पश्चिमी चंपारण के बगहा में गंडक बराज के फाटक नंबर-5 पर सोमवार सुबह हड़कंप मच गया, जब यहां फंसा एक शव नजर आया। नेपाल में हफ्तों पहले आई भीषण त्रासदी के बाद गंडक नदी से शव मिलने का यह सिलसिला अब भी थमा नहीं है, और ताजा बरामदगी के साथ मृतकों की संख्या 15 तक जा पहुंची है।
फाटक से कैसे निकाला गया शव
सूचना मिलते ही नेपाल पुलिस और नेपाल सशस्त्र प्रहरी बल यानी एपीएफ की एक टीम बराज पर पहुंची। दोनों एजेंसियों ने मिलकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया और घंटों की मशक्कत के बाद फाटक में फंसे शव को बाहर निकालने में कामयाबी मिली। नेपाल एपीएफ के त्रिवेणी ओपी के सब इंस्पेक्टर ध्रुवो प्रसाद भट्ट ने बताया, "सुबह फाटक नंबर-5 में शव फंसे होने की सूचना मिली थी।" उन्होंने बताया कि बरामद शव की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है और जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है।
अब तक 15 शव मिल चुके, निगरानी जारी
सब इंस्पेक्टर भट्ट के मुताबिक, रसुवा क्षेत्र की त्रासदी के बाद से गंडक बराज इलाके में अब तक कुल 15 शव बरामद किए जा चुके हैं। बराज के हर फाटक और आसपास के नदी क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि कोई भी शव या मलबा बिना जांच के आगे न बढ़ सके। संबंधित एजेंसियां अब भी बरामद शवों की पहचान कराने और आगे की कानूनी कार्यवाही पूरी करने में जुटी हैं। अधिकारियों के मुताबिक शिनाख्त की प्रक्रिया में समय इसलिए लग रहा है क्योंकि कई शव कई दिनों से पानी में रहने के चलते पहचान लायक हालत में नहीं बचे हैं, ऐसे में पोस्टमार्टम और लापता लोगों के रिकॉर्ड से मिलान के बाद ही किसी शव को परिजनों को सौंपा जा सकता है।
क्यों बह रहे हैं इतने शव, समझिए वजह
बाढ़ के दौरान पानी के तेज बहाव से निपटने के लिए गंडक बराज के फाटक ऊपर उठा दिए गए थे। सोमवार को इन्हें नीचे किया गया, जिसके बाद ही एपीएफ और पुलिस जवानों ने संयुक्त अभियान चलाकर फंसे शवों को बाहर निकाला। दरअसल 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा में भीषण हिमस्खलन और बांध टूटने की घटना हुई थी, जिसके बाद गंडक नदी का जलस्तर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया था। तभी से बराज के अलग-अलग फाटकों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। नेपाल की ज्यादातर नदियां आगे चलकर उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रवेश करती हैं, इसी वजह से बाढ़ का मलबा और शव सीमा पार कर भारतीय इलाकों तक पहुंच रहे हैं। हादसे को अब पूरे 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस जलप्रलय के निशान लगातार सामने आ रहे हैं।
लापता स्वजनों का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार
नेपाल में तबाही इतनी बड़ी है कि कई परिवारों ने बाढ़ के बाद से लापता अपने प्रियजनों की उम्मीद छोड़कर उनका अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है। ऐसे परिवार घास से प्रतीकात्मक पुतला बनाकर अपने बिछड़े स्वजनों को अंतिम विदाई दे रहे हैं, क्योंकि असली शव अब तक नहीं मिल सका है।





















