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हैदराबाद एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला, मानव तस्करी में 8 बांग्लादेशियों समेत 9 को उम्रकैदअपराध
18 सित॰ 2026, 9:34 am (13 दिन पहले)· 2

हैदराबाद एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला, मानव तस्करी में 8 बांग्लादेशियों समेत 9 को उम्रकैद

हैदराबाद की एनआईए विशेष अदालत ने 2019 के मानव तस्करी मामले में 8 बांग्लादेशी नागरिकों सहित 9 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

मानव तस्करी से जुड़े एक गंभीर मामले में हैदराबाद की राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण यानी एनआईए विशेष अदालत ने बड़ा न्यायिक कदम उठाया है। अदालत ने इस अवैध रैकेट में शामिल 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिनमें 8 बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने सभी दोषियों पर कुल 1 लाख 37 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। यदि कोई दोषी इस जुर्माने की राशि अदा नहीं करता है, तो उसे 3 महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। यह पूरा मामला बांग्लादेशी महिलाओं को देश में अच्छी नौकरियों का झूठा लालच देकर लाने और फिर उनका अवैध रूप से शोषण करने से जुड़ा हुआ है।

साल 2019 के नेटवर्क और खुलासे

यह पूरा कानूनी मामला वर्ष 2019 के दौरान सक्रिय रहे एक बड़े मानव तस्करी सिंडिकेट से संबंधित है। केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए के अनुसार, ये आरोपी बांग्लादेशी महिलाओं को बेहतर वेतन और रोजगार का सब्जबाग दिखाकर अवैध रास्ते से भारत में दाखिल कराते थे। देश में लाने के बाद इन महिलाओं को उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन अनैतिक देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया जाता था। इस आपराधिक नेटवर्क की जड़े गहरी थीं, जिसका खुलासा पुलिस और जांच एजेंसियों की समय पर की गई कार्रवाई से हुआ था।

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वर्ष 2019 में महिलाओं का रेस्क्यू

सितंबर 2019 में तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद के पहाड़ी शरीफ थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक बड़ी छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जालपल्ली गांव में संचालित एक अवैध वेश्यालय से 3 बांग्लादेशी पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला था। इसके अतिरिक्त, बालापुर इलाके की महिमूद कॉलोनी में स्थित एक अन्य रिहाइशी मकान से एक और महिला को मुक्त कराया गया था। शुरुआती तौर पर इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी, जिसे बाद में एनआईए ने अपने हाथ में ले लिया।

जांच और कानूनी कार्रवाई का दायरा

तेलंगाना पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मूल मुकदमे को एनआईए ने अपने अधिकार क्षेत्र में लेते हुए 12 अक्टूबर 2019 को मामले को नए सिरे से अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया। इस मामले की गहन छानबीन के बाद, जांच एजेंसी ने 17 अक्टूबर 2020 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें आरोपियों की संलिप्तता का पूरा विवरण दिया गया था। इस चार्जशीट में आरोपियों को ए1 से ए12 तक नामांकित किया गया था, जिनमें से कुछ मुख्य आरोपी फरार भी बताए गए थे।

गिरफ्तारी और कानूनी धाराएं

जांच के दौरान वर्ष 2019 और 2020 के बीच आरोपियों को पश्चिम बंगाल और तेलंगाना समेत देश के विभिन्न हिस्सों से धर दबोचा गया था। इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, विदेशी अधिनियम 1946 और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की विभिन्न सख्त धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर अब अदालत ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

सजा पाने वाले मुख्य आरोपी

अदालत के इस फैसले के तहत उम्रकैद की सजा पाने वाले प्रमुख आरोपियों में मोहम्मद यूसुफ खान, इमामुल गाजी, सुरेश कुमार दास और मोहम्मद अब्दुल्ला मुंशी शामिल हैं। इन सभी की इस मानव तस्करी रैकेट में अलग-अलग भूमिकाएं थीं, जिन्हें अदालत ने अपने फैसले का आधार बनाया।

सवाल-जवाब

इस मामले में कुल कितने लोगों को सजा सुनाई गई है?
अदालत ने इस मामले में कुल 9 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
सजा पाने वाले दोषियों में कितने विदेशी नागरिक हैं?
सजा पाने वाले 9 दोषियों में से 8 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं।
दोषियों पर कुल कितने का जुर्माना लगाया गया है?
न्यायालय ने सभी दोषियों पर कुल 1 लाख 37 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह मामला किस वर्ष की घटना से जुड़ा है?
यह पूरा मामला वर्ष 2019 के मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
पीड़ित महिलाओं को किस शहर से रेस्क्यू किया गया था?
पीड़ित महिलाओं को हैदराबाद के पहाड़ी शरीफ और बालापुर थाना क्षेत्रों से रेस्क्यू किया गया था।
इस मामले की जांच किस केंद्रीय एजेंसी ने की थी?
इस मामले की विस्तृत जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण यानी एनआईए द्वारा की गई थी।
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