राजधानी दिल्ली के तमाम व्यस्त इलाकों में स्थित होटलों और गेस्ट हाउसों की सघन जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों की कड़ी पड़ताल शुरू की। यह कार्रवाई किसी आम औचक निरीक्षण का हिस्सा नहीं थी, बल्कि दिल्ली पुलिस द्वारा विशेष तौर पर चलाए जा रहे ऑपरेशन विस्टा 1.0 का एक अहम चरण थी। इस वृहद अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों के वीजा की वैधता और उनके ठहरने के कानूनी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करना था, ताकि नियमों को ताक पर रखकर देश में रह रहे लोगों की पहचान की जा सके। इसी सिलसिले में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान दो बांग्लादेशी नागरिक पुलिस के हत्थे चढ़ गए, जो अवैध रूप से यहां टिके हुए थे।
होटलों में तलाशी के दौरान पकड़े गए संदिग्ध
जांच दल ने अपनी कार्रवाई की शुरुआत अराकाशन रोड पर स्थित नबी करीम इलाके के एक होटल से की, जहां दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान जोमिर हुसैन नामक एक व्यक्ति पुलिस के सामने आया। छब्बीस वर्षीय जोमिर हुसैन मूल रूप से बांग्लादेश का रहने वाला है और उसके यात्रा दस्तावेजों की जब गहराई से छानबीन की गई, तो यह तथ्य सामने आया कि वह नौ जुलाई 2026 को भारत आया था। इसके तुरंत बाद, पुलिस दस्ते ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए पहाड़गंज के चांदी वालान मेन बाजार स्थित एक अन्य होटल का रुख किया, जहां तलाशी के दौरान ढाका मूल की एक महिला मक्सूदा अख्तर पुलिस की पकड़ में आ गई।
वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद टिके थे दोनों
होटल के कमरों की तलाशी और कागजातों के मिलान से यह खुलासा हुआ कि मक्सूदा अख्तर सत्ताईस जुलाई 2026 को भारत में दाखिल हुई थी। जब दोनों के पासपोर्ट और वीजा दस्तावेजों की तकनीकी जांच की गई, तो यह बात सामने आई कि वे दोनों डबल-एंट्री वीजा के जरिए देश में आए थे। नियमों के अनुसार, इस श्रेणी के वीजा की शर्तों के तहत प्रत्येक यात्रा के दौरान भारत में अधिकतम पंद्रह दिनों तक रुकने की अनुमति दी जाती है। हालांकि, यात्रा की तारीखों और उनके दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन से यह साफ हो गया कि दोनों ही व्यक्ति निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से भारत में ही निवास कर रहे थे।
अधिकारियों की निगरानी में हुई कानूनी कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई पुलिस महकमे के वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देशों के तहत अंजाम दी गई, जिसमें इंस्पेक्टर संदीप यादव ने दल का नेतृत्व किया और एसीपी ऑपरेशंस पदम सिंह राणा ने पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। संदिग्धों से गहन पूछताछ करने के बाद पुलिस टीम ने उनके सभी कागजातों का आधिकारिक सत्यापन पूरा किया और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए उन्हें फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के समक्ष पेश किया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआरआरओ ने सभी पहलुओं की जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर रिस्ट्रिक्शन ऑर्डर जारी कर दिया है।
डिटेंशन सेंटर भेजे गए दोनों विदेशी नागरिक
कार्यालय से आदेश मिलने के बाद पुलिस ने जोमिर हुसैन और मक्सूदा अख्तर को सराय रोहिल्ला इलाके में स्थित सेवा धाम डिटेंशन सेंटर में कड़ी सुरक्षा के बीच भेज दिया। अब इन दोनों को उनके स्वदेश भेजने यानी निर्वासन से जुड़ी तमाम कानूनी प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं के पूरा होने तक इसी हिरासत केंद्र में रखा जाएगा, जहां से उन्हें डिपोर्ट किया जाएगा।



















