पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एक सुदूर इलाके से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना किसी सपने जैसा है। अपर दीर के वारी नाम के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले 21 वर्षीय रजाउल्लाह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह अपनी आंखों में देश के लिए खेलने का बड़ा सपना लेकर मर्दान शहर आए थे। उनके भीतर बिजली जैसी तेज रफ्तार से गेंदबाजी करने का जुनून था और साथ ही निचले क्रम में आकर गेंद को सीमा रेखा के पार भेजने की गजब की ताकत भी थी। वारी का यह क्षेत्र लोअर दीर के काफी करीब स्थित है, जहां से साल 2019 में पाकिस्तान के मशहूर तेज गेंदबाज नसीम शाह का उदय हुआ था। रजाउल्लाह भी उसी मिट्टी के बने हैं और उन्होंने क्रिकेट में अपना भाग्य आजमाने के लिए अपने दो बड़े भाइयों के साथ मर्दान का रुख किया था।
मजदूर भाई का त्याग और मर्दान की क्रिकेट अकादमी
रजाउल्लाह के इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे उनके बड़े भाई समीउल्लाह का बहुत बड़ा योगदान है। समीउल्लाह खुद एक ट्रक लोडर के रूप में काम करते थे और उन्होंने जीवन की सबसे कठिन आर्थिक परिस्थितियों का सामना किया था। वह नहीं चाहते थे कि उनका छोटा भाई भी उसी तरह ट्रकों में भारी सामान लादने का काम करे और अपना जीवन संघर्षों में बिताए। अपने भाई की लंबी-चौड़ी कद-काठी और शारीरिक ताकत को देखते हुए समीउल्लाह ने फैसला किया कि रजाउल्लाह को मर्दान की एक क्रिकेट अकादमी में दाखिला लेना चाहिए। समीउल्लाह का यही त्याग और कठिन परिश्रम रजाउल्लाह के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के रास्ते खोलने का पहला जरिया बना।
फटे जूते और जब कोच ने गेंदबाजी करने से रोका
साल 2023 में जब रजाउल्लाह अंडर-19 टीम के चयन के लिए ट्रायल देने पहुंचे, तो उनकी आर्थिक स्थिति साफ दिखाई दे रही थी। उनके पैरों में जो स्पाइक्स (क्रिकेट के जूते) थे, वे उनके असली नाप से काफी बड़े और फटे हुए थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपना रन-अप लिया और पहली गेंद फेंकी, वहां मौजूद सभी लोग दंग रह गए। मर्दान और एबटाबाद के कोच अहमद सईद ने बताया कि रजाउल्लाह की उस पहली गेंद की रफ्तार इतनी खतरनाक थी कि सामने खेल रहा बल्लेबाज पूरी तरह असहज हो गया और लड़खड़ा गया। बल्लेबाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोच अहमद सईद ने रजाउल्लाह को दूसरी गेंद फेंकने से तुरंत मना कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं वह बिना तैयारी के खेल रहे बल्लेबाज को गंभीर रूप से घायल न कर दें।
रावलपिंडी एक्सप्रेस के प्रति दीवानगी और 14 नंबर की जर्सी
मर्दान की अकादमी में अभ्यास के दौरान रजाउल्लाह के सिर पर सिर्फ एक ही धुन सवार थी। वह पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज शोएब अख्तर की तरह दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज बनना चाहते थे। वह शोएब अख्तर के इस कदर दीवाने थे कि उन्होंने नेशनल T20 कप के दौरान 14 नंबर की जर्सी पहनने की जिद पकड़ ली, जिसे कभी शोएब अख्तर पहना करते थे। जब उन्हें आखिरकार वह जर्सी मिली, तो वह उनके नाप से दो साइज बड़ी थी, लेकिन रजाउल्लाह के लिए इसकी खुशी सबसे बड़ी थी। उनके इसी जुनून और गेंदबाजी शैली के कारण अकादमी में उनके साथी उन्हें प्यार से 'शोबी' कहकर बुलाने लगे थे।
राष्ट्रीय टीम का बुलावा और एजबेस्टन में ऐतिहासिक डेब्यू
रजाउल्लाह की यह असाधारण प्रतिभा लंबे समय तक छिपी नहीं रह सकती थी। क्वेटा में आयोजित एक स्थानीय T20 टूर्नामेंट के दौरान पाकिस्तान के पूर्व कोच अब्दुल रहमान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने बिना किसी देरी के रजाउल्लाह को PSL की रावलपिंडी टीम में शामिल कर लिया। इसके बाद वह लाहौर के राष्ट्रीय हाई परफॉर्मेंस सेंटर पहुंचे, जहां पूर्व तेज गेंदबाज और राष्ट्रीय चयनकर्ता आकिब जावेद ने उनकी गेंदबाजी की तकनीक को और बेहतर बनाया। इसी तैयारी के दम पर उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए चुना गया। पहले दो मैचों में शर्मनाक हार झेलने के बाद PCB ने टीम में बड़ा बदलाव करते हुए 7 सीनियर खिलाड़ियों को बाहर किया और रजाउल्लाह सहित 7 नए चेहरों को टीम में जगह दी।
जो रूट का विकेट और बल्ले से मचाई तबाही
एजबेस्टन के ऐतिहासिक मैदान पर जब रजाउल्लाह ने टेस्ट क्रिकेट में अपने कदम रखे, तो उन्होंने इतिहास रच दिया। अपनी अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजी की महज चौथी ही गेंद पर उन्होंने दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक जो रूट को आउट कर पवेलियन वापस भेज दिया। इस विकेट ने पूरी दुनिया का ध्यान उनकी तरफ खींच लिया। इसके बाद जब पाकिस्तान की टीम पारी की हार के संकट से जूझ रही थी, तब रजाउल्लाह बल्लेबाजी के लिए उतरे। उन्होंने अंग्रेजी गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए महज कुछ ही देर में 81 रनों की विस्फोटक पारी खेल डाली, जिसमें 9 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। उनका एक शॉट तो इतना लंबा था कि गेंद स्टेडियम के ठीक बगल में बन रहे एक निर्माणाधीन होटल की इमारत में जा गिरी। रजाउल्लाह की इस शानदार पारी ने पाकिस्तान को पारी की हार से बचा लिया।



















