का यह व्यक्तिगत सपना होता है कि वह अपने देश का प्रतिनिधित्व टेस्ट प्रारूप में करे और सफेद कपड़ों में लाल गेंद से खेले। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का स्तर इतना ऊंचा है कि हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को टेस्ट टीम में लंबा मौका नहीं मिल पाता।
टीम में स्थान पाने की यह भीषण प्रतिस्पर्धा सिर्फ आज के दौर तक सीमित नहीं है। टी20 प्रारूप के आने से पहले भी कई ऐसे क्रिकेटर रहे, जिनका टेस्ट करियर काफी संक्षिप्त रहा। भारतीय टीम में ऐसे ही एक खिलाड़ी रॉबिन सिंह रहे हैं, जिनका वनडे क्रिकेट करियर तो बेहद शानदार और लंबा रहा, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका पहला ही मुकाबला उनका विदाई मैच साबित हुआ।
जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे टेस्ट में हुआ था डेब्यू
रॉबिन सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में अपना कदम अक्टूबर 1998 में रखा था। जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे में आयोजित टेस्ट मैच के दौरान उन्हें भारतीय टीम की टेस्ट कैप सौंपी गई थी। हालांकि, यह मुकाबला उनके करियर का पहला और एकमात्र टेस्ट मैच बनकर रह गया। इस मैच की दोनों पारियों में बल्लेबाजी करते हुए रॉबिन सिंह ने कुल 27 रन बनाए थे। इसके बाद चयनकर्ताओं ने उन्हें टेस्ट टीम में फिर कभी मौका नहीं दिया और उन्हें लाल गेंद के क्रिकेट से दूर ही रहना पड़ा।
वनडे अंतर्राष्ट्रीय प्रारूप में रॉबिन सिंह का रिकॉर्ड
भले ही टेस्ट क्रिकेट में रॉबिन सिंह का करियर एक ही मैच तक सीमित रहा, लेकिन सीमित ओवरों के वनडे क्रिकेट में उनका योगदान काफी उल्लेखनीय था। उन्होंने साल 1989 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच से अपने वनडे अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे लंबे समय तक भारतीय वनडे टीम का हिस्सा बने रहे। रॉबिन सिंह ने भारत के लिए कुल 136 वनडे अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले।
इन 136 मुकाबलों की बल्लेबाजी में रॉबिन सिंह ने 74.30 के स्ट्राइक रेट के साथ कुल 2336 रन बनाए। वनडे क्रिकेट में उनके नाम 1 शतक और 9 अर्धशतक शामिल हैं। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने अपनी उपयोगी माध्यम गति की गेंदबाजी से भी टीम को कई मौकों पर सफलता दिलाई। उन्होंने वनडे करियर में कुल 69 विकेट चटकाए, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 22 रन देकर 5 विकेट लेना रहा।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम मैच और कोचिंग का करियर
रॉबिन सिंह ने भारतीय टीम की जर्सी में अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था। इस वनडे मैच के साथ ही उनके अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटिंग करियर का समापन हो गया। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने खेल से अपना संबंध समाप्त नहीं किया, बल्कि कोचिंग की दुनिया में अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की और विभिन्न क्रिकेट टीमों के कोच के रूप में अपनी सेवाएं दीं।


















