एशियाई खेलों में श्रीलंका के खिलाफ अहम पारी खेलकर टीम को जीत दिलाने के बाद भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन ने बल्लेबाजी की रणनीति और आगामी मुकाबले को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। मुश्किल हालात और चुनौतीपूर्ण पिच पर संयम बरतते हुए उन्होंने टीम के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया। उनका मानना है कि जब सतह से मदद न मिल रही हो, तब तकनीक और अनुशासन ही किसी बल्लेबाज को लंबी पारी खेलने में मदद करते हैं।
मुश्किल पिच पर 150 रन का सुरक्षित लक्ष्य
ईशान किशन के अनुसार मुकाबला बेहद जटिल सतह पर खेला जा रहा था, जहाँ रन जुटाना आसान नहीं था। भारतीय टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों ने मिलकर यह तय किया था कि बोर्ड पर एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा करना बेहद जरूरी है। भारतीय एकादश में चार विशेषज्ञ स्पिनर शामिल थे, इसलिए यह माना गया कि यदि टीम किसी तरह 150 रन के आंकड़े तक पहुँच जाती है, तो गेंदबाजों के पास मैच में पकड़ बनाने के लिए पर्याप्त अवसर होंगे। इसी रणनीति के तहत पूरे बल्लेबाजी क्रम ने सुरक्षित स्थिति में पहुँचने का प्रयास किया।
क्रीज पर टिके बल्लेबाज को अंत तक खेलने का जिम्मा
पारी के दौरान अपने दृष्टिकोण पर बात करते हुए ईशान ने बताया कि उन्होंने केवल परिस्थिति की मांग के अनुरूप ही शॉट चयन पर ध्यान दिया। बीच के ओवरों में पिच के अप्रत्याशित बर्ताव के चलते आत्मविश्वास जुटाना आसान नहीं था। टीम बैठक में पहले ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि जो भी खिलाड़ी क्रीज पर आँखें जमा ले, उसे पूरे 20 ओवर तक टिके रहने का प्रयास करना चाहिए। नए आने वाले बल्लेबाज के लिए ऐसी विषम सतह पर तुरंत बड़े प्रहार करना बेहद जोखिम भरा होता है, इसलिए क्रीज पर जमे बल्लेबाज का अंत तक टिकना टीम हित में था।
खिताबी मुकाबले को लेकर योजना
स्वर्ण पदक के लिए होने वाले अगले मुकाबले पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि टीम डिफेंडिंग चैंपियन के सामने उतरेगी। उनका मानना है कि ऐसे बड़े मैचों में चीजों को बहुत अधिक उलझाने के बजाय बिल्कुल सीधा और सरल रखना ही कारगर रणनीति होती है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के खिलाफ भी वे यह अच्छी तरह जानते थे कि प्रतिद्वंद्वी टीम स्पिन की मददगार परिस्थितियों में चुनौती पेश करेगी। फाइनल में भी उनका ध्यान जरूरत से ज्यादा सोचने के बजाय खेल के प्रत्येक पल का लुत्फ उठाने और स्वाभाविक प्रदर्शन करने पर केंद्रित रहेगा।
देश के लिए मेडल का मुकाबला और समर्थकों की ताकत
ईशान ने माना कि जब कोई एथलीट देश के लिए पदक जीतने के इरादे से मैदान में उतरता है, तो मन में एक विशेष अहसास और अतिरिक्त दबाव दोनों मौजूद होते हैं। स्टेडियम में उमड़े दर्शक, लहराते तिरंगे और लगातार मिलती हौसलाअफजाई खिलाड़ियों में नई ऊर्जा भर देती है। उन्होंने स्थानीय दर्शकों के सहयोगी रवैये की भी सराहना की, जिन्होंने भाषा की बाधा के बावजूद हर संभव मदद की। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक मंच पर भारतीय प्रशंसकों की मौजूदगी को टीम के लिए संबल बताते हुए कहा कि समर्थक चाहे जीत हो या हार, हमेशा टीम के साथ खड़े रहते हैं।


















