राजस्थान के उदयपुर जिले में सायरा थाना क्षेत्र के पुनावली गांव में हुए दोहरे हत्याकांड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। 12 अगस्त से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता बुजुर्ग दंपती लहरीलाल पालीवाल और उनकी पत्नी राधाबाई के शव 14 अगस्त को उनके ही मकान के अंदर बंद पड़े लोहे के ट्रंक से बरामद किए गए थे। पुलिस की विशेष टीम ने जब इस खौफनाक वारदात की परतें उघेड़ीं तो हर कोई हैरान रह गया। इस पूरे हत्याकांड की पटकथा दंपती के अपने ही पड़ोसी कुशल उर्फ खुशी पालीवाल ने लिखी थी। भारी कर्ज के बोझ से दबे कुशल ने पैसों का इंतजाम करने के लिए अपने साथियों के साथ मिलकर करीब डेढ़ साल तक साजिश बुनी और फिर लूट की नीयत से बुजुर्ग दंपती की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी समेत पांचों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है।
लोहे के बक्से में प्लास्टिक की थैलियों में बंद मिले थे शव
पुलिस जांच के अनुसार पुनावली निवासी लहरीलाल पालीवाल और उनकी पत्नी राधाबाई अपने घर में अकेले रहते थे। 12 अगस्त के बाद से ही दोनों अचानक गायब हो गए। उनके परिजनों और पड़ोसियों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। 14 अगस्त की दोपहर को अचानक उनके बंद मकान से तेज दुर्गंध आने लगी। आसपास के लोगों ने इसकी सूचना सायरा थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घर का दरवाजा खोलकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
तलाशी के दौरान जब पुलिस कमरे में रखे एक बड़े लोहे के बक्से के पास पहुंची तो वहां से असहनीय बदबू आ रही थी। बक्से के ऊपर करीने से बिस्तर और गद्दे रखे गए थे ताकि किसी को संदेह न हो। जब पुलिस ने बक्से को खोला तो उसके अंदर का दृश्य खौफनाक था। दंपती के शवों को बड़ी-बड़ी प्लास्टिक की थैलियों में ठूंसकर रखा गया था और उन्हें मजबूत चिपकने वाले टेप से पूरी तरह सील कर दिया गया था। हत्यारों ने शवों को छिपाने की हर संभव कोशिश की थी ताकि मामला कई दिनों तक सामने न आ सके।
जन्मपत्री दिखाने के बहाने घर में घुसे थे आरोपी
उदयपुर की पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के मार्गदर्शन में शुरू हुई जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी कुशल उर्फ खुशी पालीवाल का घर बुजुर्ग दंपती के मकान के ठीक पास था। पड़ोसी होने के कारण कुशल को दंपती की दिनचर्या की बारीक से बारीक जानकारी थी। उसे मालूम था कि लहरीलाल गांव व आसपास के लोगों को जरूरत पड़ने पर पैसे उधार दिया करते थे, जिसके चलते घर में अक्सर नकदी और कीमती आभूषण रखे रहते थे। कर्ज से परेशान कुशल ने इसी जानकारी का फायदा उठाकर करीब 18 महीने पहले ही लूटपाट का खाका तैयार कर लिया था।
वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने 11 अगस्त की रात का समय चुना। योजना के मुताबिक आरोपी किशन पालीवाल और जीवन पालीवाल लहरीलाल के घर पहुंचे। उन्होंने बुजुर्ग दंपती को अपनी बातों में उलझाने के लिए जन्मपत्री दिखाने का बहाना बनाया। बातचीत के दौरान साजिश के तहत आरोपियों ने घर का मुख्य दरवाजा आधा खुला छोड़ दिया। इसी बीच बाहर घात लगाकर बैठा मुख्य साजिशकर्ता कुशल पालीवाल चुपके से घर के भीतर दाखिल हो गया और बिना किसी की नजर में आए बाथरूम में जाकर छिप गया।
हथौड़ी से हमला और गला घोंटकर की गई बेरहम हत्या
