घरेलू क्रिकेट में महाराष्ट्र की कप्तानी संभाल रहे भारतीय सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ ने राष्ट्रीय टीम में अपनी वापसी को लेकर एक मजबूत इरादा जाहिर किया है. रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सत्र में उनकी अगुवाई वाली महाराष्ट्र टीम ने सर्विसेस के विरुद्ध बेहद रोमांचक मुकाबले में जीत हासिल की. मैच के अंतिम दिन जब मुकाबला हाथ से निकलता दिखाई दे रहा था, तब पृथ्वी शॉ ने रणनीतिक फैसलों से खेल का रुख पूरी तरह बदल दिया. उनकी कप्तानी में टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए सर्विसेस को ऑलआउट कर दिया और पूरे अंक अपनी झोली में डाल लिए.
राष्ट्रीय टीम में जगह पाने की लंबी होड़ और पृथ्वी की रणनीति
सर्विसेस पर मिली इस यादगार जीत के बाद पृथ्वी शॉ ने अपने खेल, भविष्य की योजनाओं और निजी जिंदगी के बदलावों पर खुलकर चर्चा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सबसे बड़ा और अंतिम मकसद एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनना है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस समय ओपनर बल्लेबाजों के बीच भारतीय टीम में चयन को लेकर बेहद कड़ा मुकाबला चल रहा है. राष्ट्रीय टीम की दहलीज पर कई सलामी बल्लेबाज लगातार दावेदारी पेश कर रहे हैं, ऐसे में इस होड़ में प्रासंगिक बने रहने और चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने के लिए निरंतर रन बनाना और लगातार प्रदर्शन करना ही एकमात्र रास्ता है.
सोशल मीडिया से बनाई दूरी, अब खुद से है सीधी प्रतिस्पर्धा
पृथ्वी शॉ ने अपने मानसिक बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, “मेरे लिए यह किसी को कुछ साबित करने के बारे में नहीं है. यह मेरे और मेरे बीच की लड़ाई है.” उन्होंने बताया कि वह पहले की तुलना में कहीं अधिक पसीना बहा रहे हैं और शारीरिक तथा मानसिक रूप से खुद को मजबूत कर रहे हैं. बाहरी विकर्षणों से बचने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली है. अब उनका पूरा ध्यान केवल तीन प्राथमिक चीजों पर टिका हुआ है, जिसमें उनका क्रिकेट, उनका परिवार और उनका खुद का सुधार शामिल है. इसके अलावा आने वाली बाकी सभी अनचाही चीजों और चर्चाओं को वह पूरी तरह नजरअंदाज कर एक तरफ रख देते हैं.
निजी स्पेस की अहमियत और कैमरों से बचाव
अपनी जीवनशैली में आए बदलावों पर बात करते हुए पृथ्वी शॉ ने कहा कि वह अब ज्यादा से ज्यादा समय अपने घर पर ही बिताना पसंद करते हैं. हालांकि वह आज भी अपने परिवार के साथ भोजन के लिए बाहर जाते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से किसी भी तरह के अतिरिक्त ध्यान से बचने का पूरा प्रयास करते हैं. उन्होंने साफ किया कि वह कभी भी पापराजी को नहीं बुलाते. जहां कुछ लोगों को लगातार कैमरों के सामने रहना पसंद हो सकता है, वहीं उन्हें अपने निजी पलों में कैमरों की मौजूदगी बिल्कुल पसंद नहीं है. अब वह अपनी निजी जिंदगी और व्यक्तिगत स्पेस को बहुत अधिक महत्व देने लगे हैं.
अतीत की गलतियों से सीख और आगे बढ़ने का अटूट संकल्प
मैदान के अंदर और बाहर अपनी पुरानी गलतियों को स्वीकार करते हुए सलामी बल्लेबाज ने कहा कि उनसे पहले कुछ भूल हुई हैं, जिन्हें वह अब गंभीरता से सुधार रहे हैं. उनका मानना है कि जिंदगी के सफर में कोई भी इंसान हर परिस्थिति में सौ फीसदी सही साबित नहीं हो सकता. इंसान गलतियों से ही सीखता है और यह सब जीवन के उतार-चढ़ाव का एक हिस्सा है. पृथ्वी शॉ ने स्पष्ट किया कि वह अब अपने पुराने दिनों की ओर मुड़कर नहीं देखना चाहते. उनका पूरा ध्यान केवल आगे बढ़ने, अपने खेल का भरपूर आनंद लेने और अपनी टीम के साथियों के साथ सकारात्मक माहौल में रहने पर केंद्रित है.
























