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इजरायल में नौकरी के नाम पर 3.7 लाख रुपये की ठगी, कंज्यूमर कमीशन ने दिया पूरे पैसे वापस करने और 2 लाख रुपये हर्जाने का आदेशअपराध
24 अग॰ 2026, 1:37 pm (38 दिन पहले)· 3

इजरायल में नौकरी के नाम पर 3.7 लाख रुपये की ठगी, कंज्यूमर कमीशन ने दिया पूरे पैसे वापस करने और 2 लाख रुपये हर्जाने का आदेश

केरल के जिला उपभोक्ता आयोग ने फर्जी नौकरी के वादे के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दो रिक्रूटर्स को एक दैनिक मजदूर के 3.7 लाख रुपये 9 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने और 2 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है।

विदेश में रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को झांसे में लेकर मोटी रकम ऐंठने वाले एजेंटों के खिलाफ केरल की एक जिला उपभोक्ता अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इजरायल में नौकरी दिलाने का झूठा भरोसा देकर एक व्यक्ति से लाखों रुपये हड़पने के मामले में दो रिक्रूटर्स को पूरी रकम ब्याज समेत वापस लौटाने का फरमान सुनाया है। इसके साथ ही पीड़ित को हुई मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए भारी-भरकम मुआवजा भी तय किया गया है।

इजरायल में नौकरी का झांसा और लाखों का भुगतान

यह पूरा मामला केरल के रहने वाले जोसेफ मैनुअल नाम के एक व्यक्ति से जुड़ा है, जो पेशे से एक दैनिक मजदूर हैं। वर्ष 2022 में जोसेफ ने विदेश में काम करके अपना जीवन स्तर सुधारने के मकसद से रेजी सी वर्की और प्रीता एलेक्स नाम के दो लोगों से संपर्क किया था। रेजी सी वर्की बैगल हॉलिडेज नाम की एजेंसी का संचालन करता था। दोनों आरोपियों ने जोसेफ को आश्वासन दिया कि उनके पास वीजा प्रोसेसिंग, प्लेसमेंट, दस्तावेज तैयार करने और यात्रा की पूरी व्यवस्था करने का व्यापक अनुभव है। उन्होंने जोसेफ को भरोसा दिलाया कि 3 महीने से लेकर 12 महीने के भीतर उन्हें इजरायल में एक अच्छी नौकरी दिलवा दी जाएगी।

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उनकी बातों पर भरोसा करके जोसेफ ने प्रोसेसिंग फीस, सर्विस चार्ज और प्लेसमेंट के नाम पर कुल 3.7 लाख रुपये की बड़ी रकम इन दोनों को सौंप दी। बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स के अनुसार, जोसेफ के खाते से 2.2 लाख रुपये रेजी सी वर्की के बैंक खाते में भेजे गए थे, जबकि 1.5 लाख रुपये प्रीता एलेक्स के खाते में ट्रांसफर किए गए। जांच के दौरान आयोग के रिकॉर्ड में यह भी बात सामने आई कि शुरुआत में दी गई किश्तों के तहत 1 लाख रुपये और 50 हजार रुपये की राशि प्रीता की बेटी शिल्पा मैरी के बैंक खाते में जमा कराई गई थी।

फर्जी फ्लाइट टिकट और टालमटोल का खेल

रकम वसूलने के बाद दोनों रिक्रूटर्स ने जोसेफ को विदेश भेजने की प्रक्रिया में लगातार देरी करना शुरू कर दिया। 2022 से 2023 के दौरान रेजी और प्रीता ने जोसेफ को इजरायल रवाना होने की कई अलग-अलग तारीखें दीं। यहां तक कि उन्हें फ्लाइट का समय और समय-सारणी तक बता दी जाती थी, लेकिन हर बार तय तारीख के ठीक पहले यात्रा रद्द कर दी जाती थी। कई महीनों तक यह सिलसिला यूं ही चलता रहा और जोसेफ हर बार नई तारीख के इंतजार में बैठे रहे।

धोखाधड़ी का यह खेल तब और गंभीर हो गया जब एक बार आरोपियों ने जोसेफ को एक फ्लाइट टिकट भेजकर यह दावा किया कि उनका रिजर्वेशन पूरी तरह कन्फर्म हो चुका है। हालांकि, जब रवानगी से पहले यात्रा फिर रद्द हुई और जोसेफ ने खुद पड़ताल की, तो पता चला कि वह टिकट पूरी तरह फर्जी था। संबंधित एयरलाइन में ऐसी कोई सीट या रिजर्वेशन कभी बुक ही नहीं किया गया था। इसके बाद अक्टूबर 2023 में जब इजरायल में सैन्य संघर्ष शुरू हुआ, तो आरोपियों ने इसे नया बहाना बना लिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण अभी वहां नौकरियां दिलवाना संभव नहीं है, हालांकि इसके बाद भी नई तारीखें देने और फिर से टालने का सिलसिला जारी रहा।

कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा और एकतरफा कार्यवाही

लगातार मिलते झूट और धोखे से परेशान होकर जोसेफ सीधे आरोपियों के घर पहुंचे और अपने पैसे वापस मांगे। आरोपियों ने फिर से एक नई तारीख दी, लेकिन उस तारीख पर भी कुछ नहीं हुआ। इसके बाद दोनों आरोपियों ने जोसेफ के फोन कॉल और मैसेज का जवाब देना पूरी तरह बंद कर दिया। न तो उन्होंने जोसेफ को नौकरी दिलवाई और न ही उनके जमा पैसे वापस किए। लाचार होकर जोसेफ ने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और अपनी मूल राशि की वापसी के साथ मुआवजे की मांग की।

आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए 3 मार्च 2026 को दोनों आरोपियों रेजी सी वर्की और प्रीता एलेक्स को समन भेजा। हालांकि, आरोपियों ने न तो कोई जवाब दाखिल किया और न ही आयोग के सामने पेश हुए। इसके बाद आयोग ने 17 जून 2026 को आरोपियों के खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टे) सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।

उपभोक्ता आयोग का सख्त फैसला और हर्जाने का निर्देश

मामले की सुनवाई कर रही आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष एसके श्रीला और सदस्य स्टैनली हेरोल्ड शामिल थे, ने प्रस्तुत बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। पीठ ने पाया कि जोसेफ द्वारा किया गया भुगतान पूरी तरह से प्रमाणित है और आरोपियों की ओर से कोई भी बचाव प्रस्तुत नहीं किया गया है। आयोग ने माना कि नौकरी का झूठा वादा करके पैसे लेना और सेवाएं न देना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(11) के तहत 'सेवा में कमी' (डेफिशिएंसी इन सर्विस) और अनुचित व्यापार व्यवहार का स्पष्ट मामला है।

आयोग ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि जोसेफ एक दैनिक मजदूर हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई गंवाने के साथ-साथ भारी मानसिक तनाव, अनिश्चितता और समय की बर्बादी झेली है। लिहाजा आयोग ने आरोपियों को आदेश दिया कि वे जोसेफ की मूल राशि 3.7 लाख रुपये भुगतान की तारीख से वसूली तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाएं। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक तंगी के एवज में 2 लाख रुपये का हर्जाना और कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का फरमान सुनाया। रेजी और प्रीता को आदेश की कॉपी मिलने के 30 दिनों के भीतर यह पूरी राशि संयुक्त रूप से या अलग-अलग चुकानी होगी। समय पर भुगतान न करने की स्थिति में जोसेफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत निष्पादन (एक्ज़ीक्यूशन) कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

जोसेफ मैनुअल से इजरायल में नौकरी के नाम पर कितनी रकम ठगी गई थी?
जोसेफ मैनुअल से कुल 3.7 लाख रुपये ठगे गए थे, जिसमें से 2.2 लाख रुपये रेजी सी वर्की के खाते में और 1.5 लाख रुपये प्रीता एलेक्स के खाते में जमा कराए गए थे।
कंज्यूमर कमीशन ने आरोपियों के खिलाफ क्या आदेश दिया?
आयोग ने 3.7 लाख रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने, 2 लाख रुपये हर्जाना देने और 10 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप में चुकाने का आदेश दिया।
फर्जी फ्लाइट टिकटों का खुलासा कैसे हुआ?
आरोपियों ने जोसेफ को एक टिकट भेजकर फ्लाइट कन्फर्म होने का दावा किया था, लेकिन जांच करने पर पता चला कि वह टिकट पूरी तरह फर्जी था और कोई बुकिंग नहीं की गई थी।
आरोपियों ने इजरायल में देरी के लिए क्या बहाना बनाया था?
अक्टूबर 2023 में इजरायल में शुरू हुए संघर्ष का हवाला देकर आरोपियों ने दावा किया था कि वहां अभी नौकरियां दिलवाना मुश्किल हो रहा है।
आरोपियों को भुगतान चुकाने के लिए कितना समय दिया गया है?
आयोग ने आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर पूरी राशि चुकाने का निर्देश दिया है, ऐसा न करने पर निष्पादन कार्यवाही शुरू की जा सकती है।
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