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ब्राजील की राजनीति में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का चमत्कार, डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों को झटका देकर चौथी बार संभाली सत्तादुनिया
27 अक्तू॰ 2026, 3:32 pm (5 घंटे पहले)· 2

ब्राजील की राजनीति में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का चमत्कार, डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदों को झटका देकर चौथी बार संभाली सत्ता

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने फ्लावियो बोल्सोनारो को शिकस्त देकर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल कर लिया है। इस जीत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं.

ब्राजील के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है जहां राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अप्रत्याशित जीत हासिल करते हुए चौथी बार देश की बागडोर अपने हाथ में ले ली है। इस मुकाबले में 80 साल के नेता ने दक्षिणपंथी धड़े के मजबूत दावेदार फ्लावियो बोल्सोनारो को करारी शिकस्त दी। चुनाव की शुरुआती दौर की मतगणना में पिछड़ जाने के बाद इस नतीजे को बेहद चौंकाने वाला उलटफेर माना जा रहा है।

कड़े मुकाबले में ऐसे पलटी बाजी

मतदान के शुरुआती चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03% वोट मिले थे जबकि लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को 45.16% मतों पर संतोष करना पड़ा था। इस अंतर से लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा लगभग 22 लाख वोटों से पीछे चल रहे थे जिससे उनकी हार की अटकलें जोर पकड़ने लगी थीं। हालांकि अंतिम दौर के मतदान में तस्वीर पूरी तरह बदल गई और उन्होंने 51.79% वोट हासिल किए जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 48.21% वोट मिले। कुल मिलाकर 6.4 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का समर्थन पाकर उन्होंने ब्राजील के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बना दिया क्योंकि पहले दौर में पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में जीत दर्ज करने वाले वे पहले उम्मीदवार बन गए हैं।

चुनावी रणनीति और जनसंपर्क अभियान

हार की कगार से वापसी करने के लिए लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के खेमे ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली थी। व्हाट्सऐप के माध्यम से सीधे समर्थकों से जुड़ना, नुक्कड़ रैलियां करना और मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करना इस मुहिम का अहम हिस्सा रहा। देश में महंगाई, कर्ज के बढ़ते बोझ और अपराध को लेकर जनता में नाराजगी जरूर थी, लेकिन उन्होंने अपने भाषणों और एजेंडे में सामाजिक कल्याण, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा राष्ट्रीय संप्रभुता के मुद्दों को प्रमुखता से रखा जिसका सीधा फायदा उन्हें मतदान के दिन मिला।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी समीकरण

इस चुनाव परिणाम का प्रभाव केवल दक्षिण अमेरिकी देश तक सीमित नहीं है बल्कि इसका सीधा असर अमेरिकी प्रशासन के साथ संबंधों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच व्यापारिक मुद्दों को लेकर लंबे समय से तनावपूर्ण स्थिति रही है। वॉशिंगटन द्वारा ब्राजील के उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाए जाने से दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ी थीं। फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और उन्हें अमेरिकी राजनीतिक खेमे के काफी करीब माना जाता है। इस जीत को अमेरिकी क्षेत्रीय रणनीति के लिए बड़ा झटका देखा जा रहा है क्योंकि यदि दक्षिणपंथी धड़ा सत्ता में आता तो दोनों देशों की नजदीकियां काफी बढ़ जातीं। विश्लेषकों का मानना है कि ब्राजील की तुलना अक्सर वेनेजुएला से की जाती रही है जहां अमेरिकी दबाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिशों की चर्चाएं होती थीं, लेकिन ब्राजील के मजबूत संस्थागत ढांचे ने इस खतरे को टाल दिया।

ईश्वर को धन्यवाद और भविष्य की प्राथमिकताएं

अपनी जीत के बाद दिए गए संबोधन में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा बेहद भावुक नजर आए और उन्होंने अपनी सफलता का पूरा श्रेय जनता के साथ-साथ ईश्वर को भी दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में उनसे ज्यादा पढ़े-लिखे और योग्य लोग मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद जनता ने उन पर भरोसा जताया। अपनी प्राथमिकताओं को गिनाते हुए उन्होंने सरकार कामकाज के तौर-तरीकों में बदलाव लाने, जन भागीदारी बढ़ाने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प लिया। इसके अलावा उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अमेरिका और चीन पर निर्भरता को कम करने का भी वादा किया। हालांकि उनके सामने दक्षिणपंथी बहुल संसद के साथ तालमेल बिठाने और देश की आर्थिक चुनौतियों से निपटने की कड़ी परीक्षा अभी भी बनी हुई है।

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सवाल-जवाब

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में किसने जीत हासिल की है?
लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने दूसरे दौर के चुनाव में जीत दर्ज कर चौथी बार राष्ट्रपति पद हासिल किया है।
लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने किस प्रतिद्वंद्वी को हराया है?
उन्होंने दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को चुनाव में हराया है।
पहले दौर के मतदान के बाद दोनों उम्मीदवारों की स्थिति क्या थी?
पहले दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03% वोट मिले थे जबकि लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को 45.16% वोट मिले थे।
दूसरे दौर में विजेता उम्मीदवार को कुल कितने वोट मिले?
लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को दूसरे दौर में 51.79% वोट मिले और कुल समर्थन 6.4 करोड़ से ज्यादा रहा।
फ्लावियो बोल्सोनारो किस पूर्व राष्ट्रपति से संबंधित हैं?
फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं।
इस चुनाव परिणाम का अमेरिका के साथ संबंधों पर क्या असर पड़ा है?
इस जीत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की क्षेत्रीय रणनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
लूला ने अपनी जीत के बाद किस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया?
उन्होंने अपनी जीत का श्रेय जनता और ईश्वर को दिया तथा सरकार चलाने के तरीकों में बदलाव लाने का वादा किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद आखिरी समय में इतनी बड़ी बढ़त कैसे हासिल कर ली?

Rohan Verma@rohan-verma·4 घंटे पहले

अस्सी साल की उम्र में इतनी लंबी वापसी थोड़ा हैरान करती है, पता नहीं सेहत साथ दे पाएगी या नहीं।

Li Wei@li-wei·4 घंटे पहले

रोहन जी, जब मैं साओ पाउलो में था, तब मैंने लूला को देखा था; उनकी ऊर्जा सचमुच कमाल की है, उम्र सिर्फ एक नंबर है उनके लिए।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·4 घंटे पहले

अस्सी साल की उम्र में इतनी बड़ी राजनीतिक वापसी करना वाकई हैरान करने वाला है। क्या वॉशिंगटन अब लूला के साथ तालमेल बिठा पाएगा?

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·4 घंटे पहले

कार्लोस, बिल्कुल सही कहा आपने। ब्रासीलिया में जब मैं खुद था, तब देखा था कि लूला के समर्थकों में जो ज़िद है, वो उम्र को नहीं देखती। ट्रंप के साथ इनका तालमेल अब देखना दिलचस्प होगा।

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