झज्जर जिले के बादली गांव के रहने वाले मैनपाल उर्फ ‘धीला’ ने अपराध की दुनिया से निकलकर एक अनोखा सफर तय किया। हत्या और लूट जैसे संगीन मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहा यह अपराधी जेल की पैरोल मिलने के बाद फरार हो गया था और देश छोड़कर सीधे कंबोडिया जा पहुंचा था। विदेश में उसने अपनी पहचान बदलकर नया कारोबार शुरू किया और वहीं अपनी प्रेमिका के साथ रहने लगा। कानून के शिकंजे में दोबारा आने के बाद उसने अपनी विदेशी साथी से भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार शादी रचाई है।
अपराध की दुनिया और सजा का सफर
पुलिस दस्तावेजों के मुताबिक मैनपाल के खिलाफ हत्या के प्रयास, डकैती, जबरन वसूली और पुलिस पर हमलों से जुड़े दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से कई मामलों में अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके चलते उसे हिसार की सेंट्रल जेल में रखा गया था। कानून के कड़े पहरे के बीच उसने पैरोल का फायदा उठाया और तय समय पर जेल लौटने के बजाय भूमिगत हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में दबिश दी और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया था।
फर्जी पासपोर्ट के सहारे विदेश यात्रा
फरारी के दौरान उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची। उसने गुरुग्राम के एक फर्जी पते पर ‘सोनू कुमार’ के नाम से फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेज तैयार करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर उसने पासपोर्ट हासिल किया और कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विदेशी उड़ान पकड़कर बैंकॉक निकल गया। कुछ दिन थाईलैंड में बिताने के बाद वह सड़क मार्ग से कंबोडिया पहुंच गया और सिमरियप शहर में अपना नया ठिकाना बना लिया।
कंबोडिया में कारोबार और परिवार
सिमरियप में उसने स्थानीय महिला चैन मैटा यानी मेटाचान के साथ मिलकर जीवन की नई शुरुआत की। दोनों ने मिलकर बचत की राशि से एक मकान खरीदा और साथ रहने लगे। उसने वहां एक डिस्को और एक रेस्टोरेंट की शुरुआत की, जो सफलतापूर्वक चलने लगे। विदेशी धरती पर रहते हुए उनके तीन बच्चे हुए, जिनके नाम बाहुबली, भगत कुमार और आस्था रखे गए। भारत का सबसे वांछित अपराधी विदेश में एक सफल व्यवसायी के रूप में रह रहा था।
वीजा नवीनीकरण के दौरान गिरफ्तारी
भारतीय अधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। लंबे समय तक कानून से बचने के बाद आखिरकार उसका यह छलावा समाप्त हो गया। जब वह कंबोडिया के आव्रजन कार्यालय में अपने वीजा का नवीनीकरण कराने पहुंचा, तो अंतरराष्ट्रीय प्रणालियों में उसकी पहचान उजागर हो गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने उसे दबोच लिया और कानूनी औपचारिकताओं के बाद भारत वापस भेज दिया गया।
भारी सुरक्षा के बीच 12 घंटे की पैरोल
भारत लौटने के बाद उसे फिर से हिसार जेल में बंद कर दिया गया। अपनी कंबोडियाई साथी मेटाचान को कानूनी और सामाजिक मान्यता दिलाने के लिए उसने अदालत में याचिका दायर की, जिस पर विचार करते हुए अदालत ने उसे बारह घंटे की अभिरक्षा पैरोल प्रदान की। झज्जर के दुलीना क्षेत्र में एक निजी समारोह स्थल पर यह विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और समारोह स्थल को पुलिस छावनी में बदल दिया गया था।
पारंपरिक रीति-रिवाजों से विवाह
दूल्हा बने मैनपाल ने ऑफ-व्हाइट रंग की शेरवानी पहनी थी, जबकि उसकी कंबोडियाई दुल्हन मेटाचान पारंपरिक लाल लहंगे में नजर आईं। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच दोनों ने सात फेरे लिए। इस अनूठे विवाह समारोह में लगभग पांच सौ मेहमान शामिल हुए, जिसमें कंबोडिया से आई दुल्हन के करीबी और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।



















