टेस्ट क्रिकेट को आमतौर पर पारंपरिक और लंबे समय तक चलने वाला फॉर्मेट माना जाता है, जहाँ खिलाड़ी बेहद सावधानी के साथ अपनी पारियों को आगे बढ़ाते हैं। पाँच दिनों तक चलने वाले इस खेल में हर एक सेशन की अपनी रणनीति होती है और बल्लेबाज डिफेंस पर ज्यादा जोर देते हैं। लेकिन क्रिकेट के इस सबसे लंबे प्रारूप में कई बार ऐसे अविश्वसनीय दिन भी आए हैं जब किसी एक खास खिलाड़ी ने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से सारे समीकरण बदलकर रख दिए। जब कोई बल्लेबाज विपक्षी गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह तहस-नहस करते हुए एक ही दिन में दोहरा या तिहरा शतक ठक देता है, तो वह पल हमेशा के लिए रिकॉर्ड बुक में अमर हो जाता है। डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुराने टेस्ट इतिहास में कुछ ऐसे अद्भुत मौके आए हैं जब मैदान पर रनों की बाढ़ आ गई थी और एक ही दिन के खेल में बल्लेबाजों ने रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया।
इन ऐतिहासिक कारनामों की फेहरिस्त में सबसे पहला नाम सर डॉन ब्रैडमैन का आता है, जिन्होंने 11 जुलाई 1930 को इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स के हेडिंग्ले मैदान पर इतिहास रच दिया था। एशेज सीरीज के इस तीसरे टेस्ट मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई युवा सनसनी ने क्रीज पर कदम रखते ही अंग्रेजी गेंदबाजों पर धावा बोल दिया। उन्होंने न केवल उसी दिन अपना शतक और दोहरा शतक पूरा किया, बल्कि स्टंप्स तक नाबाद 309 रन बनाकर पूरी दुनिया को अचरज में डाल दिया। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक ही दिन के खेल में तिहरा शतक जड़ने का यह रिकॉर्ड आज भी पूरी तरह से अटूट बना हुआ है।
इस महान फेहरिस्त में अगला नाम इंग्लैंड के धाकड़ खिलाड़ी वैली हैमंड का है, जिन्होंने 31 मार्च 1933 को ऑकलैंड के मैदान पर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के खिलाफ अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। मैच के दूसरे दिन 41 रन बनाकर नाबाद लौटने वाले इस बल्लेबाज ने तीसरे दिन के खेल की शुरुआत से ही आक्रामक तेवर अपना लिए। उन्होंने मैदान के चारों तरफ रनों की बरसात करते हुए उस अकेले दिन में 295 रन कूट डाले। अंत में 336 रन बनाकर नाबाद पवेलियन लौटने वाले इस खिलाड़ी ने उस समय का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर अपने नाम कर लिया था, जिसकी चमक आज भी फीकी नहीं पड़ी है।
आधुनिक क्रिकेट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से गेंदबाजों के मन में खौफ पैदा करने वाले भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का नाम इस सूची में शामिल न हो, ऐसा होना असंभव है। दो दिसंबर 2009 को मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान उन्होंने श्रीलंका के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियाँ उड़ा दी थीं। भारत की पहली पारी की शुरुआत करने उतरे इस धुरंधर बल्लेबाज ने पहले ही दिन अपने तेवर दिखाते हुए बिना आउट हुए 284 रन बना डाले। उनकी इस ताबड़तोड़ पारी में चौकों और छक्कों की ऐसी झड़ी लगी कि दर्शक झूम उठे और आधुनिक युग में एक दिन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड उनके नाम हो गया।
английский खिलाड़ी डेनिस कॉम्पटन ने भी इस एलीट क्लब में अपनी खास जगह बनाई है जब उन्होंने 1 जुलाई 1954 को नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ कमाल कर दिखाया। मैच के दूसरे दिन केवल 5 रन बनाकर नाबाद रहने वाले इस बल्लेबाज ने अगले दिन अपनी कलात्मक और आक्रामक शैली का ऐसा मिश्रण पेश किया कि पाकिस्तानी गेंदबाज लाचार नजर आए। उन्होंने उस एक दिन में 273 रन जोड़कर अपनी कुल पारी को 278 रनों तक पहुँचाया, जो पाकिस्तान के विरुद्ध किसी भी खिलाड़ी द्वारा एक दिन में बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बन गया।
लीड्स का हेडिंग्ले मैदान सर डॉन ब्रैडमैन के लिए बेहद लकी साबित हुआ था क्योंकि उन्होंने 20 जुलाई 1934 को एक बार फिर इसी मैदान पर इतिहास दोहराया। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच हुए इस मुकाबले के दूसरे दिन बिना खाता खोले नाबाद लौटने वाले ब्रैडमैन ने अगले दिन इंग्लिश गेंदबाजों की जमकर खबर ली। उन्होंने पूरे दिन के खेल के दौरान लगातार रन बनाते हुए 271 रनों की नाबाद पारी खेली। एक ही मैदान पर दो अलग-अलग मुकाबलों में एक दिन के भीतर 270 से ज्यादा रन बनाने का यह कारनामा उनकी अद्वितीय प्रतिभा और महानता की सबसे बड़ी मिसाल है।
























