कुआलालंपुर में खेले गए एसीसी प्रीमियर कप के फाइनल में नेपाल की पुरुष क्रिकेट टीम ने संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ 44 रनों की जीत दर्ज की और एशिया कप 2027 के मुख्य ड्रॉ में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और कप्तानी तीनों विभागों में असरदार प्रदर्शन के दम पर मिली यह सफलता नेपाल के लिए सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि बांग्लादेश में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट तक पहुंचने वाला रास्ता है।
मुख्य ड्रॉ में नेपाल की दूसरी उपस्थिति
नेपाल के लिए एशिया के प्रमुख टूर्नामेंट के मुख्य ड्रॉ में प्रवेश करना एक बड़े सपने के पूरा होने जैसा है। इस जगह से टीम को एशिया के पांच बड़े आईसीसी पूर्ण सदस्य देशों के सामने अपनी कसौटी रखने का अवसर मिलेगा। इन टीमों में भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका शामिल हैं।
प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 50 ओवर के प्रारूप में खेला जाएगा और नेपाल की यह कुल दूसरी उपस्थिति होगी। इससे पहले टीम ने 2023 में श्रीलंका में हुए एशिया कप में भी हिस्सा लिया था। उस भागीदारी ने खिलाड़ियों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया और दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींचा।
इस बार कामयाबी का महत्व एक ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। नेपाल में क्रिकेट को लेकर बढ़ता उत्साह, खिलाड़ियों की लगातार मेहनत और कठिन मुकाबले में न डगमगाने वाला जज़्बा इस जीत के पीछे दिखाई देता है। मुख्य ड्रॉ में जगह मिलने से टीम के सामने अब एशिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ अपनी तैयारी दिखाने का और बड़ा मंच होगा।
आसिफ शेख ने दबाव में संभाली शुरुआत
खिताबी मुकाबले के दिन कुआलालंपुर के मैदान पर क्रिकेट का उत्साह साफ झलक रहा था। टॉस जीतने के बाद कप्तान संदीप लामिछाने ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। यह निर्णय मैच के बाद सही साबित हुआ, क्योंकि नेपाल ने शुरुआत से ही यूएई के गेंदबाजों पर दबाव बनाने की योजना सफल बनाई।
सलामी बल्लेबाज आसिफ शेख ने क्रीज पर मजबूती से कदम जमाए और फाइनल के तनाव को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने सोच समझकर बल्लेबाजी करते हुए आक्रामकता भी बनाए रखी। 106 गेंदों में 102 रन बनाने वाली उनकी पारी ने नेपाल को बड़ा लक्ष्य खड़ा करने की मजबूत बुनियाद दी।
आसिफ के पवेलियन लौटने के बाद गुलसन झा और रोहित पौडेल ने मध्यक्रम में जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने तेज और उपयोगी पारियां खेलकर स्कोरबोर्ड को रुकने नहीं दिया। उनके योगदान से नेपाल ने निर्धारित ओवरों में 9 विकेट खोकर 313 रन बनाए, जो यूएई के लिए कठिन लक्ष्य साबित हुआ।
आसिफ के शतक के बाद भी टीम को अंतिम ओवरों में रफ्तार बनाए रखनी थी। गुलसन झा और रोहित पौडेल की सहायक पारियों ने नेपाल को केवल एक बड़ी पारी पर निर्भर नहीं रहने दिया। इस साझा प्रयास ने 313 रनों के पहाड़ जैसे स्कोर को संभव किया और गेंदबाजों के पास बचाव के लिए पर्याप्त अंतर छोड़ा।
यूएई ने संघर्ष किया, लेकिन गेंदबाजों ने पलटा मैच
314 रनों का पीछा करने उतरी यूएई की टीम को शुरुआत से दबाव में रहना पड़ा, लेकिन उसने मुकाबला जल्दी हाथ से नहीं जाने दिया। राहुल चोपड़ा ने अकेले मोर्चा संभाला और शतक जमाया। उनकी पारी ने कुछ देर के लिए नेपाल की योजनाओं को दबाव में डाला और मुकाबले को जीवंत रखा।
नेपाल के गेंदबाजों ने इस दबाव में धैर्य बनाए रखा और सही समय पर पलटवार किया। तेज गेंदबाज करण केसी ने सटीक और धारदार गेंदों से मैच का संतुलन बदल दिया। उन्होंने अपने प्रभावी स्पेल में 3 विकेट लिए और 49 रन ही दिए। इन तीनों विकेटों ने यूएई की रन बनाने की गति को रोका और नेपाल को नियंत्रण वापस दिलाया।
करण केसी के अलावा बाकी गेंदबाजों ने भी लाइन और लंबाई में अनुशासन बनाए रखा। नेपाल ने मध्य और अंतिम चरणों में यूएई पर दबाव बनाए रखा। नतीजतन, यूएई की पूरी टीम 269 रनों पर आउट हो गई और नेपाल की 44 रनों की जीत पक्की हुई।
राहुल चोपड़ा के शतक ने बताया कि लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम लड़ना जारी रख सकती है, लेकिन नेपाल की गेंदबाजी ने जरूरत के समय विकेट निकालकर उस संघर्ष को जीत में नहीं बदलने दिया। यही विकेटों का सिलसिला फाइनल का निर्णायक मोड़ बना।
संदीप लामिछाने को मिला श्रृंखला का सर्वोच्च सम्मान
नेपाल की सफलता में दिग्गज लेग स्पिनर संदीप लामिछाने का योगदान पूरे टूर्नामेंट में अहम रहा। उन्होंने अपनी लेग स्पिन से विपक्षी बल्लेबाजों को लगातार कठिनाइयों में रखा और विकेट निकालने का काम किया। कप्तान के रूप में टॉस पर लिए गए फैसले ने भी इस योगदान को और असरदार बनाया।
लामिछाने ने टूर्नामेंट में 6 मैच खेले और कुल 17 विकेट अपने नाम किए। इसी स्थिर प्रदर्शन के कारण उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का सर्वोच्च सम्मान मिला। यह सम्मान टूर्नामेंट में उनकी लगातार उपयोगिता को दर्शाता है।
यह पुरस्कार केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि टीम की साझा जीत का भी संकेत है। आसिफ की शतकीय पारी, गुलसन झा और रोहित पौडेल की सहायक पारियां, करण केसी की अहम विकेटें और लामिछाने की लगातार गेंदबाजी ने मिलकर नेपाल को एशिया की प्रमुख टीमों के स्तर पर खड़ा किया।
नेपाल की यह यात्रा बताती है कि टीम अब एशिया की बड़ी क्रिकेट ताकतों के साथ मुकाबला करने के लिए तैयार है। बांग्लादेश में एशिया कप 2027 में उसे फिर से अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिलेगा।



















