दलीप ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में ईस्ट जोन ने अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है और टीम टूर्नामेंट की ट्रॉफी उठाने के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है। खिताबी भिड़ंत के चौथे दिन का खेल समाप्त होने तक मुकाबले का रुख पूरी तरह से ईस्ट जोन के पक्ष में झुक चुका है। मैच की पहली पारी में अपनी दमदार बल्लेबाजी के दम पर 708 रनों का विशालकाय स्कोर बोर्ड पर टांगने वाली ईस्ट जोन की टीम ने इसके बाद गेंदबाजी में भी कमाल दिखाया और साउथ जोन की पूरी टीम को पहली पारी में महज 336 रनों के स्कोर पर ही समेट दिया। इस तरह पहली पारी के आधार पर ईस्ट जोन को 372 रनों की भारी भरकम बढ़त मिल गई। इसके बाद कप्तान ईशान किशन ने साउथ जोन को फॉलोआन देने के बजाय खुद दोबारा बल्लेबाजी करने का फैसला किया और खेल खत्म होने तक टीम ने अपनी दूसरी पारी में 5 विकेट खोकर 212 रन बना लिए हैं। इस प्रकार ईस्ट जोन की कुल बढ़त अब बढ़कर 584 रनों की हो चुकी है और मैच के पांचवें तथा अंतिम दिन उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
तिलक वर्मा चूके शतक से
साउथ जोन ने मुकाबले के चौथे दिन अपनी पहली पारी को 6 विकेट पर 242 रनों के स्कोर से आगे बढ़ाया। कप्तान तिलक वर्मा कल के अपने 56 रनों के निजी स्कोर से आगे खेलने के लिए मैदान पर उतरे। हालांकि दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरने का सिलसिला जारी रहा, लेकिन हैदराबाद के इस युवा बल्लेबाज ने एक छोर संभालकर बेहद संयम और जुझारूपन का परिचय दिया। तिलक ने अपनी शानदार पारी के दौरान 211 गेंदों का सामना करते हुए कुल 99 रन बनाए। वह अपने करियर के इस महत्वपूर्ण शतक से महज एक रन की दूरी पर थे, तभी ऑफ स्पिनर कोनेन कुरैशी की गेंद पर एक बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में वह अपना नियंत्रण खो बैठे और गेंद हवा में लहराते हुए सीधे गेंदबाज के हाथों में चली गई। इस तरह तिलक वर्मा सिर्फ एक रन से अपने शतक से चूक गए, लेकिन उनकी इस जुझारू पारी के बूते ही दक्षिण क्षेत्र की टीम 300 रनों के आंकड़े को पार करते हुए 336 रन के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंच पाई।
दूसरी पारी में भी गरजा ईशान किशन का बल्ला
अपनी पहली पारी में मैराथन दोहरा शतक जड़ने वाले ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने दूसरी पारी में भी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का मुजाहिरा किया। चेपक स्टेडियम में मौजूद दर्शक एक बार फिर उनके बल्ले से रनों की बरसात देखने की उम्मीद कर रहे थे। ईशान ने अपनी इस पारी की शुरुआत ऑफ स्पिनर त्रिपुराना विजय की गेंद पर मिड-विकेट के ऊपर से एक लंबा छक्का लगाकर की। इसके बाद उन्होंने पारी के 26वें ओवर में उसी गेंदबाज पर लगातार चार गेंदों में दो शानदार चौके और दो गगनचुंबी छक्के जड़ दिए। हालांकि वह अपने शतक तक नहीं पहुंच सके और 98 गेंदों का सामना करते हुए 80 रनों की तूफानी पारी खेलकर आउट हो गए। चाय काल के बाद उनकी एकाग्रता में थोड़ी कमी आई और वह तेज गेंदबाज एमडी निधीश की गेंद पर देवदत्त पडिक्कल को कैच थमा बैठे। अपनी इस पारी के दौरान ईशान को एक जीवनदान भी मिला था, जब मैदानी अंपायर ने उन्हें पगबाधा आउट करार दे दिया था लेकिन उन्होंने तुरंत डीआरएस का इस्तेमाल किया और रीप्ले में साफ हो गया कि गेंद स्टंप्स को छोड़कर निकल रही थी।
सूर्यवंशी की नाकामी और मोहम्मद सिराज की शानदार वापसी
दूसरी पारी में ईस्ट जोन की शुरुआत कुछ खास नहीं रही और उप कप्तान वैभव सूर्यवंशी सस्ते में आउट होकर पवेलियन लौट गए। वैभव अपने निजी स्कोर पर त्रिपुराना विजय की गेंद पर एलबीडब्ल्यू की अपील के दौरान डीआरएस की मदद से एक बार जरूर बचे थे, लेकिन वह इस जीवनदान का पूरा फायदा नहीं उठा सके। विजय की एक बेहतरीन और फिरकी भरी गेंद पर विकेटकीपर नारायण जगदीशन ने उन्हें तेजी से स्टंप आउट कर दिया। दूसरी तरफ, भारतीय टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज का लय में वापस लौटना साउथ जोन के खेमे के लिए एक सकारात्मक पहलू रहा। श्रीलंका के पिछले दौरे के बाद से सिराज अपनी खोई हुई रफ्तार और लाइन-लेंथ के लिए काफी संघर्ष करते नजर आ रहे थे और अक्सर छोटे रन-अप के साथ गेंदबाजी कर रहे थे। हालांकि इस मुकाबले की दूसरी पारी में सिराज पूरी तरह अपनी पुरानी धार और आक्रामकता में दिखाई दिए। उन्होंने अपनी शानदार स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ से विपक्षी बल्लेबाजों को काफी परेशान किया और सलामी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन को स्लिप में देवदत्त पडिक्कल के हाथों कैच आउट कराकर सफलता हासिल की।
अंतिम दिन की औपचारिकता बाकी
चौथे दिन का खेल समाप्त होने पर ईस्ट जोन की तरफ से कुमार कुशाग्र 34 रन और कोनेन कुरैशी 26 रन बनाकर नाबाद क्रीज पर डटे हुए हैं। इन दोनों बल्लेबाजों के बीच छठे विकेट के लिए अब तक 52 रनों की एक मजबूत और अटूट साझेदारी हो चुकी है। कुल 584 रनों की पहाड़ जैसी बढ़त हासिल करने के बाद अब मुकाबले के पांचवें और अंतिम दिन ईस्ट जोन की जीत महज एक औपचारिकता भर रह गई है। साउथ जोन के गेंदबाजों के सामने पांचवें दिन सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे जल्द से जल्द ईस्ट जोन के बचे हुए पांच विकेटों को समेटें, जबकि ईस्ट जोन का पूरा ध्यान मैदान पर उतरकर अपने इस ऐतिहासिक खिताब पर आधिकारिक रूप से कब्जा जमाने पर होगा।



















