अजमेर जिले के हरिभाऊ उपाध्याय नगर थाना क्षेत्र में हुई भारी भरकम नकदी की वारदात में कानून के हाथ आखिरकार 9 महीने बाद मुख्य आरोपी तक पहुंच गए हैं। जिला स्पेशल पुलिस टीम ने ज्ञान विहार इलाके में वाहन के ट्रंक से 46 लाख रुपये पार करने के मामले में नामजद 7,500 रुपये के इनामी बदमाश देवराज उर्फ देवा गुर्जर को धर दबोचा है। घूघरा गांव के रहने वाले इस शातिर आरोपी को पुलिस ने उसी के गांव में स्थित एक सैलून से गिरफ्तार किया। फिलहाल पुलिस हिरासत में लेकर उससे गहन पूछताछ कर रही है ताकि वारदात से जुड़ी अन्य कड़ियों और पैसों की बरामदगी के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की जा सके।
400 सीसीटीवी कैमरों के विश्लेषण से बेनकाब हुई थी 7 लोगों की गैंग
अजमेर के ज्ञान विहार क्षेत्र में 21 दिसंबर 2025 को अपराधियों ने एक खड़ी कार की डिग्गी का लॉक तोड़कर उसमें रखे 46 लाख रुपये की मोटी रकम पर हाथ साफ कर दिया था। इतनी बड़ी रकम की डकैती की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और मामले की जांच प्राथमिकता के आधार पर शुरू की गई। जांच अधिकारियों ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में स्थापित लगभग 400 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का बारीकी से निरीक्षण किया। वीडियो फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि इस पूरी साजिश में कुल सात लोग शामिल थे।
चार साथी पहले पकड़े गए, चार शहरों में छिपता फिरा इनामी बदमाश
मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने शुरुआती दौर में ही कार्रवाई करते हुए गिरोह के चार सदस्यों दीपक गुर्जर, राहुल गुर्जर, रोहित चिंटा तथा अजय को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया था। लेकिन वारदात का मुख्य किरदार देवराज उर्फ देवा गुर्जर लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पंजाब और राजस्थान के अलग-अलग जिलों को अपना ठिकाना बनाया। वह भीलवाड़ा, डबवाली, अबोहर और फिरोजपुर जैसी जगहों पर अपनी पहचान बदलकर रुकता रहा। आरोपी की लगातार फरारी को देखते हुए अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अग्रवाला ने गत 20 जुलाई को उस पर 7,500 रुपये के नकद इनाम का ऐलान किया था, जिसके बाद पुलिस ने उस पर शिकंजा कसने के लिए विशेष अभियान चलाया।
सैलून में बाल कटवाने के दौरान सटीक मुखबिरी पर हुई कार्रवाई
इनामी बदमाश की तलाश में जुटी जिला स्पेशल पुलिस टीम के प्रमुख शंकर सिंह रावत को 20 अगस्त के दिन एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई। मुखबिर ने पक्की खबर दी कि लंबे समय से फरार चल रहा देवराज अपने पैतृक गांव घूघरा में आया हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए गांव में घेराबंदी की और वहां बने एक सैलून पर अचानक रेड मार दी। दुकान के अंदर बैठा देवराज पुलिस को देखकर संभल भी नहीं पाया और टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस वांछित आरोपी की धरपकड़ से केस की गुत्थी सुलझाने में बड़ी कामयाबी मिली है। हालांकि इस वारदात में शामिल दो अन्य सहयोगी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस की अलग-अलग टीमें उनके संभावित छिपने के स्थानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं और दावा किया जा रहा है कि बचे हुए दोनों आरोपियों को भी बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।



















