भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने भले ही दलीप ट्रॉफी में उम्मीद के मुताबिक ज्यादा विकेट हासिल न किए हों, लेकिन उनका हौसला अभी भी पूरी तरह बुलंद है। लंबे समय से राष्ट्रीय टीम से बाहर चल रहे इस अनुभवी खिलाड़ी ने साफ कर दिया है कि उनके भीतर क्रिकेट के प्रति लगन और प्रेरणा में कोई कमी नहीं आई है। वह अपने करियर के अगले चरण को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं और मैदान पर अपनी पूरी क्षमता झोंक रहे हैं।
करियर का अगला पड़ाव और प्रेरणा
मोहम्मद शमी ने अपना आखिरी टेस्ट मुकाबला साल 2023 में ओवल के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के खिताबी मुकाबले के रूप में खेला था। इसके बाद से वह लगातार टीम से दूर रहे हैं। दलीप ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले के बाद अपनी बात रखते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मुकाम पर पहुंचने के बाद खिलाड़ी को किसी बाहरी प्रेरणा की आवश्यकता नहीं होती है। उनका मानना है कि यदि कोई खिलाड़ी खुद से प्रेरित नहीं है, तो उसका पूरा दृष्टिकोण ही गलत दिशा में जा रहा है। खेल के किसी भी स्तर पर उतरने के बाद एक खिलाड़ी की नजरें हमेशा उससे अगले मुकाम को हासिल करने पर टिकी होनी चाहिए।
दलीप ट्रॉफी फाइनल में शानदार प्रदर्शन
खिताबी मुकाबले के दौरान इस 36 वर्षीय तेज गेंदबाज ने अपनी गेंदबाजी का जौहर दिखाते हुए रविचंद्रन स्मरण और शेख रशीद के रूप में दो बेहद अहम विकेट चटकाए। उनके इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीम ने विपक्षी साउथ जोन की पारी को 336 रनों के स्कोर पर समेट दिया और पहली पारी के आधार पर एक मजबूत बढ़त हासिल की। मोहम्मद शमी इस बात से बेहद खुश नजर आए कि उनकी टीम की खिताबी जीत उनके करियर के 100वें प्रथम श्रेणी मैच के साथ आई है। उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके सौवें मुकाबले में खिताबी जीत हासिल करना बेहद खास है और वह भी तब जब ईस्ट जोन ने इतने लंबे समय के बाद इस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है। पूरी टीम ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए अपना शत-प्रतिशत योगदान दिया है।
जर्सी के सम्मान और जिम्मेदारी की बात
मोहम्मद शमी का मानना है कि जब कोई खिलाड़ी अपने देश या टीम का प्रतीक चिन्ह छाती पर सजाकर मैदान पर उतरता है, तो प्रतियोगिता का स्तर कोई मायने नहीं रखता। यदि आप इस बैज के गौरव के लिए मैदान पर पसीना बहाते हैं, तो मैदान पर उतरने की भूख खुद-ब-खुद साफ नजर आने लगती है। उस सम्मान के साथ खेलने पर मैदान पर संघर्ष करने का जज्बा और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने अपनी मानसिकता को बेहद स्पष्ट बताते हुए कहा कि उन्हें जिस भी स्तर पर खेलने का मौका मिलेगा, वह उसे पूरी तरह भुनाएंगे और टीम के प्रति अपनी हर जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाएंगे।
युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी पर प्रतिक्रिया
टीम की युवा पीढ़ी के साथ समय बिताने और उन्हें मार्गदर्शन देने के अपने अनुभव पर बात करते हुए मोहम्मद शमी ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी टीम में मौजूद युवा वैभव सूर्यवंशी की उम्र लगभग उनके क्रिकेट करियर जितनी पुरानी है। उस खिलाड़ी के भीतर एक खास मासूमियत है, जिसे मस्ती करना पसंद है और वह हर बात को बहुत जल्दी सीखता है। हालांकि, शमी ने यह भी चेतावनी दी कि युवा खिलाड़ियों के स्वाभाविक विचारों और उनके खेल के तरीकों में अनावश्यक दखलअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे आज के समय में काफी परिपक्व होते हैं। आईपीएल और अन्य उच्च दबाव वाले टूर्नामेंटों का हिस्सा बनने के कारण आधुनिक युवा कम उम्र में ही परिपक्वता हासिल कर लेते हैं, इसलिए उन्हें बहुत अधिक कोचिंग की आवश्यकता नहीं होती है।
गेंदबाजी की चुनौतियां और तपिश
मैदान पर आने वाली कठिनाइयों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में पारंपरिक स्विंग की उम्मीद करना मुश्किल होता है क्योंकि पिच पर उछाल काफी कम था। इसके विपरीत बेंगलुरु की पिचें गेंदबाजों के लिए काफी मददगार साबित होती हैं, इसलिए यहां के हालात बिल्कुल अलग थे। उनकी रणनीति अपनी लाइन और लेंथ को लेकर बेहद सख्त रहने की थी और उन्होंने उसी दायरे में रहकर विकेट हासिल करने की कोशिश की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर ऐसी चिलचिलाती गर्मी में गेंदबाज पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग का फायदा उठाने में नाकाम रहता है, तो उसका कोई मतलब नहीं रह जाता।
कड़ी मेहनत और प्रशंसकों का आभार
अपने करियर के आखिरी दौर से गुजर रहे मोहम्मद शमी के लिए पिछले कुछ महीने काफी संघर्ष भरे रहे हैं, जिसके चलते भारतीय तेज गेंदबाजी क्रम में आई कमियों के बीच फैंस को उनकी धारदार गेंदबाजी की कमी शिद्दत से महसूस हुई है। फैंस से मिल रहे इस अथाह प्रेम और समर्थन से अभिभूत होकर उन्होंने कहा कि इस तरह का प्यार मिलना किसी भी खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी बात है। उन्होंने इस मुश्किल सफर में उनका साथ निभाने वाले हर शख्स का दिल से आभार जताया। उन्होंने अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका काम केवल मैदान पर जी-जान लगाकर मेहनत करना है, बाकी सब कुछ ईश्वर के हाथों में है।


















