अक्टूबर का महीना आते ही डरावनी कहानियों और सिहरन पैदा करने वाले अनुभवों की चर्चा आम हो जाती है। यदि आपको भूतों के किस्से, अनसुलझे रहस्य और दिल की धड़कनें बढ़ा देने वाले दृश्य पसंद हैं, तो इस बार अपनी फिल्म देखने की योजना में कुछ खास और खौफनाक कहानियों को शामिल करना चाहिए। इस खास मौके पर आपके मनोरंजन को कई गुना बढ़ाने के लिए हम ऐसी आठ हॉरर फिल्मों की सूची लेकर आए हैं, जिनमें डर, सस्पेंस, काला जादू और अजीबोगरीब घटनाओं का बेजोड़ मिश्रण मिलता है। ये फिल्में आपको कभी किसी अनजान और खतरनाक दुनिया में खींच ले जाएंगी, तो कभी ऐसी परिस्थितियों से रूबरू कराएंगी जिनसे बाहर निकलना आसान नहीं होता। आइए जानते हैं उन आठ चुनिंदा फिल्मों के बारे में जो इस रात को बेहद रोमांचक बना सकती हैं।
बैदा: सुपरनैचुरल और साइंस-फिक्शन का अनोखा मिश्रण
अगर आप कुछ लीक से हटकर देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह कहानी अलौकिक घटनाओं के साथ-साथ विज्ञान कथा के तत्वों को भी बड़े ही दिलचस्प अंदाज में पिरोती है। पुनीत शर्मा के निर्देशन में बनी इस कृति में सुधांशु राय और हितेन तेजवानी जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आते हैं। इसकी कहानी राम बाबू नामक एक पूर्व खुफिया अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका पूरा जीवन तब उलट-पलट जाता है जब वह एक रहस्यमय लोक में फंस जाता है। इस अजीब जगह पर समय और वास्तविकता के सारे नियम बदल जाते हैं और उसे तमाम डरावनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
स्त्री 2: डर के साये में हंसी का तड़का
यदि आप सिहरन के साथ-साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन और हास्य का भी आनंद लेना चाहते हैं, तो श्रद्धा कपूर की यह फिल्म आपकी सूची में जरूर होनी चाहिए। राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की यह लोकप्रिय प्रस्तुति चंदेरी शहर की उसी डरावनी और दिलचस्प दास्तान को आगे बढ़ाती है, जहां इस बार लोगों के सामने सरकटे नाम का एक नया खतरा मंडरा रहा है। एक तरफ जहां खौफनाक घटनाएं शहरवासियों की रातों की नींद उड़ा देती हैं, वहीं दूसरी तरफ शानदार संवाद और कॉमेडी इस गंभीर माहौल को थोड़ा हल्का बनाए रखते हैं। फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जो आपको एक पल डराएंगे तो अगले ही पल हंसने पर मजबूर कर देंगे।
1920: पुरानी हवेली और अनकहा खौफ
एक सूनी हवेली, अतीत के गहरे राज और किसी अदृश्य ताकत का खौफ अगर आपको आकर्षित करता है, तो विक्रम भट्ट के निर्देशन में बनी इस क्लासिक फिल्म को अवश्य देखना चाहिए। इस कहानी में एक नवविवाहित महिला पर किसी बुरी आत्मा का साया पड़ जाता है और उसका जीवन संकट में आ जाता है। अपनी जीवनसंगिनी को इस भयानक स्थिति से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उसका पति हर संभव प्रयास करता है। हालांकि जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती जाती है, परेशानियां और डर दोनों का दायरा बड़ा होता चला जाता है। इसका पुराना परिवेश और आत्माओं से जुड़ा ताना-बाना एक पारंपरिक और डरावना अनुभव प्रदान करता है।
शैतान: अपने ही घर के भीतर छिपा खतरा
