परीक्षा हॉल में कंप्यूटर स्क्रीन के सामने अभ्यर्थी बुत की तरह बैठे रहे, हाथ माउस पर टिके तो थे मगर हिल नहीं रहे थे, फिर भी उत्तर अपने आप सही विकल्पों पर क्लिक होते गए. वजह यह थी कि सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठा एक शख्स रिमोट सॉफ्टवेयर के जरिए उनकी जगह पूरा पेपर हल कर रहा था. यह हैरान करने वाला मामला दिल्ली पुलिस कांस्टेबल और हवलदार भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें जालंधर और पटियाला के सेंटरों पर हाईटेक नकल का खेल चला. पंजाब स्टेट क्राइम ब्रांच ने मोहाली में इस रिमोट एक्सेस फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए तीन नामजद और एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
जांच अधिकारियों के मुताबिक एग्जाम वाले कंप्यूटरों में बैकग्राउंड में एक रिमोट डेस्कटॉप प्रोग्राम, जैसे एनीडेस्क या एनीव्यूअर जैसा सिस्टम, चालू करके छोड़ दिया गया था. इसी सॉफ्टवेयर के सहारे बाहर बैठा सॉल्वर अभ्यर्थी के माउस और कीबोर्ड को अपने कब्जे में ले लेता था. यह पूरी सेंधमारी दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुई परीक्षाओं में हुई. SSC के नॉर्थ-वेस्टर्न रीजनल ऑफिस के पास इसके पुख्ता सबूत मौजूद थे, स्क्रीन की लाइव रिकॉर्डिंग और माउस की हरकतों का पूरा डेटा उनके पास सुरक्षित था. दिक्कत यह रही कि इतने ठोस सबूत होने के बावजूद स्थानीय पुलिस महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाई. आखिरकार SSC के चेयरमैन ने खुद पंजाब के DGP को चिट्ठी लिखी, जिसके बाद पंजाब स्टेट क्राइम ब्रांच हरकत में आई और जांच शुरू हुई.
पुलिस ने जिन लोगों के नाम FIR में दर्ज किए हैं उनमें कुलदीप, दिनेश और प्रदीप शामिल हैं, साथ ही एक आरोपी अभी अज्ञात है. ये सभी एलपीयू के परीक्षा केंद्र और पटियाला के ग्लोबल पॉलिटेक्निक कॉलेज सेंटर पर परीक्षा देने पहुंचे थे. इन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और नए पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, दोनों के तहत मामला दर्ज हुआ है, जिसमें दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सख्त कैद हो सकती है.
हैकर बाहर बैठकर पेपर कैसे हल कर देते हैं
ऑनलाइन भर्ती परीक्षा देने वाला अभ्यर्थी अक्सर मान लेता है कि उसका सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन असलियत में लैब के तकनीकी स्टाफ की मिलीभगत से ही यह पूरा खेल संभव होता है. गड़बड़ी की शुरुआत परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले होती है, जब कंप्यूटर में स्क्रीन-शेयरिंग टूल चुपचाप ऑन कर दिया जाता है.
इसके बाद अभ्यर्थी सिर्फ कुर्सी पर बैठा रहने का नाटक करता है. असल काम बाहर बैठा सॉल्वर करता है, जो स्क्रीन को देखकर माउस से सही जवाबों पर क्लिक करता जाता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सेंटर पर बायोमेट्रिक जांच और सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद यह सेंधमारी बिना लैब स्टाफ की मदद के मुमकिन ही नहीं है, क्योंकि रिमोट सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने और उसे चालू रखने के लिए किसी न किसी को अंदर से सहयोग देना ही पड़ता है.
ये 4 संकेत बताते हैं कि आपका सिस्टम हैक हो सकता है
अगर आप भी किसी सरकारी कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बैठे हैं, तो इन इशारों को हल्के में मत लीजिए.
- माउस का अपने आप हिलना: आपने कर्सर को हाथ न लगाया हो, फिर भी वह स्क्रीन पर हिले या कोई विकल्प खुद-ब-खुद सिलेक्ट हो जाए, तो तुरंत इसकी शिकायत करें.
- स्क्रीन का झिलमिलाना या रिजॉल्यूशन बदलना: बैकग्राउंड में कोई दूसरा ऐप या रिमोट टूल सक्रिय होते ही स्क्रीन एक पल के लिए फ्लिकर करती है.
- सिस्टम का अचानक बहुत धीमा पड़ जाना: रिमोट कनेक्शन की वजह से प्रोसेसिंग स्पीड घट जाती है और कर्सर अटक-अटक कर चलने लगता है.
- अनजान पॉप-अप या टास्कबार आइकॉन दिखना: डेस्कटॉप के नीचे टास्कबार में कोई नई या अनजान विंडो नजर आए, तो फौरन इन्विजिलेटर को बुलाएं.
नए कानून में नकल कराने वालों के लिए कितनी सख्त सजा
पेपर लीक और तकनीकी नकल पर लगाम कसने के लिए सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट के नाम से नया कानून लागू किया है, जो इस तरह के गिरोहों पर भारी पड़ सकता है.
- 10 साल की कैद और 1 करोड़ जुर्माना: नकल कराने वाले गिरोह, हैकर और धांधली में शामिल एजेंसियों को 10 साल तक की सख्त सजा और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है.
- अभ्यर्थी पर 3 से 5 साल का प्रतिबंध: अगर कोई परीक्षार्थी खुद ऐसा शॉर्टकट अपनाते पकड़ा जाता है, तो उसे 3 से 5 साल तक सभी सरकारी परीक्षाओं से बाहर कर दिया जाता है.
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम भी जुड़ा: इस केस में सेंटर के स्टाफ पर करप्शन एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं, जिससे दोषी कर्मचारियों की तुरंत बर्खास्तगी और संपत्ति जब्ती तक की नौबत आ सकती है.



















