क्रिकेट की अनिश्चितताओं से भरी दुनिया में अक्सर खिलाड़ियों का सफर उस मुकाम पर जाकर खत्म नहीं होता, जहां से उन्होंने शुरुआत की थी। कई बार एक छोटा सा फैसला, किसी कोच की बारीक नजर या कप्तान का एक दांव किसी साधारण से दिखने वाले खिलाड़ी की किस्मत पूरी तरह पलट देता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे विश्वस्तरीय बल्लेबाज दर्ज हैं, जिन्होंने गेंद हाथ में थामकर मैदान पर कदम रखा था। वे विपक्षी टीमों के विकेट चटकाने का सपना देखते थे, लेकिन वक्त के साथ हालात बदले और उन्होंने अपनी बल्लेबाजी के दम पर गेंदबाजों के मन में खौफ पैदा कर दिया। यहां हम ऐसे ही पांच दिग्गज क्रिकेटरों की दिलचस्प दास्तान पर नजर डाल रहे हैं, जिन्होंने अपनी भूमिका बदलकर खेल के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा।
स्टीव स्मिथ: लेग-स्पिनर से आधुनिक टेस्ट क्रिकेट के दिग्गज तक
इस कड़ी में सबसे पहला और हैरान करने वाला नाम ऑस्ट्रेलिया के स्टार बल्लेबाज स्टीव स्मिथ का आता है। साल 2010 में जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका पदार्पण हुआ था, तब ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट जगत उन्हें महान लेग-स्पिनर शेन वॉर्न के उत्तराधिकारी के रूप में देख रहा था। उस दौर में स्मिथ एक उपयोगी लेग-स्पिनर की हैसियत से टीम में शामिल किए गए थे, जो आठवें या नौवें नंबर पर उतरकर निचले क्रम में कुछ उपयोगी रन जोड़ सकते थे। हालांकि, स्मिथ ने जल्द ही यह समझ लिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए उन्हें अपनी बल्लेबाजी पर सबसे ज्यादा काम करना होगा। इसके बाद उन्होंने घरेलू स्तर पर अपनी बल्लेबाजी तकनीक में व्यापक बदलाव किए, नेट्स में अनगिनत घंटे पसीना बहाया और अपनी कमजोरियों को ताकत में तब्दील कर दिया। आज नतीजा सबके सामने है, जहां स्टीव स्मिथ को आधुनिक टेस्ट क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और महान बल्लेबाजों की कतार में गिना जाता है।
रोहित शर्मा: दिनेश लाड की पारखी नजर और धोनी का साहसिक फैसला
भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी कप्तान रोहित शर्मा की दास्तान भी कुछ इसी तरह के अप्रत्याशित मोड़ से भरी हुई है। अपने शुरुआती दिनों में, खासकर स्कूल स्तर के क्रिकेट के दौरान, रोहित एक सामान्य ऑफ-स्पिनर के तौर पर खेलते थे। उस समय उनके कोच दिनेश लाड ने अभ्यास सत्रों के दौरान रोहित की सहज बल्लेबाजी टाइमिंग और गेंद को भांपने की अद्वितीय क्षमता को तुरंत पहचान लिया। दिनेश लाड ने युवा रोहित को स्पष्ट सलाह दी कि वे गेंदबाजी छोड़कर अपनी पूरी ऊर्जा और ध्यान केवल बल्लेबाजी को निखारने में लगाएं। रोहित ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा तो शुरुआत में वह मध्यक्रम के बल्लेबाज रहे, जहां कई वर्षों तक उनका प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा। उनके करियर का सबसे निर्णायक मोड़ साल 2013 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान आया, जब तत्कालीन कप्तान एमएस धोनी ने उन पर गहरा भरोसा जताते हुए उन्हें पारी की शुरुआत करने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। रोहित शर्मा ने उस मौके को दोनों हाथों से भुनाया और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, जिसके चलते वह सीमित ओवरों के क्रिकेट में दुनिया के सबसे विध्वंसक सलामी बल्लेबाजों में स्थापित हो गए।
सनथ जयसूर्या: अर्जुन रणतुंगा का दांव जिसने बदला वनडे क्रिकेट
