क्रिकेट की दुनिया में अक्सर गंभीर मुकाबले देखने को मिलते हैं, लेकिन कई बार खेल के दौरान ऐसी घटनाएं घट जाती हैं जो दशकों तक याद रखी जाती हैं। भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर के साथ जुड़ी एक ऐसी ही अनोखी कहानी है, जिसमें एक अंपायर को बल्लेबाज का हेयर स्टाइलिस्ट बनना पड़ा था। अपनी तकनीक के लिए मशहूर लिटिल मास्टर के करियर में यह वाकया उस समय चर्चा का विषय बना जब उन्होंने मैदान के बीचोंबीच अपनी परेशानी का हल ढूंढने के लिए अंपायर की मदद ली थी।
यह घटना साल 1974 के इंग्लैंड दौरे के दौरान की है। मैनचेस्टर का ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान भारत और इंग्लैंड के बीच एक चुनौतीपूर्ण टेस्ट मैच की मेजबानी कर रहा था। सुनील गावस्कर उस समय अपने विशिष्ट हेयर स्टाइल के साथ मैदान पर उतरे थे, लेकिन मौसम का मिजाज कुछ और ही था। तेज हवाओं के चलते उनके बाल बार-बार उनकी आंखों के सामने आ रहे थे। चूंकि उन्हें इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों का सामना करना था, इसलिए गेंद पर नजरें टिकाए रखना अनिवार्य था। लगातार हवा के झोंकों से परेशान गावस्कर ने महसूस किया कि उनके बड़े बाल उनकी बल्लेबाजी में बड़ी बाधा डाल रहे हैं।
अपनी एकाग्रता बनाए रखने के लिए गावस्कर ने मैदान पर खड़े अंपायर डिकी बर्ड के पास जाकर अपनी समस्या साझा की। डिकी बर्ड, जो उस समय के सबसे प्रतिष्ठित अंपायरों में गिने जाते थे, सुनील गावस्कर की बात सुनकर पहले तो दंग रह गए। हालांकि, उन्होंने तुरंत अपनी जेब से एक छोटी कैंची निकाली, जिसका उपयोग वे गेंद की सीम या अन्य धागों को सही करने के लिए किया करते थे। डिकी बर्ड ने खेल के दौरान बीच क्रीज पर ही सुनील गावस्कर के बाल काटने का काम शुरू कर दिया।
मैदान पर मौजूद विपक्षी खिलाड़ियों और दर्शक दीर्घा में बैठे दर्शकों के लिए यह नज़ारा अविश्वसनीय था। हर कोई इस दृश्य को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक सका। डिकी बर्ड भी मुस्कुराते हुए यह कहते सुने गए कि अंपायरों को अब अजीबोगरीब काम भी करने पड़ रहे हैं। इस छोटे से हेयरकट ने गावस्कर को राहत दी और उन्होंने फिर से अपनी एकाग्रता के साथ बल्लेबाजी जारी रखी। यह लम्हा क्रिकेट इतिहास के सबसे हास्यपूर्ण पलों में आज भी गिना जाता है।
सुनील गावस्कर का यह किस्सा उनके विशाल करियर का केवल एक छोटा सा हिस्सा है। उनके करियर की शुरुआत साल 1971 में वेस्टइंडीज के दौर से हुई थी। पोर्ट ऑफ स्पेन के मैदान पर अपने डेब्यू टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में 65 और दूसरी पारी में 67 रन बनाए थे। इसी मैच में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज को उसी की सरजमीं पर पहली बार मात देकर इतिहास रचा था।
गावस्कर का 1971 का वह दौरा आज भी बल्लेबाजी के नजरिए से दुनिया का सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। उन्होंने उस सीरीज में वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों का बिना हेलमेट के सामना करते हुए 154.80 के शानदार औसत से कुल 774 रन बनाए थे। उनके बल्ले से उस सीरीज में 4 शतक और 3 अर्धशतक निकले थे। किसी भी बल्लेबाज द्वारा अपनी पहली टेस्ट सीरीज में बनाए गए रनों का यह रिकॉर्ड आज भी अटूट है। सुनील गावस्कर के उस प्रदर्शन ने भारतीय क्रिकेट को विदेशों में लड़ने और जीतने का नया आत्मविश्वास दिया था, जिससे वे भारतीय बल्लेबाजी की एक अभेद्य दीवार बन गए थे।