रात काफी बढ़ जाने पर जब लहरीलाल और राधाबाई को अपनी बातों में फंसाकर किशन और जीवन वहां से चले गए और बुजुर्ग दंपती अपने कमरे में सो गए, तब बाथरूम में छिपे कुशल ने योजना के अगले चरण को सक्रिय किया। उसने तुरंत अपने अन्य सहयोगियों चंदन यादव, दिलीप चौधरी और विकास को फोन करके घर के अंदर बुला लिया। सभी आरोपी पूरी रात मकान के भीतर ही डटे रहे और वारदात का मुफीद मौका तलाशते रहे।
तड़के के वक्त जब लहरीलाल गहरी नींद में सो रहे थे, तब कुशल ने उनके सिर पर भारी हथौड़ी से ताबड़तोड़ वार कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण लहरीलाल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने राधाबाई के जागने का इंतजार किया। जैसे ही अलसुबह राधाबाई की आंख खुली और वे कमरे से बाहर निकलीं, आरोपी चंदन यादव ने झपटकर उनका मुंह कसकर दबा दिया ताकि वे चीख न सकें। इसी दौरान कुशल ने उनका गला घोंटकर हत्या कर दी। दोनों की जान लेने के बाद आरोपियों ने पूरे घर में अलमारियों और संदूकों की तलाशी ली और वहां मौजूद सारी नकदी व सोने-चांदी के जेवरात समेट लिए।
पुलिस को चकमा देने के लिए बिछाया था मोबाइल का जाल
हत्या और लूटपाट की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने साक्ष्यों को मिटाने और पुलिस जांच को भटकाने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया। उन्होंने दंपती के शवों को प्लास्टिक की थैलियों में बांधकर बक्से में बंद किया और ऊपर बिस्तर बिछा दिया। इसके बाद आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए एक समानांतर साजिश रची। आरोपियों ने अपने नियमित इस्तेमाल वाले मोबाइल फोनों को एक गाड़ी में रख दिया और उस गाड़ी को अलग-अलग इलाकों में घुमाते रहे ताकि उनकी मोबाइल लोकेशन वारदात स्थल से काफी दूर दिखाई दे।
वहीं दूसरी ओर, वारदात को अंजाम देने के दौरान आरोपियों ने केवल नए और अलग मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया था। इतना ही नहीं, लूटपाट के बाद आरोपियों ने मृतक लहरीलाल और राधाबाई के मोबाइल फोन भी अपने साथ ले लिए और उन्हें चालू हालत में ही हाईवे की तरफ फेंक दिया। उनका मकसद था कि पुलिस जब दंपती के मोबाइल की लास्ट लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालेगी, तो जांच हाईवे की दिशा में भटक जाएगी और आरोपियों तक पुलिस का ध्यान नहीं जाएगा।
ब्लू कलर की कार और सीसीटीवी फुटेज से सुलझी हत्या की गुत्थी
शातिर साजिश के बावजूद पुलिस की तकनीकी और सर्विलांस टीम ने मामले की हर बारीक कड़ी को जोड़ना शुरू किया। जांच के दौरान पुनावली गांव और आसपास के मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इस दौरान एक नीले रंग की ग्रैंड विटारा कार की संदिग्ध आवाजाही पुलिस की नजर में आई। पुलिस ने कार के नंबर, मोबाइल टावर लोकेशन और संदिग्धों की गतिविधियों का मिलान किया, जिससे आरोपी पुलिस के रडार पर आ गए।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सायरा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांचों प्रमुख आरोपियों कुशल उर्फ खुशी पालीवाल, चंदन यादव, दिलीप चौधरी, किशन पालीवाल और जीवन पालीवाल को धर दबोचा। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई नीले रंग की ग्रैंड विटारा कार को भी जब्त कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और लूटी गई नकदी व सोने-चांदी के जेवरों की शत-प्रतिशत बरामदगी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस गहरी साजिश में गांव या बाहर का कोई अन्य व्यक्ति तो शामिल नहीं था।



















