वेलिंगटन के मैदानों पर भारतीय क्रिकेट टीम के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपनी गेंदबाजी से सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया कि वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई सीरीज के दौरान उनकी गेंदों पर अधिक रन खर्च होना उनके लिए काफी निराशाजनक अनुभव रहा था। हालांकि, उन्होंने इन तमाम असफलताओं से महत्वपूर्ण सीख ली और न्यूजीलैंड की धरती पर एक जोरदार और प्रभावशाली वापसी करने में सफलता हासिल की। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने आगामी 2027 वनडे विश्व कप के लिए भारतीय टीम की योजनाओं में उनकी जगह पक्की करने की दावेदारी को काफी मजबूत कर दिया है।
न्यूजीलैंड दौरे पर शानदार गेंदबाजी और विकेटों का सिलसिला
छब्बीस वर्षीय गुरनूर बरार ने मौजूदा दौरे के शुरुआती दो वनडे मुकाबलों में ही कुल सात विकेट अपने नाम कर लिए हैं। इसमें शनिवार को खेला गया वह मुकाबला भी शामिल है जो बारिश से काफी प्रभावित रहा था। इस मैच में भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ डकवर्थ-लुईस पद्धति के तहत चार रन से रोमांचक जीत हासिल की थी, जिसमें इस युवा गेंदबाज ने महज 30 रन खर्च करके चार महत्वपूर्ण विकेट झटके थे। इस उम्दा प्रदर्शन के दम पर वह श्रृंखला में 10.57 के बेहतरीन औसत के साथ सबसे ज्यादा विकेट अपने नाम करने वाले गेंदबाज बन गए हैं।
पिछली सीरीज के उतार-चढ़ाव और वेस्टइंडीज दौरा
अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करते हुए गुरनूर बरार ने अफगानिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए सात विकेट झटके थे। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की श्रृंखला में चार विकेट हासिल किए, हालांकि इस दौरान उनकी गेंदबाजी थोड़ी महंगी साबित हुई थी और उन्होंने काफी रन दिए थे। इसके विपरीत, वेस्टइंडीज के खिलाफ उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। गुवाहाटी में खेले गए मुकाबले में उन्होंने 96 रन देकर दो विकेट लिए थे, जबकि तिरुवनंतपुरम में 60 रन खर्च करने के बावजूद उनके हाथ कोई सफलता नहीं लगी थी। इसके अलावा मुल्लांपुर के मैच में भी उन्होंने 64 रन देकर केवल एक ही विकेट हासिल किया था।
टीम प्रबंधन और नेतृत्व का मिला भरपूर समर्थन
खराब दौर से गुजरने के बावजूद भारतीय टीम प्रबंधन ने इस युवा गेंदबाज पर अपना भरोसा पूरी तरह से बनाए रखा, जिसे गुरनूर बरार ने न्यूजीलैंड की तेज गेंदबाजों के अनुकूल और चुनौतीपूर्ण पिचों पर बेहतरीन प्रदर्शन करके बिल्कुल सही साबित कर दिखाया है। उन्होंने बातचीत के दौरान इस बात का विशेष जिक्र किया कि टीम प्रबंधन, विशेष रूप से मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल की तरफ से मिले निरंतर समर्थन ने उन्हें इस मुश्किल दौर से पूरी तरह उबरने में बहुत मदद की। उन्होंने बताया कि टीम के अंदर का माहौल बहुत सकारात्मक है और सभी खिलाड़ियों को पूरा बैकअप मिलता है।
सटीक लेंथ और अपनी ताकत पर पूरा भरोसा
भारतीय पिचों के सपाट मिजाज और न्यूजीलैंड की परिस्थितियों के बीच के अंतर पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि घरेलू मैदानों पर पिचें भले ही सपाट थीं, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य हमेशा सही जगह पर गेंदबाजी करने का रहता था। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड पहुंचने के बाद भी उन्हें अपनी ताकत पर भरोसा रखने की सलाह दी गई थी। टीम की तरफ से उन्हें यही निर्देश मिले थे कि उन्हें बस सही लेंथ पर गेंद डालनी है और इस बात की चिंता बिल्कुल नहीं करनी है कि बल्लेबाज उस पर छक्का लगाएगा या चौका। कोच और कप्तान का साफ कहना था कि गेंदबाजों को पूरी तरह खुलकर अपनी गेंदबाजी का आनंद लेना चाहिए और मैदान पर यही रणनीति उनके लिए सफलता लेकर आ रही है।



















