उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा के रेलवे स्टेशन पर 5 अगस्त के दिन उस समय हड़कंप मच गया, जब तमिलनाडु एक्सप्रेस के एक जनरल कोच में पड़े लावारिस सूटकेस से उठती तेज दुर्गंध ने यात्रियों का ध्यान अपनी ओर खींचा. ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को जैसे ही किसी अनहोनी का संदेह हुआ, उन्होंने बिना समय गंवाए रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को मामले की जानकारी दी. मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब लाल रंग के उस संदिग्ध ट्रॉली बैग का ताला तोड़कर उसे खोला, तो अंदर का खौफनाक नजारा देखकर अनुभवी पुलिस अधिकारी भी सन्न रह गए. बैग के भीतर एक अज्ञात महिला का क्षत-विक्षत शव ठूंसा गया था. शव का सिर धड़ से पूरी तरह गायब था, उसके बाल कटे हुए थे और शरीर के अंगों को नृशंसतापूर्वक टुकड़ों में काटा गया था. इस दिल दहला देने वाली खोज ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी और इसके साथ ही एक बेहद जटिल हत्याकांड की जांच का आगाज हुआ, जिसने पुलिस को 350 से अधिक CCTV कैमरों का सुराग तलाशते हुए 2,000 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर तक पहुंचा दिया.
लावारिस बैग, बेनाम लाश और शुरुआती जांच की चुनौतियां
आगरा रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मिले सूटकेस ने पुलिस के सामने सवालों का पहाड़ खड़ा कर दिया. सबसे प्राथमिक सवाल यह था कि आखिरकार यह मृतक महिला कौन है, उसकी हत्या कहां और किस प्रकार की गई, और इतनी दूर तक सफर करने वाली तमिलनाडु एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे में इस भारी-भरकम ट्रॉली बैग को किसने और किस रेलवे स्टेशन पर रखा? चूंकि आगरा में मिली लाश से तुरंत कोई ऐसा सुराग नहीं मिल सका जो सीधे हत्यारों तक ले जाता, इसलिए पुलिस ने एक अत्यंत दूरदर्शी रणनीति अपनाई. जांच अधिकारियों ने फैसला किया कि केवल मृतका के संभावित संपर्कों को तलाशने के बजाय, उस लाल सूटकेस की शुरुआती यात्रा के पूरे रास्ते को डिजिटल और भौतिक माध्यमों से बैक-ट्रैक किया जाएगा. पुलिस का यही रणनीतिक निर्णय आगे चलकर इस गुत्थी को सुलझाने की दिशा में सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ साबित हुआ.
ओडिशा की रहने वाली हयातुन निशा के रूप में हुई पहचान
मामले की गंभीरता को देखते हुए जीआरपी और स्थानीय पुलिस की कई टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं. एक तरफ जहां फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने शव के अवशेषों का गहन परीक्षण शुरू किया, वहीं दूसरी तरफ लापता महिलाओं के रिकॉर्ड्स को खंगाला गया. लगातार प्रयास और अंतरराज्यीय सूचनाओं के आदान-प्रदान के बाद पुलिस आखिरकार मृतका की पहचान स्थापित करने में सफल रही. मृतका की पहचान 38 वर्षीय हयातुन निशा के रूप में हुई, जो मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली थी. हयातुन निशा पिछले कुछ समय से तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के बाहरी इलाके गुडुवनचेरी में किराए का मकान लेकर रह रही थी और वहीं एक निजी कंपनी में कार्यरत थी. पहचान उजागर होते ही पुलिस की जांच का केंद्र बिंदु आगरा से स्थानांतरित होकर तमिलनाडु के चेन्नई और गुडुवनचेरी क्षेत्रों में केंद्रित हो गया.