श्रीलंका के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज सनथ जयसूर्या ने भी अपने करियर की शुरुआत एक विशेषज्ञ स्पिन गेंदबाज के तौर पर की थी। साल 1989 में जब उन्होंने अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया, तो वह निचले क्रम में सातवें या आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आते थे। टीम में उनका प्राथमिक काम केवल बीच के ओवरों में कसी हुई स्पिन गेंदबाजी करके रन गति को रोकना और अहम विकेट हासिल करना था। निचले क्रम में वह महज एक पिंच-हिटर के रूप में तेज रन बनाने की कोशिश करते थे। यह सिलसिला कई सालों तक जारी रहा, लेकिन 1995-96 के दौरान श्रीलंकाई टीम प्रबंधन और तत्कालीन कप्तान अर्जुन रणतुंगा ने एक बेहद साहसिक प्रयोग करने की सोची। रणतुंगा ने जयसूर्या को एकदिवसीय मैचों में पारी का आगाज करने का आदेश दिया। पहले 15 ओवरों के फील्डिंग प्रतिबंधों का फायदा उठाते हुए जयसूर्या ने विपक्षी तेज गेंदबाजों पर जिस तरह से शुरुआत से ही आक्रमण करना शुरू किया, उसने सीमित ओवरों के क्रिकेट खेलने का नजरिया ही हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। इसके बाद उनके नाम से एक साधारण स्पिनर का ठप्पा हट गया और वह एक ऐतिहासिक सलामी बल्लेबाज बन गए।
केविन पीटरसन: दक्षिण अफ्रीकी ऑफ-स्पिनर से इंग्लैंड के धाकड़ बल्लेबाज
इंग्लैंड के सबसे सफल और शैलीदार बल्लेबाजों में शुमार केविन पीटरसन का अतीत भी कुछ ऐसा ही रहा है। दक्षिण अफ्रीका के घरेलू क्रिकेट सर्किट में जब पीटरसन ने खेलना शुरू किया था, तब वह मुख्य तौर पर एक ऑफ-स्पिनर थे और बल्लेबाजी क्रम में निचले पायदान पर पुछल्ले बल्लेबाज के तौर पर उतरते थे। गेंदबाजी में पर्याप्त मौके न मिलने और परिस्थितियों से जूझने के बाद उन्होंने अपना रुख बदला और काउंटी क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी पर पूरा जोर दिया। काउंटी मैचों में लगातार शतकों और रनों का अंबार लगाने के दम पर उन्होंने चयनकर्ताओं को मजबूर कर दिया। आखिरकार साल 2004-05 में उन्हें इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम में मध्यक्रम के एक प्रमुख और भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में जगह मिली। इसके बाद पीटरसन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जो आक्रामक और बेखौफ पारियां खेलीं, उसने उन्हें विश्व क्रिकेट के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में शुमार कर दिया।
नासिर जमशेद: तेज रफ्तार का सपना छोड़कर बने सफल सलामी बल्लेबाज
पाकिस्तान के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज नासिर जमशेद की कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। बचपन में नासिर पाकिस्तान के दो सबसे घातक तेज गेंदबाजों वसीम अकरम और शोएब अख्तर को गेंदबाजी करते हुए देखकर बड़े हुए थे। उनका सपना भी उन्हीं की तरह तूफानी रफ्तार से गेंद फेंककर बल्लेबाजों को परेशान करने का था। हालांकि, जब वह जूनियर स्तर के ट्रायल्स और स्थानीय क्लब मैचों में खेलने उतरे, तो वहां मौजूद अनुभवी कोचों ने गौर किया कि उनकी तेज गेंदबाजी उतनी असाधारण नहीं थी, जितनी उनकी स्वाभाविक बल्लेबाजी क्षमता थी। कोचों ने उनके बैकफुट पंच और जबरदस्त टाइमिंग को परखा और उन्हें तेज गेंदबाजी का ख्याल छोड़कर बल्लेबाजी पर समर्पित होने के लिए प्रेरित किया। नासिर जमशेद ने इस सलाह को गंभीरता से लिया और बाएं हाथ से अपनी बल्लेबाजी पर काम किया, जिसके दम पर आगे चलकर उन्होंने राष्ट्रीय टीम में एक सफल सलामी बल्लेबाज के रूप में पहचान बनाई।



















