कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के वजारहल्ली इलाके में एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ 40 वर्षीय एक महिला पर अपनी महज 4 महीने की जुड़वां बच्चियों की कथित तौर पर जान लेने और उसके बाद खुद भी जीवन समाप्त करने की कोशिश का आरोप लगा है। पुलिस प्रशासन ने आरोपी महिला के खिलाफ हत्या की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और पूरे घटनाक्रम की गहराई से तफ्तीश की जा रही है। पीड़ित परिवार में इस घटना के बाद से गहरा मातम छाया हुआ है, जबकि प्राथमिक जांच में इस खौफनाक कदम के पीछे प्रसवोत्तर अवसाद यानी पोस्टपार्टम डिप्रेशन और गंभीर हार्मोनल असंतुलन को मुख्य वजह माना जा रहा है।
अस्पताल में डॉक्टरों ने बताई डूबने से मौत की आशंका
यह दुखद हादसा बीते मंगलवार, 1 सितंबर की दोपहर को वजारहल्ली स्थित मकान में घटित हुआ। मामले का खुलासा तब हुआ जब महिला के पति रामलिंगप्पा दोपहर के समय काम से घर वापस लौटे। उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी उमा देवी ने खुद को अंदर से एक कमरे में बंद कर रखा है। काफी आवाज देने के बाद भी जब भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्होंने दरवाजा खोला। कमरे के अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए, जहाँ उनकी पत्नी दुपट्टे के सहारे फांसी लगाकर जान देने का प्रयास कर रही थी। रामलिंगप्पा ने तत्परता दिखाते हुए उमा देवी को तुरंत फंदे से नीचे उतारा और उनकी जान बचाई।
उसी कमरे में बिस्तर पर उनकी 4 महीने की दोनों जुड़वां बच्चियां बेसुध पड़ी हुई थीं। आनन-फानन में बच्चियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने परीक्षण के पश्चात दोनों नवजात शिशुओं को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के डॉक्टरों ने शुरुआती चिकित्सा जांच के आधार पर आशंका जताई है कि बच्चियों की मृत्यु पानी में डूबने के कारण हुई है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय तालाघट्टापुरा थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुँची और शवों को कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई शुरू की।
लंबे इंतजार और IVF उपचार के बाद हुआ था बच्चियों का जन्म
पुलिस को सौंपी गई आधिकारिक शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता रामलिंगप्पा का विवाह वर्ष 2002 में उमा देवी के साथ संपन्न हुआ था। शादी के कई वर्षों बाद तक दंपति की कोई संतान नहीं थी, लेकिन दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य और खुशहाल चल रहा था। संतान सुख प्राप्त करने के लिए दंपति ने चिकित्सकीय परामर्श लेकर IVF उपचार की मदद ली। इस विशेष चिकित्सा प्रक्रिया के सफल होने के बाद उमा देवी गर्भवती हुईं और 5 मई 2026 को उन्होंने दो स्वस्थ जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। लंबे इंतजार के बाद घर में आई इन खुशियों से पूरा परिवार बेहद प्रसन्न था।
रामलिंगप्पा पेशे से रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और वह अपने परिवार में पत्नी उमा देवी, अपनी वृद्धा माता तथा दोनों नवजात बच्चियों के साथ वजारहल्ली स्थित आवास में रहते थे। करीब दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद मिली इस दोहरी खुशी ने परिवार को नई उम्मीद दी थी, परंतु जन्म के कुछ ही हफ्तों बाद परिस्थितियों ने ऐसा रूप ले लिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने और व्यवहार बदलने की कहानी
पति द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत विवरण के अनुसार, बच्चियों के जन्म के लगभग डेढ़ महीने बाद ही उमा देवी के व्यवहार में अजीबोगरीब बदलाव नजर आने लगे थे। उनकी अपनी नवजात बच्चियों में रुचि धीरे-धीरे कम होने लगी थी और वह अक्सर असामान्य बातें करने लगी थीं। वह बार-बार परिवार के सदस्यों से यह जिद करती थीं कि दोनों बच्चियों को किसी आश्रम में दाखिल करा देना चाहिए। उनका यह व्यवहार देखकर परिवार वाले काफी चिंतित हो गए और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
चिकित्सकों ने उमा देवी के मानसिक स्वास्थ्य का विस्तृत परीक्षण करने के बाद परिजनों को सूचित किया कि वह डिलीवरी के बाद होने वाले गंभीर प्रसवोत्तर अवसाद और शरीर में तीव्र हार्मोनल बदलावों से जूझ रही हैं। डॉक्टरों ने उन्हें नियमित निगरानी और दवाइयों की सलाह दी थी। हालाँकि, 1 सितंबर की दोपहर जब घर पर पति की अनुपस्थिति में उमा देवी अपनी सास और बच्चियों के साथ थीं, तब उन्होंने कमरे को अंदर से बंद करके इस आत्मघाती कदम को अंजाम दे दिया।
पुलिस की विधिक कार्रवाई और BNS की धारा 103 में मामला दर्ज
घटना के बाद तालाघट्टापुरा थाना पुलिस ने पति रामलिंगप्पा की शिकायत के आधार पर आरोपी उमा देवी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 103 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी महिला का इलाज कराया जा रहा है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीक जांच की जा रही है। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं ताकि मौतों के सटीक कारणों और समय का पुख्ता पता लगाया जा सके।



















