दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गत 7 सितंबर के एक मामले में कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों प्रीतपाल सिंह, हरमिंदर सिंह और निरंजन सिंह को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में दिल्ली के स्पेशल सेल थाने में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS-2023 की धारा 152, 196, 197 और 61 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी प्रीतपाल सिंह से लगातार पूछताछ की जा रही है, जिससे उसकी कथित खालिस्तान समर्थक गतिविधियों में संलिप्तता की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां उसके पुराने आपराधिक इतिहास और जेल के भीतर बने संपर्कों की भी गहराई से छानबीन कर रही हैं ताकि इस नेटवर्क का पूरा दायरा स्पष्ट हो सके।
साल 2023 में भी UAPA के तहत हुई थी गिरफ्तारी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी प्रीतपाल सिंह का पुराना आपराधिक ट्रैक रिकॉर्ड रहा है और उसका संबंध पहले भी खालिस्तान समर्थक गतिविधियों से रहा है। वर्ष 2023 में उसे सख्त कानून UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस समय उस पर दिल्ली मेट्रो स्टेशनों की दीवारों और परिसरों को कथित रूप से आपत्तिजनक नारों से रंगने और माहौल बिगाड़ने का गंभीर आरोप था। उस मामले में कानूनी कार्रवाई के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और वह पटियाला जेल में अपनी सजा काट रहा था।
पटियाला जेल में हुई हरमिंदर से मुलाकात
पुलिस पूछताछ में यह अहम तथ्य सामने आया है कि पटियाला जेल में कैद के दौरान ही प्रीतपाल सिंह की मुलाकात हरमिंदर सिंह से हुई थी। जेल की चारदीवारी के भीतर ही दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। पुलिस का यह दावा है कि जेल की अवधि के दौरान ही प्रीतपाल के संपर्कों का दायरा बढ़ा और हरमन नाम के एक जेल लिंक के माध्यम से उसका संपर्क पन्नू तक जा पहुंचा।
जेल से बाहर आने के बाद सिग्नल ऐप पर हुआ सीधा संपर्क
जांच अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2026 में जेल से रिहा होने के बाद प्रीतपाल सिंह ने सीधे तौर पर पन्नू से संवाद करना शुरू कर दिया था। पुलिस की छानबीन में यह बात भी सामने आई है कि दोनों के बीच गोपनीय बातचीत और दिशा-निर्देशों के आदान-प्रदान के लिए सिग्नल ऐप का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस का कहना है कि पन्नू की तरफ से ही प्रीतपाल को विभिन्न निर्देश दिए जाते थे और इन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उसे वित्तीय मदद यानी फंडिंग भी मुहैया कराई जाती थी।
डेड ड्रॉप के जरिए पहुंचाई जाती थी रकम
पुलिस की जांच में पैसों के लेन-देन को लेकर एक नया तरीका सामने आया है जिसके तहत कथित तौर पर डेड-ड्रॉप प्रणाली का उपयोग किया जाता था। इस तरीके में फंडिंग की रकम सीधे किसी व्यक्ति को न देकर किसी पहले से तय और सुनसान जगह पर रख दी जाती थी, जहाँ से दूसरा व्यक्ति जाकर उसे ले लेता था। पुलिस के मुताबिक इसी प्रक्रिया के तहत प्रीतपाल सिंह ने फरीदकोट-अमृतसर रोड पर एक लाख पचास हजार रुपये की नगद राशि उठाई थी। अब जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इस तरीके से कुल कितनी बार और कितनी बड़ी रकम पहुंचाई गई तथा इस खेल में और कौन-कौन से चेहरे शामिल थे।
दिल्ली में ऑपरेशन के लिए पुराने साथी को मिलाया