350 से ज्यादा CCTV कैमरों का विस्तृत डिजिटल विश्लेषण
हत्यारों का पता लगाने के लिए पुलिस ने चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर स्थापित CCTV कैमरों का व्यापक ऑडिट शुरू किया. जांच टीम के सदस्यों ने दिन-रात एक करके स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्मों और प्रवेश-निकास द्वारों पर लगे 350 से अधिक कैमरों की सैकड़ों घंटों की रिकॉर्डिंग का अत्यधिक बारीकी से विश्लेषण किया. इस मैराथन फुटेज समीक्षा के दौरान पुलिस को वह महत्वपूर्ण सुराग मिल ही गया, जिसकी उन्हें तलाश थी. फुटेज में एक नवयुवक और एक महिला एक बड़े लाल रंग के ट्रॉली बैग को खींचते हुए दिखाई दिए. फुटेज में स्पष्ट हुआ कि दोनों ने उस सूटकेस को नई दिल्ली की ओर जाने वाली तमिलनाडु एक्सप्रेस के जनरल कोच के भीतर रख दिया. हालांकि, ट्रेन में सवार होकर यात्रा करने के बजाय, दोनों संदिग्ध बैग छोड़कर तुरंत प्लेटफॉर्म से बाहर निकल गए.
इसके बाद पुलिस ने स्टेशन से बाहर निकलने वाले मार्ग पर लगे कैमरों की मदद से दोनों संदिग्धों के कदमों का पीछा करना शुरू किया. डिजिटल सर्विलांस ने दिखाया कि दोनों पैदल चलकर पास के पार्क स्टेशन पहुंचे. वहां से उन्होंने चेन्नई सबअर्बन नेटवर्क की एक EMU ट्रेन पकड़ी और गुडुवनचेरी स्टेशन पर उतरे. गुडुवनचेरी स्टेशन से बाहर आकर दोनों ने एक स्थानीय ऑटो-रिक्शा लिया और आगे के रास्ते पर बढ़ गए. इस सुराग को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीम ने गुडुवनचेरी और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में सड़कों, दुकानों और चौराहों पर लगे 200 से अधिक अतिरिक्त कैमरों की फुटेज खंगाली. कैमरों की इस लंबी और अटूट श्रृंखला का पीछा करते हुए पुलिस आखिरकार उस सटीक किराए के मकान तक पहुंचने में कामयाब हो गई, जहां दोनों संदिग्ध ठहरे हुए थे.
बंद मकान का ताला टूटा और मिले मानव अवशेष
जब पुलिस की विशेष जांच टीम गुडुवनचेरी स्थित उस लक्षित मकान पर पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा था और मुख्य दरवाजे पर बाहर से ताला लटका हुआ था. स्थानीय पड़ोसियों से पूछताछ के बाद जब कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, तो पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया. घर के भीतर तलाशी के दौरान रसोई घर में एक भयावह नजारा देखने को मिला. रसोई में रखे एक बड़े खाना पकाने वाले बर्तन (पतीले) के अंदर से मानव शरीर के अन्य कटे हुए अवशेष बरामद किए गए. फॉरेंसिक टीम ने तुरंत उन अवशेषों को जब्त कर लिया. पुलिस को पूरा संदेह था कि ये अवशेष हयातुन निशा के शरीर के ही बाकी हिस्से हैं, जिन्हें सूटकेस में जगह न मिलने के कारण वहीं छोड़ दिया गया था.
आस-पास के लोगों से की गई गहन पूछताछ में पुलिस को पता चला कि इस किराए के मकान में एक पुरुष और दो महिलाएं साथ रह रहे थे. आगरा में मिले लावारिस लाल सूटकेस की डिजिटल कड़ी अब सीधे उस मकान तक पहुंच चुकी थी, जहां इस भयानक हत्याकांड को अंजाम दिया गया था. जांच के दौरान मकान में रहने वाले मुख्य संदिग्धों के नाम 22 वर्षीय माणिक उद्दीन लश्कर और उसकी पत्नी भगवती माझी के रूप में सामने आए. हालांकि, जब तक पुलिस वहां पहुंची, दोनों संदिग्ध अपना सामान छोड़कर वहां से गायब हो चुके थे.
