राजस्थान के मौसम मिजाज में सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। पिछले कुछ दिनों से राज्य के तमाम इलाकों में मानसूनी गतिविधियां थोड़ी धीमी पड़ गई थीं, जिसके चलते उमस और गर्मी का अहसास बढ़ गया था। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, एक सितंबर को प्रदेश भर में मौसम आमतौर पर शुष्क बना रहेगा। हालांकि इस दौरान पूर्वी राजस्थान के कुछ चुनिंदा हिस्सों, विशेषकर भरतपुर और उदयपुर संभागों में छिटपुट बौछारें पड़ने की संभावना जरूर जताई गई है। राज्य के किसी भी जिले के लिए फिलहाल भारी बारिश का कोई विशेष चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया गया है। तापमान की बात करें तो श्रीगंगानगर में सबसे अधिक तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि पूरे प्रदेश में औसत आर्द्रता का स्तर 30 से 70 प्रतिशत के बीच रिकॉर्ड किया गया।
बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम का असर
मौसम से जुड़े पूर्वानुमानों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी छोर और उससे सटे पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा के तटीय इलाकों के पास एक मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र यानी वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया सक्रिय हो चुका है। इसके अलावा मानसून ट्रफ की स्थिति में भी बदलाव आ रहा है। इन दोनों बड़े मौसमी घटनाक्रमों के मिले-जुले प्रभाव के कारण राजस्थान में दो से तीन सितंबर के बीच मानसून एक बार फिर जोर पकड़ेगा और बारिश का दौर दोबारा शुरू होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
दो और तीन सितंबर को यहां बरसेंगे बादल
मौसम विभाग का अनुमान है कि दो सितंबर से पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में स्थानीय स्तर पर बादलों के गरजने और खंड वर्षा का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इसकी शुरुआत मुख्य रूप से भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ हिस्सों से होगी। इसके बाद तीन सितंबर को इसका दायरा काफी बढ़ जाएगा और कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, जयपुर, अलवर, भरतपुर, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ तथा अजमेर संभाग के तमाम हिस्सों में बादलों की आवाजाही और बारिश देखने को मिलेगी। खास तौर पर टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा, जयपुर, अलवर, भरतपुर और शेखावाटी बेल्ट में अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक पानी बरसने की संभावना जताई गई है।
चार से सात सितंबर तक सक्रिय रहेगा मौसम
राज्य में चार से सात सितंबर के दौरान मानसून का एक व्यापक दौर देखने को मिल सकता है। इस समयावधि में भरतपुर, कोटा, जयपुर, अजमेर और उदयपुर संभाग के अधिकांश इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियों में जोरदार तेजी आने की पूरी उम्मीद है। इन क्षेत्रों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा होगी, जबकि कोटा संभाग और उसके आस-पास के जिलों में कुछ जगहों पर मध्यम से लेकर तेज या भारी बारिश भी दर्ज की जा सकती है। चार और पांच सितंबर को इस मानसूनी तंत्र का असर दक्षिणी राजस्थान तक फैल जाएगा, जिससे उदयपुर, चित्तौड़गढ़, अजमेर, जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर के साथ कोटा जिले में भी झमाझम बारिश के योग बनेंगे। यदि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो कुछ स्थानों पर अचानक मूसलाधार बारिश भी हो सकती है।
पश्चिमी राजस्थान में कमजोर रहेगा मानसून
इसके विपरीत, पश्चिमी राजस्थान के जिलों में फिलहाल मानसून कुछ खास मेहरबान होता नजर नहीं आ रहा है। जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश हिस्सों में आने वाले कुछ दिनों तक मौसम मुख्य रूप से सूखा और शुष्क ही बना रहेगा। हालांकि चार से छह सितंबर के बीच बीकानेर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र के कुछ गिने-चुिने स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की हल्की संभावना जरूर बन सकती है। इसके अलावा जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, सिरोही, सांचौर, फलोदी, जोधपुर और पाली के बड़े हिस्से में फिलहाल व्यापक बारिश के मजबूत संकेत नहीं दिख रहे हैं। यहां स्थानीय बादलों की वजह से छुटपुट बूंदें गिर सकती हैं, लेकिन लंबे समय से चली आ रही बारिश की कमी पूरी होने की उम्मीद अभी कम ही है।
अन्य मौसमी सिस्टम और ट्रफ की स्थिति
वर्तमान समय में मानसून ट्रफ देश के कई प्रमुख शहरों से गुजर रही है। यह अमृतसर, चंडीगढ़, मेरठ और गोरखपुर से होती हुई सीधे गंगीय पश्चिम बंगाल के पास बने हुए निम्न दबाव के क्षेत्र तक पूरी तरह सक्रिय बनी हुई है। इसके साथ ही उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे हुए जम्मू संभाग के ऊपर वायुमंडल में करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराए हुए है। इन दोनों महत्वपूर्ण प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से ही सितंबर के पहले सप्ताह में राजस्थान के मौसम में यह बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है, जिससे किसानों और आम जनता को गर्मी से खासी राहत मिलने की उम्मीद है।





















