मोहम्मद आमिर का क्रिकेट का सफर हमेशा से ही असाधारण प्रतिभा और बड़े विवादों के बीच झूलता रहा है। पाकिस्तान के इस बाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना ली थी, लेकिन साल 2010 के बहुचर्चित स्पॉट फिक्सिंग कांड ने उनके करियर को भारी झटके के साथ पटरी से उतार दिया था। तमाम मुश्किलों और पांच साल के लंबे बैन के बाद भी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें दूसरा मौका दिया। उन्होंने साल 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में भारत के खिलाफ घातक गेंदबाजी करके अपनी उपयोगिता साबित की और टीम की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, समय के साथ हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और अब कहानी एक नया मोड़ ले चुकी है।
साल 2010 का स्पॉट फिक्सिंग कांड और बैन
मोहम्मद आमिर के क्रिकेट करियर पर सबसे बड़ा और गहरा दाग साल 2010 में लगा था। इंग्लैंड के दौरे पर खेले गए लॉर्ड्स टेस्ट मैच के दौरान आमिर और उनके साथी गेंदबाज मोहम्मद आसिफ पर जानबूझकर नो-बॉल फेंकने के गंभीर आरोप लगे थे। आईसीसी की जांच के बाद उन्हें स्पॉट फिक्सिंग मामले में दोषी करार दिया गया। इस संगीन अपराध के चलते उन पर क्रिकेट खेलने से पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया गया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा भी भुगतनी पड़ी। जिस समय यह सब हुआ, उस वक्त आमिर की उम्र महज 22 वर्ष थी और उनका शानदार भविष्य अचानक बीच में ही थम सा गया था।
पाकिस्तान से दूसरा मौका और चैंपियंस ट्रॉफी में वापसी
पांच साल का कड़ा प्रतिबंध पूरा होने के बाद मोहम्मद आमिर को क्रिकेट के मैदान पर लौटने का दूसरा मौका मिला। साल 2016 में उन्होंने एक बार फिर पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। उनकी यह वापसी बिल्कुल भी आसान नहीं थी क्योंकि उन्हें हर कदम पर तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से आलोचकों को करारा जवाब दिया। इस वापसी का सबसे बेहतरीन उदाहरण साल 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल मैच था। भारत के खिलाफ उस खिताबी मुकाबले में आमिर ने रोहित शर्मा, विराट कोहली और शिखर धवन जैसे दिग्गज बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया और कुल तीन महत्वपूर्ण विकेट झटके, जिससे पाकिस्तान की टीम चैंपियन बन सकी।
संन्यास और वापसी का दौर
मोहम्मद आमिर ने साल 2019 तक पाकिस्तान के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना जारी रखा, लेकिन इसके बाद उन्होंने लाल गेंद के क्रिकेट से दूरी बना ली और केवल सीमित ओवरों के प्रारूप पर अपना ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। इसके बाद साल 2020 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को पूरी तरह अलविदा कहने का ऐलान कर दिया था। हालांकि, उनका यह संन्यास स्थायी नहीं रहा और साल 2024 में उन्होंने अपने फैसले को पलटते हुए एक बार फिर पाकिस्तान के लिए खेलने की इच्छा जताई और टी20 वर्ल्ड कप के लिए खुद को उपलब्ध कराया। साल 2024 के टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की ओर से खेलने के बाद आखिरकार उन्होंने दिसंबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से हमेशा के लिए संन्यास ले लिया, जो इस बार उनका अंतिम फैसला साबित हुआ।
ब्रिटिश नागरिकता और पाकिस्तान से दूरी
अब मोहम्मद आमिर के जीवन और करियर में एक बहुत बड़ा और निर्णायक बदलाव आया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली है। इस बड़े कदम के बाद इंग्लैंड में उनकी क्रिकेट की स्थिति पूरी तरह बदल गई है और वह एक स्थानीय खिलाड़ी के रूप में अपनी आगे की राह तय कर रहे हैं। अगस्त 2026 में आमिर ने खुद इस बात की पुष्टि की कि वह अब ब्रिटेन के स्थानीय नागरिक बन चुके हैं और पाकिस्तान के लिए वापसी का दरवाजा हमेशा के लिए बंद हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंग्लैंड की घरेलू प्रतियोगिताओं में स्थानीय खिलाड़ी का दर्जा पाने के लिए यह घोषणा करना अनिवार्य होता है कि खिलाड़ी अब किसी अन्य देश के लिए स्थानीय क्रिकेट नहीं खेलेगा। इस तरह, जिस खिलाड़ी को पाकिस्तान ने फिक्सिंग के काले साये से उबारकर दूसरा मौका दिया था, उसने अब अपने ही देश से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है।
आईपीएल खेलने की संभावना और अंतरराष्ट्रीय आंकड़े
ब्रिटिश नागरिकता मिलने के बाद मोहम्मद आमिर के लिए दुनिया की सबसे अमीर टी20 लीग यानी इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने के रास्ते भी खुलते नजर आ रहे हैं। नागरिकता बदलने के कारण अब वह संभावित रूप से एक विदेशी खिलाड़ी के रूप में आईपीएल की नीलामी प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। आमिर पहले भी सार्वजनिक रूप से आईपीएल में खेलने की अपनी प्रबल इच्छा जाहिर कर चुके हैं। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें कभी मौका मिला तो वह निश्चित तौर पर आईपीएल का हिस्सा बनना चाहेंगे और वहां अपना जलवा बिखेरेंगे। अगर आंकड़ों की बात की जाए तो मोहम्मद आमिर ने पाकिस्तान के लिए कुल 36 टेस्ट मैच, 61 वनडे मैच और 62 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 119 विकेट, वनडे में 81 विकेट और टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 71 विकेट दर्ज हैं। इसके अलावा वह साल 2009 की टी20 वर्ल्ड कप विजेता पाकिस्तानी टीम के भी महत्वपूर्ण सदस्य रहे थे और 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली टीम में भी उनका योगदान अतुलनीय था।


