2,000 किलोमीटर दूर मणिपुर में स्पेशल ऑपरेशन और गिरफ्तारी
फरार पति-पत्नी को पकड़ने के लिए पुलिस ने तकनीकी निगरानी का सहारा लिया. संदिग्धों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल फोन टावर लोकेशंस का वास्तविक समय में विश्लेषण शुरू किया गया. दोनों के फोन बंद आ रहे थे, लेकिन उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए अन्य संभावित संपर्कों और इलेक्ट्रॉनिक फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस की एक विशेष टीम ने उनका पीछा जारी रखा. सुरागों की कड़ी पुलिस को दक्षिण भारत से उत्तर-पूर्वी भारत की ओर ले गई. लगभग 2,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पुलिस की टीम मणिपुर राज्य के जिरीबाम जिले के काशीमपुर गांव में जा पहुंची.
29 अगस्त को तमिलनाडु पुलिस की टीम ने स्थानीय मणिपुर पुलिस के साथ एक संयुक्त और गोपनीय अभियान चलाया. काशीमपुर गांव में छिपे 22 वर्षीय माणिक उद्दीन लश्कर और उसकी पत्नी भगवती माझी को घेराबंदी करके सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर तमिलनाडु लाया गया और विस्तृत पूछताछ के लिए तांबरम पुलिस कमिश्नरेट के हवाले कर दिया गया, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे मैराथन पूछताछ शुरू की.
शादी का दबाव, हत्या की वजह और भयानक साजिश
तांबरम में हुई कड़ी पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी माणिक उद्दीन लश्कर ने हयातुन निशा की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया. पूछताछ में लश्कर ने खुलासा किया कि उसके और हयातुन निशा के बीच पिछले छह महीनों से प्रेम संबंध चल रहे थे. लश्कर पहले से शादीशुदा था, जबकि निशा उस पर लगातार कानूनी रूप से शादी करने का भारी दबाव बना रही थी. इसी बात को लेकर दोनों के बीच पिछले कुछ हफ्तों से लगातार झगड़े और तीखी बहस हो रही थी. घटना वाले दिन भी शादी के मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि लश्कर ने गुस्से में आकर निशा की हत्या कर दी.
हत्या को अंजाम देने के बाद लश्कर ने अपने अपराध को छिपाने और पहचान मिटाने के लिए एक बेहद क्रूर योजना बनाई. उसने तेज धारदार हथियार से निशा का सिर धड़ से अलग कर दिया, उसके सिर के बाल काट दिए और शव को कई हिस्सों में काट दिया. इसके बाद शरीर के कुछ हिस्सों को उसने एक लाल रंग के ट्रॉली बैग में भरा. इसके बाद लश्कर और उसकी पत्नी भगवती माझी उस भारी बैग को लेकर चेन्नई सेंट्रल पहुंचे और उसे दिल्ली जाने वाली तमिलनाडु एक्सप्रेस के जनरल कोच में छोड़कर फरार हो गए, ताकि शव सैकड़ों किलोमीटर दूर चला जाए और किसी को उन पर शक न हो. वहीं, शरीर के बाकी बचे अवशेषों को उन्होंने गुडुवनचेरी वाले मकान में ही खाना पकाने के बर्तन में छोड़ दिया था.
जांच में बने हुए अनसुलझे सवाल और कानूनी स्थिति
हालांकि पुलिस ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस केस में कई अहम कड़ियां अब भी अनसुलझी हैं. सबसे बड़ा सवाल मृतका हयातुन निशा के कटे हुए सिर की बरामदगी का है, जो खबर लिखे जाने तक पुलिस को नहीं मिल सका है. पुलिस की टीमें उस सिर को बरामद करने के लिए लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं. इसके अलावा, जांच का एक सबसे महत्वपूर्ण पहलू आरोपी की पत्नी भगवती माझी की वास्तविक भूमिका को तय करना है. पुलिस इस दिशा में जांच कर रही है कि क्या भगवती हत्या के समय कमरे में मौजूद थी, क्या उसने पहले से रची गई साजिश में हिस्सा लिया था, या फिर हत्या हो जाने के बाद केवल डर या दबाव में आकर अपने पति की मदद की और शव को ठिकाने लगाने में सह-आरोपी बनी. फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर फॉरेंसिक सबूत जुटाने और निशा के सिर का पता लगाने में जुटी हुई है.



















