भारतीय क्रिकेट टीम को वर्ष 2011 में ऐतिहासिक वनडे विश्व कप का स्वाद चखने वाले मुख्य कोच गैरी कर्स्टन अब एक बिलकुल अलग भूमिका में नजर आ रहे हैं। वह समय अब इतिहास बन चुका है जब गैरी कर्स्टन भारतीय ड्रेसिंग रूम की शोभा हुआ करते थे और खिलाड़ियों को जीत का मंत्र दिया करते थे। वर्तमान में वह श्रीलंका क्रिकेट टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और आगामी श्रृंखला में भारत को मात देने के लिए अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की रोमांचक श्रृंखला का आगाज होने वाला है, जिससे ठीक पहले गैरी कर्स्टन की सक्रियता ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
अभ्यास मैच के दौरान मैदान पर पैनी नजर
आगामी टेस्ट श्रृंखला से पहले श्रीलंका की जमीन पर चल रहे अभ्यासों के दौरान गैरी कर्स्टन की मौजूदगी बेहद चर्चा का विषय बन गई। रविवार को वह नॉनडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब ग्राउंड पर पहुंचे, जहां भारतीय टीम और श्रीलंका क्रिकेट XI के बीच अभ्यास मैच का तीसरा दिन खेला जा रहा था। मैदान के बाहर बाउंड्री के पास खड़े होकर उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बहुत बारीकी से परखा। वह खेल के हर एक पहलू पर गहरी नजर बनाए हुए थे ताकि खिलाड़ियों की ताकत और कमजोरी का सटीक अंदाजा लगाया जा सके। इस दौरान उन्होंने अभ्यास मुकाबले में शिरकत कर रहे भारतीय तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ के साथ मैदान के पास कुछ देर बातचीत भी की। बातचीत का यह सिलसिला खत्म होने के बाद उन्होंने तुरंत अपना ध्यान फिर से मैदान पर चल रहे खेल पर केंद्रित कर लिया और मुकाबले की हर गतिविधि को गहराई से देखते रहे।
2011 विश्व कप जीत के सूत्रधार की पुरानी यादें
गैरी कर्स्टन का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे स्वर्णिम अध्यायों में शुमार है। उन्होंने वर्ष 2008 से 2011 तक भारतीय टीम के मुख्य कोच के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं और देश को वह सफलता दिलाई थी जिसका इंतजार करोड़ों फैंस लंबे अरसे से कर रहे थे। महेंद्र सिंह धोनी की शानदार कप्तानी में भारत ने 2011 का वनडे विश्व कप अपने नाम किया था और पूरे अट्ठाइस साल बाद विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया था। उस ऐतिहासिक सफलता के पीछे गैरी कर्स्टन की रणनीति और मार्गदर्शन का बहुत बड़ा हाथ था। उन्होंने भारतीय क्रिकेटरों की मानसिकता, उनकी कार्यशैली, ड्रेसिंग रूम के अंदर के माहौल और खिलाड़ियों की व्यक्तिगत ताकतों को बहुत करीब से देखा और समझा था। अब वही अमूल्य अनुभव श्रीलंका के पाले में चला गया है और वह भारत के खिलाफ ही इसका इस्तेमाल करने की स्थिति में हैं।
भारतीय क्रिकेट तंत्र से भली-भांति परिचित हैं
भले ही गैरी कर्स्टन का सीधा नाता वर्तमान समय के कुछ नए भारतीय क्रिकेटरों के साथ सीधे तौर पर न रहा हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट की कार्यप्रणाली और उसकी नब्ज से वह पूरी तरह वाकिफ हैं। उन्हें भारतीय खेल प्रणाली की हर बारीक बात की जानकारी है। किसी भी अन्य विदेशी कोच की तुलना में गैरी कर्स्टन के पास भारतीय क्रिकेट की मानसिकता को समझने का एक अनूठा और अलग नजरिया मौजूद है। यही वजह है कि श्रीलंका के खेमे में उनकी मौजूदगी भारतीय खेमे के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। वह अच्छी तरह जानते हैं कि भारतीय खिलाड़ी दबाव की स्थिति में कैसा बर्ताव करते हैं और उनकी तकनीक की क्या खूबियां हैं।
2027 के बड़े लक्ष्य के साथ श्रीलंका की कमान
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने गैरी कर्स्टन को केवल एक छोटी श्रृंखला के लिए ही नहीं जोड़ा है, बल्कि उनके साथ एक दूरगामी योजना पर काम किया जा रहा है। उन्हें वर्ष 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप तक श्रीलंका की पूरी टीम को एक मजबूत इकाई के रूप में तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। भारत के खिलाफ होने वाली यह आगामी दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला उनके लिए अपनी नई टीम की कमियों को दूर करने और खिलाड़ियों की वास्तविक क्षमता को परखने का एक बेहतरीन मंच साबित होगी। यह श्रृंखला 15 अगस्त से शुरू होने जा रही है, जिसके लिए दोनों ही दल अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।
विपक्षी खेमे से मिलने वाली चुनौती
एक समय ऐसा था जब गैरी कर्स्टन की उपस्थिति भारतीय खेमे में आत्मविश्वास जगाती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और वह विपक्षी ड्रेसिंग रूम के मुख्य रणनीतिकार हैं। भारतीय बल्लेबाजों की मौजूदा फॉर्म, गेंदबाजों की लय और किसी खास परिस्थिति में टीम के प्रदर्शन को देखकर वह श्रीलंका के लिए अचूक योजनाएं बुन रहे हैं। दूसरी तरफ, भारतीय खेमे के लिए भी यह देखना बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण होगा कि जिस शख्स ने उन्हें कभी दुनिया का सिरमौर बनाया था, वही आज विरोधी खेमे से उनके विजय रथ को रोकने के लिए क्या रणनीति अपनाता है।



















