घरेलू क्रिकेट में मुंबई के लिए खेलते हुए मुशीर खान ने रणजी ट्रॉफी के एक मुकाबले में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हरियाणा के खिलाफ खेले गए इस मैच में उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल दिखाया। पहले बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने शानदार शतक जड़ा और उसके बाद गेंदबाजी में भी अपनी छाप छोड़ते हुए छह विकेट चटकाए, जिससे हरियाणा की पहली पारी महज 270 रन पर सिमट गई।
35 साल पुराना रिकॉर्ड हुआ बराबर
इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही मुशीर खान ने रणजी ट्रॉफी के इतिहास में 35 साल पुराने एक बड़े रिकॉर्ड को दोहरा दिया है। वह मुंबई के लिए रणजी मैच की एक ही पारी में शतक लगाने और पांच या उससे अधिक विकेट लेने वाले इतिहास के मात्र छठे खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले यह खास उपलब्धि आखिरी बार दिग्गज रवि शास्त्री के नाम दर्ज हुई थी, जिन्होंने 1990-91 के रणजी सीजन में ऐसा कारनामा किया था।
हरियाणा की पहली पारी और मुंबई की बढ़त
मैच के दौरान मुशीर खान ने अपनी गेंदबाजी का जलवा बिखेरते हुए शुरुआती पांच विकेट अपने नाम किए। हालांकि हरियाणा की तरफ से निशांत सिंधू ने डटकर मुकाबला किया और 105 रन की नाबाद पारी खेलकर टीम को संभालने की कोशिश की। इससे पहले मुंबई ने अपनी पहली पारी में 430 रन बनाए थे। इसके जवाब में उतरी हरियाणा की पूरी टीम 270 रन पर ही ऑलआउट हो गई, जिसके आधार पर मुंबई को पहली पारी में 160 रन की अहम बढ़त हासिल हुई।
फॉलोऑन और मैच की मौजूदा स्थिति
लगातार तीसरी जीत और बोनस अंक हासिल करने के पक्के इरादे के साथ मैदान पर उतरी मुंबई ने इसके बाद हरियाणा को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर कर दिया। मुकाबले के तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक हरियाणा ने अपनी दूसरी पारी में दो विकेट के नुकसान पर 73 रन बना लिए थे। टीम अभी भी 87 रन पीछे चल रही है और उसके पास आठ विकेट सुरक्षित हैं। मैच के अंतिम दिन हरियाणा के बल्लेबाजों को एक ऐसी पिच पर बल्लेबाजी करनी होगी जो काफी खुरदरी हो चुकी है, जिससे उनके लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
चोट और अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन
हरियाणा की मुश्किलें उस समय और अधिक बढ़ गईं जब पारी के दौरान सलामी बल्लेबाज हिमांशु राणा को सिल्वेस्टर डिसूजा की एक गेंद सीधे हेलमेट पर जा लगी, जिसके बाद वे चोटिल होकर मैदान से बाहर जाने को मजबूर हो गए। इससे पहले पारी की शुरुआत में कप्तान अंकित कुमार को तनुष कोटियान ने अपना शिकार बनाया था। जब तीसरे दिन का खेल समाप्त हुआ, तब निशांत सिंधू 22 रन बनाकर क्रीज पर डटे हुए थे और यशवर्धन दलाल 13 रन बनाकर नाबाद खेल रहे थे।


















