अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली ने अपने भविष्य को लेकर एक बहुत ही बड़ा और भावनात्मक ऐलान किया है। खेल प्रेमियों और क्रिकेट प्रशंसकों के बीच अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और फिटनेस के लिए पहचाने जाने वाले इस महान बल्लेबाज ने साफ कर दिया है कि आगामी वैश्विक टूर्नामेंट उनके पचास ओवर के करियर का अंतिम अभियान होगा। दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाले आगामी आईसीसी पुरुष वनडे वर्ल्ड कप को लेकर उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट कर दी हैं। इस घोषणा के बाद जहां एक तरफ दुनिया भर के चाहने वाले थोड़े भावुक हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को किसी भी कीमत पर हासिल करने की उनकी जिद्द ने समर्थकों में एक नया जोश भर दिया है।
अंतिम विश्व कप को लेकर अटूट संकल्प
अपनी इस आगामी और आखिरी विश्व कप यात्रा के बारे में खुलकर बात करते हुए विराट कोहली ने असाधारण दृढ़ संकल्प दिखाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनके देश के लिए खेलने का अंतिम पचास ओवरों का विश्व कप होगा, और यही बात उन्हें मैदान पर अपनी पूरी ताकत झोंकने के लिए सबसे ज्यादा प्रेरित करती है। उनका एकमात्र और स्पष्ट लक्ष्य देश के लिए विश्व कप की ट्रॉफी जीतना है। इस सपने को सच करने की खातिर हर प्रकार की बाधा का सामना करने के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं।
रोहित शर्मा की भी लंबी योजनाएं
केवल विराट कोहली ही नहीं बल्कि भारतीय टीम के अनुभवी ओपनर रोहित शर्मा भी दो हजार सत्ताईस के इस बड़े टूर्नामेंट को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में देख रहे हैं। रोहित ने भी यह बात स्पष्ट की है कि उनके भीतर क्रिकेट खेलने की भूख अभी समाप्त नहीं हुई है। उनका मानना है कि जब तक कोई खिलाड़ी मैदान पर सक्रिय है, तब तक हमेशा कुछ नया हासिल करने की गुंजाइश बनी रहती है। भविष्य की चुनौतियों और आगामी मुकाबलों को लेकर उनके भीतर गजब का उत्साह देखा जा सकता है।
ऐतिहासिक विश्व कप सफर की शुरुआत
विराट कोहली का पचास ओवरों के विश्व कप इतिहास के साथ एक बेहद गहरा और पुराना नाता रहा है। उन्होंने साल दो हजार ग्यारह में पहली बार इस मेगाइवेंट में कदम रखा था और अपने पदार्पण संस्करण में ही इतिहास रच दिया था। दो अप्रैल दो हजार ग्यारह की वह यादगार रात आज भी हर भारतीय के दिल में ताजा है, जब महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में राष्ट्रीय टीम ने घरेलू धरती पर अट्ठाइस वर्षों के लंबे अंतराल के बाद विश्व विजेता होने का गौरव प्राप्त किया था। उस ऐतिहासिक जीत के बाद युवा विराट द्वारा अपने वरिष्ठ खिलाड़ियों को कंधों पर उठाकर मैदान का चक्कर लगाना एक अविस्मरणीय पल बन गया था। उस शानदार शुरुआत के बाद से उन्होंने दो हजार ग्यारह, दो हजार पंद्रह, दो हजार उन्नीस और दो हजार तेईस के संस्करणों में देश का प्रतिनिधित्व किया है।
टूर्नामेंट इतिहास के दूसरे सबसे सफल बल्लेबाज
इन चार विश्व कप अभियानों के दौरान इस बल्लेबाज का बल्ला हमेशा से गेंदबाजों पर भारी पड़ा है। अगर आंकड़ों की बात की जाए तो विराट कोहली इस टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में दूसरे स्थान पर मजबूती से काबिज हैं। उनकी निरंतरता का सबसे बड़ा प्रमाण दो हजार तेईस के विश्व कप में मिला, जिसकी मेजबानी देश में ही हुई थी। उस प्रतियोगिता में उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ बल्लेबाजी करते हुए कुल सात सौ पैंसठ रन बनाए थे। यह पचास ओवरों के किसी भी एकल संस्करण में किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर है, जिससे यह साबित हो गया कि बड़े मंच पर उनका कोई सानी नहीं है।
पंद्रह हजार रनों के मील के पत्थर के करीब
एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस नीली जर्सी धारी खिलाड़ी के आंकड़े बेहद शानदार हैं। उन्होंने अब तक कुल तीन सौ चौदह मुकाबलों में चौदह हजार नौ सौ इकतालीस रन अपने नाम किए हैं। वह पंद्रह हजार रनों के जादुई आंकड़े से मात्र कुछ ही कदम की दूरी पर खड़े हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी तीन मैचों की श्रृंखला से पहले उन्होंने अपने भविष्य के रोडमैप और आगामी तैयारियों पर खुलकर बात की है।
पचास ओवर के फॉर्मेट की भारी शारीरिक मांग
विराट कोहली ने इस लंबे प्रारूप की कठिनाइयों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी तीव्रता किसी भी अन्य प्रतियोगिता की तुलना में काफी अधिक होती है। आधुनिक युग में यह टी-ट्वेंटी स्तर की रफ्तार के साथ लगातार दस मैच खेलने के समान है। एक तरह से खिलाड़ी को एक ही दिन में ढाई टी-ट्वेंटी मुकाबलों के बराबर अपनी ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इतने बड़े स्तर पर लगातार दस मुकाबलों तक उसी ऊर्जा को बनाए रखना एक बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। इसके अलावा विदेशी परिस्थितियों में मुकाबला होना खिलाड़ी से शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर बहुत कुछ मांगता है।
अलग परिस्थितियां और नई चुनौतियां
रोहित शर्मा ने भी इस बात को रेखांकित किया कि जब कोई खिलाड़ी वैश्विक प्रतियोगिताओं में उतरता है, तो वहां की चुनौतियां बिल्कुल अलग और अनूठी होती हैं। हर बार अलग प्रतिद्वंद्वी टीमों से मुकाबला करना होता है और अलग-अलग मैदानों पर अपनी कला दिखानी पड़ती है। यही कारण है कि हर मैच के साथ रणनीति और सोच में बदलाव लाना जरूरी हो जाता है, और यही इस खेल का असली रोमांच तथा कठिन परीक्षा है।


