कई बार सबसे बड़ा खौफ किसी बाहरी और अनजान जगह से नहीं बल्कि अपने ही घर की चारदीवारी के भीतर से जन्म लेता है। अजय देवगन और आर. माधवन अभिनीत यह फिल्म कुछ इसी तरह के मनोवैज्ञानिक और डरावने पहलुओं को पर्दे पर उतारती है। इस कथानक में एक रहस्यमय मेहमान का प्रवेश एक सामान्य और सुखी परिवार की पूरी दुनिया को तहस-नहस कर देता है। काले जादू का साया, असामान्य शक्तियां और अपनों के सामने खड़ा गंभीर संकट फिल्म के तनाव को लगातार चरम पर बनाए रखता है। आर. माधवन का खूंखार और आक्रामक अंदाज इस सिहरन को कई गुना बढ़ा देता है।
तुम्बाड: लालच और अंधकार की खौफनाक दास्तान
यदि आप हॉरर जॉनर में किसी बिल्कुल नए और अनूठे प्रयोग की तलाश में हैं, तो इस कलाकृति को भूलकर भी नजरअंदाज न करें। यह सिर्फ डर और भूत-प्रेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य की अंतहीन लालसा और उसके विनाशकारी परिणामों का बहुत ही गहरा चित्रण करती है। इसकी पूरी पटकथा एक ऐसे गुप्त खजाने के चारों ओर घूमती है जिसे पाने की लालच इंसान को सबसे गहरे अंधकार और खौफ के गर्त में धकेल देती है। प्राचीन लोककथाओं, विचित्र पात्रों और भयानक वातावरण का ऐसा अनूठा संगम इसे सामान्य डरावनी फिल्मों से पूरी तरह अलग और खास बनाता है।
भेड़िया: जंगल की दास्तान और सुपरनैचुरल बदलाव
अगर आपका मन कुछ ऐसा देखने का है जिसमें रोमांच के साथ फेंटेसी और कॉमेडी का भी तड़का हो, तो वरुण धवन और कृति सेनन की यह फिल्म एक सही चुनाव साबित हो सकती है। इसकी मूल कथा एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द बुनी गई है जिसकी जिंदगी एक घने जंगल में किसी जानवर के काटने के बाद पूरी तरह बदल जाती है। इसके बाद उसके शरीर और स्वभाव में अजीबोगरीब परिवर्तन आने शुरू हो जाते हैं और उसे महसूस होता है कि उसके भीतर कुछ ऐसा पनप रहा है जिस पर नियंत्रण पाना आसान नहीं है। जंगल का रहस्यमय माहौल और हास्य का हल्का पुट इसे एक मनोरंजक और अलग अनुभव बनाता है।
परी: गहरे रहस्यों और बेचैनी से भरी कहानी
जिन दर्शकों को गहरी और डार्क मिस्ट्री वाली फिल्में पसंद हैं, उनके लिए अनुष्का शर्मा की यह प्रस्तुति एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है। इस कथा की नायिका एक ऐसी रहस्यमय महिला है जिसके अतीत के पन्नों में कई भयानक और खौफनाक राज दबे हुए हैं। जैसे-जैसे यह सफर आगे बढ़ता है, इन अनसुने रहस्यों की परतें एक-एक करके बाहर आती हैं और कई चौंकाने वाली घटनाएं सामने आने लगती हैं। इसका गंभीर मिजाज और अलौकिक तत्व इसे सामान्य फिल्मों की भीड़ से अलग खड़ा करते हैं।
द कॉन्ज्यूरिंग: पैरानॉर्मल जांचकर्ताओं का खौफनाक सफर
हॉलीवुड की पैरानॉर्मल कहानियों के शौकीनों के लिए यह फिल्म किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। यह उन वास्तविक या असाधारण घटनाओं पर आधारित है जो एक सामान्य परिवार के जीवन में भूचाल ला देती हैं। इस कहानी में एड और लॉरेन वॉरेन नामक प्रसिद्ध पैरानॉर्मल जांचकर्ता उस पीड़ित परिवार की सहायता के लिए आगे आते हैं जिनके घर में विचित्र और भयावह गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।





