पुलिस के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस कथित ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए प्रीतपाल सिंह ने अपने पुराने जेल के साथी हरमिंदर सिंह को इस साजिश में शामिल कर लिया। इसके एवज में हरमिंदर को कुल एक लाख पचास हजार रुपये देने का सौदा तय हुआ था। इस काम की शुरुआत करने के लिए प्रीतपाल ने हरमिंदर को सत्तर हजार रुपये की अग्रिम राशि यानी एडवांस के रूप में दिए। इसके बाद हरमिंदर सिंह ने अपने साथ एक अन्य शख्स निरंजन सिंह को भी इस आपराधिक कृत्य में शामिल कर लिया।
सिंघु बॉर्डर पर की गई रेकी और पन्नू के निर्देश
पुलिस के दस्तावेजों के मुताबिक 1 सितंबर 2026 को हरमिंदर सिंह और उसके सहयोगी निरंजन सिंह ने दिल्ली के सिंघु बॉर्डर इलाके का दौरा कर वहाँ की रेकी की थी। दोनों ने पूरे क्षेत्र का मुआयना किया और तीन संभावित स्थानों का चयन किया। जांच से यह भी खुलासा हुआ है कि इन चिन्हित जगहों पर बाद में देशविरोधी और राजनीतिक नारे लिखे जाने थे। पुलिस का यह दावा है कि इसके पश्चात पन्नू की ओर से सिग्नल ऐप के माध्यम से ही लिखने के लिए नारे भेजे गए थे। इन नारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध वाले नारे, ब्रिक्स संगठन के विरोध वाले नारे और एसएफजे के समर्थन वाले नारे प्रमुख रूप से शामिल थे। इसके बाद प्रीतपाल सिंह ने इन तमाम नारों को एक कागज़ की पर्ची पर अपने हाथ से लिखा। फिर यह पर्ची हरमिंदर सिंह को सौंप दी गई और उसे बाजार जाकर स्प्रे पेंट खरीदने के निर्देश दिए गए।
रातों-रात तीन जगहों पर लिखे गए नारे और बनाया गया वीडियो
पुलिस के अनुसार 6 सितंबर 2026 की रात को हरमिंदर सिंह और निरंजन सिंह ने उन चुनिंदा स्थानों पर जाकर स्प्रे पेंट के जरिए नारे लिख दिए। जिन परिसरों और इमारतों को इस हरकत के लिए निशाना बनाया गया उनमें सिंघु स्कूल, राजीव गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और उनके पास की एक अन्य इमारत शामिल थी। दोनों ने वहाँ पहुंचकर स्प्रे पेंट की मदद से दीवारों पर वे तमाम नारे पुते। पुलिस का यह भी कहना है कि इस पूरी वारदात को अंजाम देना ही उनका मकसद नहीं था, बल्कि इसके बाद हरमिंदर और निरंजन ने उन सभी जगहों का एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया। वीडियो बनाने के लिए जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया था, वह फोन खुद प्रीतपाल सिंह ने उन्हें उपलब्ध कराया था। इस वीडियो को तैयार करने का मुख्य उद्देश्य इसे सबूत के रूप में आगे भेजना था।
बठिंडा कोर्ट में हुई मुलाकात और बाकी रकम का भुगतान
पुलिस के खुलासे के मुताबिक इस पूरी गतिविधि को पूरा करने के बाद हरमिंदर सिंह सीधा बठिंडा कोर्ट पहुँचा जहाँ उसकी मुलाकात प्रीतपाल सिंह से हुई। हरमिंदर ने वह मोबाइल फोन वापस प्रीतपाल को सौंप दिया जिसमें वह वीडियो रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद तय समझौते के अनुसार हरमिंदर को बाकी बची हुई रकम का भुगतान किया गया। प्रीतपाल ने उसे अस्सी हजार रुपये और दिए, जिससे पहले दिए गए सत्तर हजार रुपये एडवांस और बाद के अस्सी हजार रुपये मिलकर कुल डेढ़ लाख रुपये पूरे हो गए। इसके बाद प्रीतपाल ने उस मोबाइल फोन में मौजूद वीडियो को सिग्नल ऐप के जरिए सीधे पन्नू के पास फॉरवर्ड कर दिया। अब पुलिस इस डिजिटल साक्ष्य और तकनीकी कड़ियों की गहनता से जाँच कर रही है कि यह वीडियो कब और किस अकाउंट से भेजा गया तथा आगे किन-किन लोगों के पास प्रसारित किया गया।



















