भारतीय क्रिकेट जगत में अक्सर यह माना जाता है कि खेल के उच्चतम स्तर तक पहुंचने के लिए पढ़ाई-लिखाई को पीछे छोड़ना पड़ता है। हालांकि, भारतीय ऑलराउंडर व्यंकटेश अय्यर ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह बदल दिया है। मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और धारदार गेंदबाजी से विपक्षी टीमों को दबाव में लाने वाले व्यंकटेश अय्यर खेल के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी बेहद मजबूत पहचान बना चुके हैं। आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ बड़े अनुबंध हासिल करने के बावजूद पढ़ाई के प्रति उनका उत्साह कम नहीं हुआ है और वे बहुत जल्द अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाने जा रहे हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंसी से कॉर्पोरेट ऑफर और सरकारी नौकरी तक का सफर
व्यंकटेश अय्यर की शैक्षणिक यात्रा किसी भी युवा छात्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपनी शुरुआती उच्च शिक्षा वाणिज्य स्नातक के रूप में पूरी की। इसके बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार चार्टर्ड अकाउंटेंसी की परीक्षा में हिस्सा लिया और CA इंटरमीडिएट स्तर सफलतापूर्वक पास किया। जब सीए फाइनल की तैयारी का समय आया, तो क्रिकेट और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने के लिए उन्होंने फाइनेंस में एमबीए करने का निर्णय लिया। एमबीए की पढ़ाई पूरी होने पर वैश्विक कॉर्पोरेट कंपनी डेलॉयट ने उन्हें ₹15 लाख सालाना का जॉब पैकेज ऑफर किया था, लेकिन उन्होंने क्रिकेट करियर को प्राथमिकता देते हुए इस प्रस्ताव को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया। अपनी शैक्षणिक योग्यता और खेल प्रतिभा के बल पर उन्हें भारत सरकार के आयकर विभाग में भी नियुक्ति प्राप्त हुई।
क्रिकेट के दबाव के बीच पढ़ाई कैसे बनती है स्ट्रेस बस्टर
मैदान पर सफलता पाने के बाद जहां कई खिलाड़ी पढ़ाई रोक देते हैं, वहीं व्यंकटेश अय्यर ने अपनी शिक्षा जारी रखी। वर्तमान में वे फाइनेंस विषय में पीएचडी कर रहे हैं। उनका मानना है कि खेल का करियर एक सीमित समय तक रहता है, जबकि शिक्षा जीवन के अंत तक व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है। जब वे मैदान पर उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव का सामना करते हैं, तो पढ़ाई उनके लिए एक बेहतरीन स्ट्रेस बस्टर और मानसिक विश्राम का काम करती है। वे वित्तीय साक्षरता को व्यावहारिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मानते हैं।
समय प्रबंधन और अनुशासन की अनूठी मिसाल
व्यंकटेश अय्यर की यह सफलता साबित करती है कि सही अनुशासन और समय प्रबंधन के जरिए सपनों और शैक्षणिक लक्ष्यों दोनों में शीर्ष स्थान हासिल किया जा सकता है। वे केवल एक सफल क्रिकेटर नहीं हैं, बल्कि आधुनिक पीढ़ी के लिए एक ऐसे उदाहरण हैं जो यह संदेश देते हैं कि ज्ञान अर्जित करने की कोई तय सीमा नहीं होती।



















