लाल गेंद के क्रिकेट में दोहरा शतक बनाना हर बल्लेबाज का एक बड़ा सपना होता है, लेकिन कुछ ऐसे मौके भी आते हैं जब इतिहास रचने से महज एक कदम की दूरी पर खिलाड़ी चूक जाता है। टेस्ट क्रिकेट के लंबे सफर में कई बार ऐसा हुआ है जब क्रीज पर पूरी तरह सेट और शानदार लय में दिख रहा खिलाड़ी 199 के स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौट गया। भारतीय क्रिकेट के पन्नों में भी यह दर्दनाक वाकया दर्ज है, जहां महान बल्लेबाजों ने अपनी अद्भुत पारियों के बाद भी इस जादुई आंकड़े को छूने का गौरव गंवा दिया। ऐसे मौकों पर खिलाड़ियों की मेहनत और उनका वो एक रन का मलाल हमेशा के लिए क्रिकेटप्रेमियों की यादों में बस जाता है।
मोहम्मद अजहरुद्दीन बने थे पहले बदनसीब भारतीय
भारतीय क्रिकेट इतिहास में टेस्ट प्रारूप के दौरान 199 के निजी स्कोर पर आउट होने का सिलसिला सबसे पहले मोहम्मद अजहरुद्दीन के नाम जुड़ा था। साल 1986 में कानपुर के मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे मुकाबले में इस दिग्गज बल्लेबाज ने बल्लेबाजी का शानदार नजारा पेश किया था। टीम के लिए पांचवें क्रम पर क्रीज पर उतरे इस खिलाड़ी ने श्रीलंकाई गेंदबाजों की जमकर खबर ली और अपनी बेहतरीन तकनीक से मैदान के चारों ओर शॉट खेले। अपनी उस यादगार पारी के दौरान उन्होंने 16 चौके और एक छक्का जमाया था, लेकिन जब वह अपने दोहरे शतक के बिल्कुल करीब थे, तभी रवि रत्नायके की एक गेंद उनके बल्ले को छकाती हुई पैड पर जा लगी। अंपायर ने उन्हें एलबीडब्ल्यू करार दिया और वह इतिहास रचने से ठीक एक रन पहले आउट हो गए। उनकी इस मैराथन पारी के दम पर भारत ने पहली पारी में 676/7 का विशाल स्कोर बोर्ड पर टांग दिया था, हालांकि अंत में वह मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ था.
केएल राहुल के साथ चेन्नई में दोहराया गया इतिहास
इस फेहरिस्त में दूसरा और आखिरी नाम केएल राहुल का आता है, जो साल 2016 में चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले के दौरान इसी दुर्भाग्य का शिकार बने थे। केएल राहुल ने उस मैच में अद्भुत संयम, अनुशासन और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया था, जिससे इंग्लिश गेंदबाज पूरी तरह बेबस नजर आ रहे थे। उस पारी की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने पहली पारी में 759/7 रन का रिकॉर्ड स्कोर खड़ा कर दिया था, जिसमें केएल राहुल और करुण नायर की शानदार साझेदारियों का बड़ा योगदान था। राहुल ने शुरुआत से लेकर लंबे समय तक क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी की और विपक्षी टीम के हर गेंदबाज का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने 311 गेंदों का सामना करते हुए अपनी इस पारी को गढ़ा और इसमें 16 चौके तथा 3 गगनचुंबी छक्के शामिल किए। जब पूरा स्टेडियम और खुद वह बल्लेबाज इस बात को लेकर आश्वस्त था कि अब पहला दोहरा शतक पूरा होने ही वाला है, तभी आदिल राशिद की एक गेंद पर वह कैच थमा बैठे। स्कोरबोर्ड पर 199 रन चमक रहे थे और यह पल मैदान पर मौजूद हर शख्स के लिए बेहद मायूसी भरा बन गया। हालांकि उस मैच में भारत ने पारी और 75 रन से बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन वह एक रन का अधूरापन हमेशा के लिए चर्चा का विषय बन गया। केएल राहुल का करियर उतार-चढ़ाव और संघर्ष से भरा रहा है, लेकिन उस पारी ने साबित कर दिया कि उनके पास बड़े स्तर पर लंबी और टिकाऊ पारियां खेलने की गजब की क्षमता मौजूद है.



















