आधुनिक क्रिकेट के इस दौर में जहां अधिकांश खिलाड़ी कम समय में ज्यादा सफलता हासिल करने और शॉर्टकट अपनाने की फिराक में रहते हैं, वहीं विराट कोहली ने एक ऐसा बयान दिया है जो युवा खिलाड़ियों के लिए किसी सीख से कम नहीं है। अपने करियर के इस पड़ाव पर जहां अमूमन खिलाड़ी आराम करने या संन्यास के बारे में विचार करने लगते हैं, वहीं कोहली ने अपने ऊपर एक नया और कड़ा चैलेंज लिया है। वह चैलेंज है अपनी पारी की रफ्तार को और तेज करना, मैदान पर बिना थके ताबड़तोड़ दौड़ लगाना और हर मुकाबले में अपनी फिटनेस का एक नया और ऊंचा स्तर दिखाना। सिर्फ वनडे फॉर्मेट तक सीमित रहने के बाद अब वह मानसिक रूप से बेहद शांत और स्पष्ट नजर आ रहे हैं। आगामी वर्ल्ड कप से ठीक एक साल पहले उनका यह आक्रामक रुख और सकारात्मक रवैया टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित होने जा रहा है। आइए जानते हैं वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 गेंदों पर 139 रनों की नाबाद पारी खेलने के बाद उन्होंने क्या खुलासे किए हैं।
करियर के अंतिम चरण में बदला खेलने का अंदाज
विराट कोहली ने खुलकर स्वीकार किया है कि करियर के इस मोड़ पर उनके सामने एक नया चैलेंज है, जो अपनी पारी की गति को एक या दो पायदान ऊपर उठाना और अधिक आक्रामक अंदाज में खेलना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कम फॉर्मेट खेलने की वजह से उन्हें अपने लक्ष्यों को लेकर अभूतपूर्व स्पष्टता मिली है, जिसकी बदौलत उन्हें किसी भी तरह का मानसिक दबाव या बेचैनी महसूस नहीं होती है। उनके लिए अब मैदान पर कदम रखना सिर्फ अपने प्रदर्शन का बोझ ढोना नहीं रह गया है, बल्कि खेल के हर एक पल का खुलकर आनंद लेना बन गया है। उनका दृढ़ विश्वास है कि एक तनावमुक्त और आजाद दिमाग के पीछे एक मजबूत और फिट शरीर का होना सबसे ज्यादा जरूरी है, जो उन्हें मैदान पर अपनी पूरी क्षमता का खुलकर इस्तेमाल करने की शारीरिक शक्ति प्रदान करता है।
फिटनेस, आभार और खेल के प्रति अटूट समर्पण
कोहली का यह भी मानना है कि जब कोई खिलाड़ी अपनी सफलता के सर्वोच्च शिखर पर होता है, तो उसके लिए यह भूल जाना बहुत आम बात है कि उसने अपने सफर की शुरुआत कहां से की थी। अपने बचपन के संघर्षों से लेकर देश के लिए खेलने तक के पूरे रास्ते को याद करते हुए वह बेहद कृतज्ञता महसूस करते हैं। उनका कहना है कि अगर किस्मत और कठिन परिश्रम का साथ उन्हें न मिला होता, तो शायद वह आज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते। यही मुख्य वजह है कि जब वह मैदान पर उतरते हैं, तो अपना सौ प्रतिशत योगदान देना चाहते हैं। चाहे पारी के आखिरी ओवरों में बाउंड्री से बाउंड्री तक लगातार दौड़ लगाना हो या टीम के लिए हर परिस्थिति में मुस्तैद रहना हो, वह किसी भी तरह का बहाना बनाए बिना मैदान पर अपनी पूरी ऊर्जा झोंक देने में अटूट विश्वास रखते हैं।
युवा पीढ़ी के लिए कोहली की अनमोल सीख
क्रिकेट की नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को सलाह देते हुए कोहली ने कहा है कि एथलीटों को खेल के मैदान से बाहर की बाहरी दुनिया या अनावश्यक शोर-शराबे पर अपना ध्यान केंद्रित करने से बचना चाहिए। एक बार जब आप खेल के मैदान के भीतर कदम रख देते हैं, तो वही मैदान और वही खेल आपके लिए आपकी पूरी दुनिया होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि खिलाड़ियों को इस कड़वी और अटल सच्चाई को स्वीकार करना ही होगा कि खेल का यह सफर कभी भी समाप्त हो सकता है, इसलिए मैदान पर उतरा हर मैच ऐसे खेलें जैसे वही आपकी जिंदगी का सब कुछ हो। यही निडर और बेबाक मानसिकता खिलाड़ियों के भीतर बड़े जोखिम उठाने और अपनी टीम के लिए हारी हुई बाजी को भी जीत में बदलने का माद्दा पैदा करती है।
शुभमन गिल के साथ शानदार तालमेल और साझेदारी
शुभमन गिल के साथ अपनी मैदान पर हुई साझेदारी और उनकी कप्तानी पर चर्चा करते हुए कोहली ने उनकी जमकर प्रशंसा की है। दुनिया के शीर्ष वनडे बल्लेबाजों में शुमार शुभमन गिल के साथ बल्लेबाजी करते समय उन्हें आपस में ज्यादा बातचीत करने की आवश्यकता ही महसूस नहीं होती, क्योंकि दोनों खिलाड़ियों को यह बखूबी मालूम होता है कि मौजूदा परिस्थिति के अनुसार क्या कदम उठाना सही रहेगा। कोहली का ऐसा मानना है कि गिल के पास खेल को विभिन्न और कठिन परिस्थितियों से निकालकर जिताने का एकदम सटीक दृष्टिकोण और स्पष्ट विजन है, और यही कारण है कि वह टीम की बेहद सफलतापूर्वक अगुवाई कर रहे हैं और भारतीय क्रिकेट को आगे ले जा रहे हैं।



















