भारतीय महिला क्रिकेट टीम की आक्रामक ओपनर शेफाली वर्मा को रायपुर में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए दूसरे महिला टी20 इंटरनेशनल मुकाबले के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी की आचार संहिता के नियम तोड़ने का दोषी पाया गया है। इस घटना के बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर फटकार लगाई गई है और साथ ही उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ा गया है। श्रृंखला का तीसरा टी20 मुकाबला शुरू होने से ठीक पहले सामने आई इस बड़ी खबर ने भारतीय खेमे को पूरी तरह सतर्क कर दिया है, क्योंकि अब खिलाड़ी के पास भविष्य में गलती करने की कोई गुंजाइश नहीं बची है। मैदान पर होने वाली ऐसी अनुशासनहीनता के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिससे पूरी टीम प्रबंधन भी अब खिलाड़ियों को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रहा है।
अनुच्छेद 2.2 के तहत की गई कार्रवाई
शेफाली वर्मा को खिलाड़ियों और उनके सहयोगी स्टाफ के लिए निर्धारित आईसीसी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.2 के उल्लंघन का दोषी करार दिया गया है। यह विशिष्ट नियम अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के दौरान क्रिकेट उपकरणों, खिलाड़ियों के कपड़ों, मैच के मैदान के उपकरणों या फिर मैदान से जुड़ी अन्य किसी भी वस्तु के साथ अनुचित या अपमानजनक व्यवहार करने पर रोक लगाता है। इस शालीनता और नियमों के दायरे में रहकर ही खेल भावना को बनाए रखना हर खिलाड़ी की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। पिछले चौबीस महीनों की समयावधि में शेफाली वर्मा का यह अपनी तरह का पहला आधिकारिक अपराध है, जिसके कारण उन पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि उन्होंने अपनी गलती को तुरंत स्वीकार कर लिया और मैच रेफरी के फैसले को मान लिया।
रायपुर मैच के दौरान इस वजह से भड़की थी नाराजगी
यह पूरी घटना जिम्बाब्वे की पारी के ठीक 12वें ओवर के दौरान घटी थी जब मैदान पर मुकाबला अपने रोमांचक मोड़ पर था। श्री चरणी की गेंदबाजी के दौरान शेफाली वर्मा ने मिड ऑफ की दिशा में तैनात रहते हुए चिपो मुगेरी-तिरिपानो का एक आसान सा कैच टपका दिया था। इस कैच के छूट जाने से उपजी गहरी निराशा और गुस्से पर वह काबू नहीं रख पाईं और उन्होंने गुस्से में आकर गेंद को सीधे जमीन पर पटक दिया था। इसी हरकत को मैदान पर मौजूद अंपायरों ने आचार संहिता के खिलाफ माना। इस मैच में ऑन-फील्ड अंपायर की जिम्मेदारी वृंदा राठी और गायत्री वेणुगोपालन ने संभाली थी, जबकि तीसरे अंपायर के रूप में अन्ना हैरिस और चौथे अंपायर के तौर पर जननी नारायणन अपनी सेवाएं दे रही थीं। इन सभी अधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस अनुचित आचरण पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
मैच रेफरी के सामने स्वीकार की अपनी गलती
घटना के तुरंत बाद मामले को आगे की लंबी प्रक्रिया में ले जाने की बजाय आपसी सहमति से ही सुलझा लिया गया। शेफाली वर्मा ने बिना किसी टालमटोल के अपनी गलती को पूरी तरह स्वीकार कर लिया और आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय मैच रेफरी पैनल की सम्मानित सदस्य जीएस लक्ष्मी द्वारा प्रस्तावित सजा को बिना किसी विरोध के मान लिया। इस त्वरित सहमति और स्वीकारोक्ति के चलते मामले में किसी भी प्रकार की औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी। खिलाड़ियों के लिए यह एक कड़ा संदेश होता है कि वे मैदान पर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें। इस कार्रवाई के बाद से भारतीय टीम प्रबंधन भी आगामी मुकाबलों में खिलाड़ियों के ऑन-फील्ड बर्ताव को लेकर बेहद चौकस हो गया है ताकि किसी भी तरह के बड़े प्रतिबंध से बचा जा सके।
क्या कहती है आईसीसी के लेवल-1 उल्लंघन की सजा
आईसीसी के नियमों के अनुसार यदि कोई खिलाड़ी आचार संहिता के लेवल-1 का उल्लंघन करता है, तो उसे न्यूनतम आधिकारिक फटकार से लेकर अधिकतम अपनी मैच फीस का पचास प्रतिशत तक जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। इसके अलावा खिलाड़ी के अनुशासन रिकॉर्ड में एक या फिर दो डिमेरिट पॉइंट जोड़ने का प्रावधान भी मौजूद है। नियमों की बारीकियों के मुताबिक यदि कोई भी खिलाड़ी लगातार चौबीस महीने की कुल अवधि के भीतर चार या उससे ज्यादा डिमेरिट पॉइंट अपने नाम कर लेता है, तो वे सभी पॉइंट स्वतः ही सस्पेंशन पॉइंट में बदल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप खिलाड़ी पर कड़ी पाबंदी लग सकती है। दो सस्पेंशन पॉइंट मिलने की स्थिति में खिलाड़ी को एक टेस्ट मैच, दो वनडे मुकाबलों या फिर दो टी20 इंटरनेशनल मैचों से तुरंत प्रतिबंधित कर दिया जाता है, जो भी सजा पहले तय होती है वही लागू की जाती है।
डिमेरिट पॉइंट हटाने के नियम और आगे की चेतावनी
आईसीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी खिलाड़ी के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में जोड़े गए डिमेरिट पॉइंट ठीक उसी तारीख से लेकर अगले चौबीस महीनों तक पूरी तरह प्रभावी बने रहते हैं। निर्धारित दो साल की यह अवधि पूरी होने के बाद वे पॉइंट स्वतः ही खिलाड़ी के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिए जाते हैं। चूंकि शेफाली वर्मा के खाते में यह पहला डिमेरिट पॉइंट जुड़ा है, इसलिए उन्हें अभी से काफी सतर्क रहने की सख्त जरूरत है। आने वाले अंतरराष्ट्रीय मैचों में जरा सी भी लापरवाही या अनुशासनहीनता उन्हें भारी पड़ सकती है क्योंकि एक बार और ऐसे अंक जुड़ने पर सीधा प्रतिबंध का खतरा मंडराने लगेगा। भारतीय टीम के खेमे में इस घटना के बाद से अनुशासन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं ताकि मैदान पर शांत रहकर देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया जा सके।


















