मार्च 2026 में लगातार दूसरी बार ICC T20 विश्व कप का खिताब जीतकर दुनिया पर राज करने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का ऐसा बुरा वक्त आएगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। विश्व विजेता बनने के ठीक बाद टीम के प्रदर्शन में आई इस भारी गिरावट ने खेल प्रशंसकों को हैरान कर दिया है। पहले आयरलैंड ने भारत को लगातार दो मैचों में करारी शिकस्त दी, और अब इंग्लैंड के दौरे पर भी टीम इंडिया की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। इस लगातार खराब प्रदर्शन के कारण नए कप्तान श्रेयस अय्यर की नेतृत्व क्षमता पर तीखे सवाल उठने लगे हैं। क्रिकेट प्रेमियों और विश्लेषकों के बीच अब यह बहस तेज हो गई है कि आखिर BCCI ने क्या सोचकर टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में सौंप दी, जिनके फैसले मैदान पर टीम के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को कमान देने का फैसला
जब से श्रेयस अय्यर ने भारतीय T20 टीम के नए कप्तान के रूप में जिम्मेदारी संभाली है, तब से टीम इंडिया को एक भी मुकाबले में जीत नसीब नहीं हुई है। जीत दर्ज करना तो दूर की बात है, भारतीय टीम किसी भी मैच में टक्कर देती हुई भी नजर नहीं आई। विश्व विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव को अचानक कप्तानी से हटाकर श्रेयस अय्यर को कमान सौंपने का फैसला अब पूरी तरह से सवालों के घेरे में है। मैदान पर अब सूर्यकुमार और श्रेयस अय्यर की कप्तानी का अंतर साफ दिखने लगा है। श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में टीम इंडिया पिछले पांच मैचों से लगातार हार का सामना कर रही है, लेकिन उनकी हार का यह सिलसिला केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ही सीमित नहीं है। इससे पहले जब वह IPL में पंजाब की टीम की कप्तानी कर रहे थे, तब भी शुरुआती सफलता के बाद उनकी टीम लगातार हार के दलदल में फंसती चली गई थी। अगर IPL और अंतरराष्ट्रीय मैचों के आंकड़ों को मिलाकर देखें, तो श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पिछले 12 मैचों में से टीम को 10 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है, जबकि केवल एक मैच में जीत मिली है और एक मैच बिना किसी नतीजे के समाप्त हुआ।
T20I इतिहास का सबसे शर्मनाक बल्लेबाजी प्रदर्शन
इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे T20I मुकाबले में भारतीय टीम की कमजोरी पूरी तरह उजागर हो गई। भारतीय टीम के सामने जीत के लिए 202 रनों का लक्ष्य था, जो आधुनिक क्रिकेट और भारतीय टीम की ताकत को देखते हुए बहुत बड़ा नहीं माना जा सकता था। भारतीय टीम पहले भी इससे बड़े लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर चुकी है, लेकिन इस मुकाबले में पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पूरी भारतीय टीम अपने कोटे के पूरे 20 ओवर भी क्रीज पर नहीं टिक सकी और महज 11.4 ओवर में सिर्फ 76 रन बनाकर पवेलियन लौट गई। T20I क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका है जब पूरी भारतीय टीम इतने कम ओवरों में ऑलआउट हो गई हो। इससे पहले साल 2015 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ कटक में टीम इंडिया 17.2 ओवर में ऑलआउट हुई थी, लेकिन अब श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम ने एक नया और बेहद अनचाहा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।
मैदान पर ढुलमुल रवैया और रणनीतिक विफलता
इस करारी हार का एक बड़ा कारण श्रेयस अय्यर की कप्तानी में साफ दिखने वाली रणनीतिक विफलता भी है। जब इंग्लैंड के बल्लेबाज मैदान पर भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ ताबड़तोड़ रन बना रहे थे और चौके-छक्के बरसा रहे थे, तब कप्तान श्रेयस अय्यर मैदान पर पूरी तरह बेअसर दिखे। उन्होंने न तो अपने गेंदबाजों से कोई बातचीत की और न ही फील्डिंग में कोई ऐसा बदलाव किया जिससे रनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाया जा सके। वह चुपचाप खड़े होकर इंग्लैंड की आक्रामक बल्लेबाजी को देखते रहे। एक कप्तान के रूप में दबाव की परिस्थितियों में उनका यह शांत और निष्क्रिय रवैया टीम के हौसले को कमजोर कर रहा है। अगर यही स्थिति बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब विरोधी टीमें भारतीय टीम को आसानी से हराने का दावा करने लगेंगी और भारतीय क्रिकेट का दबदबा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
BCCI के सामने बड़ी चुनौती
इस शर्मनाक हार के बाद अब गेंद पूरी तरह से BCCI के पाले में है। चयनकर्ताओं को जल्द ही इस बात की समीक्षा करनी होगी कि क्या श्रेयस अय्यर लंबे समय के लिए कप्तानी के सही विकल्प हैं या फिर टीम को इस संकट से उबारने के लिए किसी और को यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। विश्व कप जीतने के तुरंत बाद टीम का इस तरह बिखरना भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। श्रेयस अय्यर को अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों में बड़ा सुधार करना होगा, अन्यथा भारतीय टीम का ग्राफ लगातार नीचे गिरता चला जाएगा।











