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बगहा में गंडक बराज से फिर निकला शव, नेपाल त्रासदी से जुड़ा आंकड़ा 15 तक पहुंचाबिहार
7 सित॰ 2026, 10:12 pm (1 घंटे पहले)· 4

बगहा में गंडक बराज से फिर निकला शव, नेपाल त्रासदी से जुड़ा आंकड़ा 15 तक पहुंचा

पश्चिमी चंपारण के बगहा स्थित गंडक बराज के फाटक नंबर-5 से सोमवार को एक और शव बरामद हुआ, जिसके बाद नेपाल त्रासदी के बाद अब तक मिले शवों की संख्या 15 हो गई है।

पश्चिमी चंपारण के बगहा में गंडक बराज के फाटक नंबर-5 पर सोमवार सुबह हड़कंप मच गया, जब यहां फंसा एक शव नजर आया। नेपाल में हफ्तों पहले आई भीषण त्रासदी के बाद गंडक नदी से शव मिलने का यह सिलसिला अब भी थमा नहीं है, और ताजा बरामदगी के साथ मृतकों की संख्या 15 तक जा पहुंची है।

फाटक से कैसे निकाला गया शव

सूचना मिलते ही नेपाल पुलिस और नेपाल सशस्त्र प्रहरी बल यानी एपीएफ की एक टीम बराज पर पहुंची। दोनों एजेंसियों ने मिलकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया और घंटों की मशक्कत के बाद फाटक में फंसे शव को बाहर निकालने में कामयाबी मिली। नेपाल एपीएफ के त्रिवेणी ओपी के सब इंस्पेक्टर ध्रुवो प्रसाद भट्ट ने बताया, "सुबह फाटक नंबर-5 में शव फंसे होने की सूचना मिली थी।" उन्होंने बताया कि बरामद शव की शिनाख्त अभी तक नहीं हो पाई है और जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है।

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अब तक 15 शव मिल चुके, निगरानी जारी

सब इंस्पेक्टर भट्ट के मुताबिक, रसुवा क्षेत्र की त्रासदी के बाद से गंडक बराज इलाके में अब तक कुल 15 शव बरामद किए जा चुके हैं। बराज के हर फाटक और आसपास के नदी क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि कोई भी शव या मलबा बिना जांच के आगे न बढ़ सके। संबंधित एजेंसियां अब भी बरामद शवों की पहचान कराने और आगे की कानूनी कार्यवाही पूरी करने में जुटी हैं। अधिकारियों के मुताबिक शिनाख्त की प्रक्रिया में समय इसलिए लग रहा है क्योंकि कई शव कई दिनों से पानी में रहने के चलते पहचान लायक हालत में नहीं बचे हैं, ऐसे में पोस्टमार्टम और लापता लोगों के रिकॉर्ड से मिलान के बाद ही किसी शव को परिजनों को सौंपा जा सकता है।

क्यों बह रहे हैं इतने शव, समझिए वजह

बाढ़ के दौरान पानी के तेज बहाव से निपटने के लिए गंडक बराज के फाटक ऊपर उठा दिए गए थे। सोमवार को इन्हें नीचे किया गया, जिसके बाद ही एपीएफ और पुलिस जवानों ने संयुक्त अभियान चलाकर फंसे शवों को बाहर निकाला। दरअसल 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा में भीषण हिमस्खलन और बांध टूटने की घटना हुई थी, जिसके बाद गंडक नदी का जलस्तर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया था। तभी से बराज के अलग-अलग फाटकों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। नेपाल की ज्यादातर नदियां आगे चलकर उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रवेश करती हैं, इसी वजह से बाढ़ का मलबा और शव सीमा पार कर भारतीय इलाकों तक पहुंच रहे हैं। हादसे को अब पूरे 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस जलप्रलय के निशान लगातार सामने आ रहे हैं।

लापता स्वजनों का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार

नेपाल में तबाही इतनी बड़ी है कि कई परिवारों ने बाढ़ के बाद से लापता अपने प्रियजनों की उम्मीद छोड़कर उनका अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है। ऐसे परिवार घास से प्रतीकात्मक पुतला बनाकर अपने बिछड़े स्वजनों को अंतिम विदाई दे रहे हैं, क्योंकि असली शव अब तक नहीं मिल सका है।

सवाल-जवाब

फाटक नंबर-5 से मिले शव की पहचान हुई है?
नहीं, बरामद शव की पहचान अभी नहीं हो सकी है, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है।
गंडक बराज इलाके से अब तक कुल कितने शव मिल चुके हैं?
रसुवा त्रासदी के बाद से गंडक बराज इलाके से अब तक कुल 15 शव बरामद किए जा चुके हैं।
यह घटना कहां हुई?
यह घटना पश्चिमी चंपारण के बगहा स्थित गंडक बराज के इंडिया साइड फाटक नंबर-5 पर हुई।
रेस्क्यू ऑपरेशन किसने चलाया?
नेपाल पुलिस और नेपाल सशस्त्र प्रहरी बल यानी एपीएफ की टीम ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
गंडक नदी में शव और मलबा क्यों बह रहा है?
26 अगस्त को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में हुए हिमस्खलन और बांध टूटने के बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया, जिससे शव और मलबा बहकर आ रहे हैं।
क्या नेपाल में और लोग अब भी लापता हैं?
हां, बाढ़ के बाद कई परिवारों के सदस्य अब भी लापता हैं, जिनके लिए परिजन घास से प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 मिनट पहले

नेपाल के रसुवा में 26 अगस्त को हुए हिमस्खलन और बांध टूटने के 12 दिन बाद भी गंडक बराज से शवों का मिलना सीमा पार आपदा प्रबंधन और नदी के रास्ते साक्ष्यों के बहकर आने की बड़ी चुनौती को उजागर करता है। पानी में लंबे समय तक रहने के कारण डीएनए और फॉरेंसिक जांच के बिना शिनाख्त असंभव हो रही है, जिससे भारत और नेपाल की एजेंसियों के बीच शवों के मिलान और कानूनी औपचारिकताओं का समन्वय आने वाले दिनों में और अधिक जटिल होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·42 मिनट पहले

रसुवा त्रासदी के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं पर बहकर आ रहे इन शवों और मलबे से यह साफ है कि आपदा प्रबंधन अब केवल स्थानीय स्तर का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसके लिए भारत और नेपाल को साझा जल-सूचना और फॉरेंसिक तंत्र विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि डीएनए मैचिंग और कानूनी औपचारिकताएं बिना किसी देरी के पूरी की जा सकें।

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