भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 23 अक्टूबर को खेले गए सीरीज के पहले एकदिवसीय मुकाबले में जिम्बाब्वे को 9 विकेट से करारी शिकस्त देकर शानदार आगाज किया। इस एकतरफा मुकाबले में भारतीय टीम की जीत की मुख्य सूत्रधार सलामी बल्लेबाज प्रतिका रावल रहीं, जिन्होंने बेहतरीन बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश करते हुए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का तीसरा वनडे शतक पूरा किया। जिम्बाब्वे की पूरी टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए महज 197 रनों पर ढेर हो गई थी, जिसे भारतीय टीम ने महज 27 ओवरों में 1 विकेट के नुकसान पर बेहद आसानी से हासिल कर लिया। इस दमदार जीत के साथ भारतीय टीम ने बहुपक्षीय सीरीज में 1,0 की महत्वपूर्ण बढ़त अपने नाम कर ली है।
स्मृति मंधाना के विशिष्ट क्लब में शामिल हुईं प्रतिका रावल
इस शतकीय पारी के दम पर प्रतिका रावल ने एक बड़ा व्यक्तिगत कीर्तिमान भी अपने नाम दर्ज करा लिया। भारतीय महिला एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास में बतौर ओपनर सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड स्मृति मंधाना के नाम दर्ज है, जिन्होंने पारी की शुरुआत करते हुए कुल 14 शतक लगाए हैं। अब प्रतिका रावल अपने करियर का तीसरा वनडे शतक पूरा करके स्मृति मंधाना की इस बेहद खास सूची में शामिल होने वाली दूसरी भारतीय ओपनर बन गई हैं।
भारतीय महिला वनडे क्रिकेट में अब तक केवल स्मृति मंधाना और प्रतिका रावल ही ऐसी दो बल्लेबाज हैं जिनके नाम बतौर सलामी बल्लेबाज 3 या उससे अधिक शतक दर्ज हैं। भारत की पूर्व कप्तान मिताली राज, पूनम राउत, तिरुष कामिनी और जया शर्मा जैसी दिग्गज बल्लेबाजों ने अपने वनडे करियर में बतौर ओपनर 2,2 शतक लगाए हैं। प्रतिका ने इन सभी पूर्व दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए यह मील का पत्थर हासिल किया है।
स्मृति और शेफाली की आतिशी पारियों से आसान हुई राह
मुकाबले में जीत के लिए मिले 198 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को कप्तान स्मृति मंधाना और प्रतिका रावल की जोड़ी ने बेहद आक्रामक और मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए सिर्फ कुछ ही ओवरों में 94 रनों की तेज साझेदारी बना डाली। कप्तान मंधाना ने क्रीज पर आते ही जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बनाया और सिर्फ 34 गेंदों पर 62 रनों की तूफानी अर्धशतकीय पारी खेली। मंधाना के पवेलियन लौटने के बाद बल्लेबाजी क्रम में तीसरे नंबर पर उतरीं शेफाली वर्मा ने भी उसी आक्रामक अंदाज को जारी रखा।
शेफाली वर्मा ने मैदान पर उतरते ही बड़े शॉट्स खेलना शुरू किया और मात्र 33 गेंदों पर नाबाद 64 रन ठोक दिए। उनकी इस तेजतर्रार पारी में 5 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। दूसरे छोर पर टिककर खेल रहीं प्रतिका रावल ने अपनी पारी को बड़ी कुशलता से आगे बढ़ाया। प्रतिका ने 96 गेंदों का सामना करते हुए 15 चौकों की मदद से नाबाद 100 रनों की यादगार शतकीय पारी खेली। प्रतिका और शेफाली के बीच दूसरे विकेट के लिए 106 रनों की अटूट साझेदारी हुई, जिसकी बदौलत भारत ने 27 ओवरों में 1 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।
श्री चरणी और क्रांति गौड़ की घातक गेंदबाजी
बल्लेबाजों के चमकने से पहले भारतीय गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को पूरी तरह बेपटरी कर दिया था। टॉस हारकर या पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी जिम्बाब्वे की टीम भारतीय गेंदबाजों के सधे हुए आक्रमण के आगे 197 रनों पर सिमट गई। भारत की तरफ से बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी ने अपने वनडे करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। श्री चरणी ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए महज 23 रन खर्च किए और जिम्बाब्वे के 4 महत्वपूर्ण बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया।
श्री चरणी के अलावा तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने भी शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन किया और 3 विकेट चटकाकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। जिम्बाब्वे की पूरी पारी में सिर्फ बिलव्ड बीजा ही भारतीय गेंदबाजों का डटकर मुकाबला कर सकीं। बिलव्ड बीजा ने 62 रनों की संघर्षपूर्ण अर्धशतकीय पारी खेली, लेकिन दूसरे छोर से किसी अन्य बल्लेबाज का सहारा न मिलने की वजह से पूरी टीम 197 के स्कोर पर ही सिमट गई।



















