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दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप, दिल के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा H1N1 वायरसस्वास्थ्य
22 अग॰ 2026, 10:03 am (1 घंटे पहले)· 3

दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप, दिल के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा H1N1 वायरस

दिल्ली-एनसीआर में H1N1 स्वाइन फ्लू के मामलों में इस साल भारी उछाल आया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस केवल फेफड़ों ही नहीं, बल्कि दिल की सेहत पर भी गंभीर असर डाल सकता है।

यदि आपका निवास दिल्ली या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में है, तो आपको स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। पिछले वर्ष की तुलना में स्वाइन फ्लू का संक्रमण इस बार अत्यधिक तीव्र गति से पांव पसार रहा है। वर्ष 2025 में जुलाई और अगस्त के महीनों तक स्वाइन फ्लू के केवल 229 मामले सामने आए थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 1777 तक पहुंच चुका है, जो लगभग छह गुना अधिक है। यद्यपि H1N1 यानी स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से एक श्वसन संबंधी विकार है जो नाक, गले और फेफड़ों को अपनी चपेट में लेता है, लेकिन संक्रमण गंभीर होने की स्थिति में यह शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

दिल की सेहत पर H1N1 का प्रभाव

इंद्रप्रस्थ स्थित अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर गौतम नाइक के अनुसार, कुछ मामलों में H1N1 का संक्रमण हृदय पर अत्यधिक दबाव पैदा कर रहा है। यह बीमारी पहले से चली आ रही हृदय संबंधी बीमारियों को और अधिक खतरनाक बना सकती है। ऐसे में जिन व्यक्तियों को पूर्व में दिल की बीमारी, उच्च रक्तचाप या हृदय से जुड़े अन्य जोखिम हैं, उनके लिए अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है। दुर्लभ मामलों में यह संक्रमण हृदय की मांसपेशियों में सूजन की वजह भी बन सकता है, इसलिए इसके लक्षणों की समय पर पहचान करना अति आवश्यक है।

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किस प्रकार हृदय को प्रभावित करता है वायरस

चिकित्सक विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लू का यह संक्रमण शरीर के भीतर सूजन की प्रक्रिया को तीव्र कर देता है। इसके परिणामस्वरूप हृदय की गति तेज हो जाती है और दिल पर कार्यभार काफी बढ़ जाता है। अत्यधिक बुखार, शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन और ऑक्सीजन का स्तर कम होना इस दबाव को और अधिक बढ़ा देते हैं। जिन लोगों की रक्त वाहिकाओं में पहले से कोई समस्या मौजूद होती है, उनमें संक्रमण के कारण सूजन बढ़ने पर दिल का दौरा पड़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

मायोकार्डाइटिस और अन्य जटिलताएं

कुछ विशेष और दुर्लभ परिस्थितियों में यह वायरस हृदय की मांसपेशियों में सूजन पैदा कर देता है, जिसे मायोकार्डाइटिस के नाम से जाना जाता है। इस चिकित्सा स्थिति के कारण दिल की रक्त पंप करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और दिल की धड़कनें अनियमित हो सकती हैं। अत्यंत गंभीर अवस्था में यह समस्या हृदय की विफलता यानी हार्ट फेलियर का कारण भी बन सकती है, जो मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

किन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

स्वाइन फ्लू के संक्रमण के दौरान यदि सीने में दर्द या भारीपन महसूस हो, सांस लेने में कठिनाई हो, दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो जाए, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, चक्कर आए या अचानक पसीना आने लगे, तो इन्हें सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। विशेष तौर पर जिन लोगों को पहले से हृदय रोग है, उन्हें ऐसे संकेत मिलते ही बिना किसी देरी के चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

किन्हें बरतनी चाहिए विशेष सतर्कता

बुजुर्ग नागरिकों, हृदय रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों में फ्लू की जटिलताएं उत्पन्न होने का जोखिम काफी अधिक होता है। ऐसे संवेदनशील लोगों को संक्रमण की अवधि के दौरान भरपूर विश्राम करना चाहिए, शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए और डॉक्टर के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।

सवाल-जवाब

इस साल दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू के कितने मामले सामने आए हैं?
इस साल 1777 मामले मिले हैं, जो पिछले साल जुलाई-अगस्त तक के 229 मामलों से लगभग 6 गुना ज्यादा हैं।
H1N1 वायरस शरीर के किस मुख्य हिस्से को प्रभावित करता है?
यह मुख्य रूप से नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन गंभीर स्थिति में दिल जैसे अन्य अंगों पर भी असर डाल सकता है।
H1N1 संक्रमण दिल को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है?
यह संक्रमण शरीर में सूजन बढ़ाता है, दिल की धड़कन तेज करता है और दुर्लभ मामलों में मायोकार्डाइटिस जैसी समस्या पैदा कर सकता है।
स्वाइन फ्लू के दौरान किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए?
सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, तेज धड़कन, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना या अचानक पसीना आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
किन्हें स्वाइन फ्लू के दौरान सबसे ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए?
बुजुर्गों, दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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