चित्रकूट में रोजगार की तलाश कर रहे भोले-भाले युवाओं को अपना शिकार बनाने के लिए शातिर दिमाग लोगों ने एक नायाब तरीका निकाला है। इन ठगों ने स्वास्थ्य विभाग के नाम से एक पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी विज्ञापन तैयार कर सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर परोस दिया है। इस फर्जीवाड़े का मकसद नौकरी का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से अवैध वसूली करना और उन्हें ठगना है। जैसे ही यह मामला स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत स्थिति स्पष्ट करते हुए इसे पूरी तरह से फर्जी करार दिया और इस संबंध में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब जिले में इस तरह का गोरखधंधा सामने आया हो। कुछ महीने पहले भी स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने का ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ था। इसके बावजूद शातिर बाज नहीं आए और उन्होंने एक बार फिर से जिला स्वास्थ्य विभाग के नाम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। सोशल मीडिया पर यह विज्ञापन इन दिनों काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे कई लोग भ्रमित हो सकते हैं। विभाग का दोटूक कहना है कि उनके कार्यालय से किसी भी पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं निकाली गई है और इस फर्जीवाड़े के जरिए केवल लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर चित्रकूट के सीएमओ महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने स्थिति साफ करते हुए जानकारी दी है कि उनके कार्यालय की ओर से ऐसी कोई भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा वह विज्ञापन पूरी तरह से फर्जी और लोगों को भ्रमित करने वाला है। उनका कहना है कि अगर किसी नागरिक को स्वास्थ्य विभाग में भर्तियों को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी प्राप्त करनी है, तो वह सीधे सीएमओ ऑफिस आकर तस्दीक कर सकता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी कुछ लोगों ने स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगारों से पैसे ऐंठे थे, जो पूरी तरह से फर्जीवाड़ा साबित हुआ था। इस बार वायरल हुए उस फर्जी पत्र और विज्ञापन के आधार पर उन्होंने सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत दी है।
शातिरों ने इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए अपने तैयार किए गए विज्ञापन में कुल 95 पदों पर बंपर भर्ती होने का दावा किया है। इस नोटिफिकेशन को देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई आधिकारिक प्रक्रिया चल रही हो, लेकिन विभाग ने साफ कर दिया है कि यह पूरी तरह से फर्जी है। सीएमओ ने एक वीडियो संदेश जारी कर यह भी बताया है कि उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल को भी पूरी जानकारी दे दी है। पुलिस अपने स्तर पर इस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है और उस डिजिटल प्लेटफॉर्म की भी तकनीकी जांच की जा रही है जहां से सबसे पहले यह फर्जी विज्ञापन अपलोड या प्रसारित किया गया था। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आम जनता और युवाओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि कोई भी लालच में आकर इस प्रकार की ठगी का शिकार न बने।



















