पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस हिरासत से फरार हुआ एक रोहिंग्या संदिग्ध अंततः प्रशासन के हाथ लग गया। राजगंज इलाके में बने एक हिरासत केंद्र से दीवार फांदकर भागे इस कैदी को ढूंढने में एक प्रशिक्षित श्वान की अहम भूमिका रही। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा तंत्र को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी और अंत में वन विभाग के विशेष कुत्ते की मदद से आरोपी को दबोच लिया गया।
शौचालय जाने के बहाने दिया चकमा
रविवार की सुबह आरोपी ने बड़ी चालाकी से सुरक्षाकर्मियों को चकमा दिया। वह शौचालय जाने के बहाने अपनी जगह से बाहर निकला और मौका मिलते ही हिरासत केंद्र की दीवार फांदकर पास की झाड़ियों में ओझल हो गया। काफी देर तक जब वह वापस नहीं लौटा तो सुरक्षा गार्डों को शक हुआ। उन्होंने जब तलाश शुरू की तो उसके फरार होने की बात सामने आई। इसके तुरंत बाद राजगंज पुलिस स्टेशन को इस घटना की सूचना दी गई और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
वन विभाग से मांगी गई थी मदद
फरार कैदी की तलाश में जुटी स्थानीय पुलिस ने जब सभी संभावित ठिकानों पर दबिश दी और कोई सुराग नहीं मिला, तब वन विभाग की सहायता लेने का निर्णय किया गया। मालबजार उप-जिला पुलिस प्रशासन ने जलपाईगुड़ी वन्यजीव विभाग से संपर्क साधकर एक प्रशिक्षित कुत्ते की मांग की। इसके बाद गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान से विशेष रूप से प्रशिक्षित श्वान ‘ऑरलैंडो’ को इस अभियान में शामिल होने के लिए मौके पर भेजा गया।
कपड़ों की गंध सूंघकर पहुंचा चाय बागान
अभियान में शामिल होने के बाद ‘ऑरलैंडो’ ने फरार युवक के कपड़ों की गंध को पकड़ा और उसी दिशा में आगे बढ़ना शुरू किया। प्रशिक्षित कुत्ते ने पुलिस बल का नेतृत्व करते हुए हिरासत केंद्र से लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय की। यह खोजबीन पनिकाउरी चौराहे के नजदीक स्थित एक विस्तृत चाय बागान तक पहुंची, जहां कुत्ता जाकर रुक गया। पुलिस दल ने जब उस बागान की गहन तलाशी ली, तो आरोपी वहीं छिपा हुआ मिला और उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया।
मियांमार का रहने वाला है आरोपी
पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहम्मद सोलेमान के रूप में हुई है, जो म्यांमार का निवासी बताया जा रहा है। उसे बीते 20 सितंबर को न्यू जलपाईगुड़ी क्षेत्र से चार लोगों के एक समूह के साथ गिरफ्तार किया गया था और रोहिंग्या होने के संदेह में राजगंज के इस हिरासत केंद्र में रखा गया था। जलपाईगुड़ी वन्यजीव विभाग के जिला सहायक वन अधिकारी राजीव डे ने इस सफल अभियान की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस की मांग पर उन्होंने अपना प्रशिक्षित कुत्ता भेजा था जिसने अपनी सटीक क्षमता से फरार कैदी को ढूंढ निकाला।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद से हिरासत केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। अधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि आखिर इतनी निगरानी के बावजूद आरोपी पुलिस को चकमा देकर दीवार फांदने में कैसे कामयाब हो गया। हालांकि इस बार वन विभाग का प्रशिक्षित कुत्ता पुलिस के लिए बेहद मददगार साबित हुआ, लेकिन भविष्य में ऐसी चूक न हो इसके लिए सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है।



















