कालकाजी गैंगरेप मामले में सामने आई क्रूरता की कहानी ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। खुद इस खौफनाक वारदात की शिकार हुई युवती ने पुलिस और अदालत के सामने अपनी आपबीती साझा की है। उसने उस भयानक दिन का जिक्र किया है जब उसके जन्मदिन की खुशियां मातम और खौफ में बदल गईं, और तीन दरिंदों ने उसके साथ बेरहमी से बलात्कार किया। पीड़िता के अनुसार, वह अपने जन्मदिन के मौके पर कालकाजी मंदिर में माथा टेकने गई थी। मंदिर परिसर से बाहर आने के बाद वह अपने दोस्त के साथ पास के एक पार्क में जाकर बैठ गई थी। इसी दौरान तीन संदिग्ध युवक वहां पहुंचे और खुद को कानून के रखवाले यानी पुलिसकर्मी बताने लगे। उन्होंने सबसे पहले दोनों दोस्तों को अलग किया और उनके मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए। पीड़िता ने बताया कि आरोपियों ने हथियार और चाकू का भय दिखाकर उसे एक सुनसान और अंधेरे कोने में खींच लिया। वहां तीनों ने बारी-बारी से उसके साथ जबरदस्ती की और घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने दोनों को जान से मारने की धमकी दी और किसी को भी इस बारे में कुछ न बताने की सख्त हिदायत दी। वारदात के तुरंत बाद सहमी हुई पीड़िता ने अपने दोस्त को पूरी बात बताई, जिसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम को पीसीआर कॉल करके मदद मांगी गई।
बर्थडे पर मंदिर जाने की योजना कैसे बनी
अदालत और पुलिस के सामने दिए गए बयान में पीड़िता ने अपनी जिंदगी के सबसे काले दिन की पूरी रूपरेखा रखी है। उसने बताया कि उस दिन उसका जन्मदिन था और उसकी इच्छा कालकाजी मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करने की थी। इसी वजह से उसने अपने एक दोस्त को अपने साथ मंदिर चलने के लिए कहा था। पीड़िता के परिवार की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए उसने बताया कि उसकी मां घरों में खाना बनाने का काम करती हैं और उस समय वह अपने काम पर गई हुई थीं। घर पर अकेली न होने के कारण उसने अपनी बड़ी बहन को यह जानकारी दी थी कि वह अपने दोस्त के साथ मंदिर दर्शन के लिए जा रही है। शाम को करीब 5 बजे वह घर से ऑटो पकड़कर निकली और लगभग 5:45 बजे वे लोग कालकाजी मंदिर पहुंच गए। शाम को लगभग 7 बजे तक वे मंदिर के अंदर ही रहे और पूजा-पाठ किया। इसके बाद वे दोनों मंदिर परिसर से बाहर आ गए और कालकाजी मेट्रो स्टेशन के बाहर से चिप्स का पैकेट और पानी की बोतल खरीदी। इसके बाद वे मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-7 के रास्ते पार्क के अंदर चले गए।
पार्क के अंदर कैसे शुरू हुआ खौफनाक सफर
पीड़िता ने अपने बयान में आगे बताया कि उसकी इच्छा इस्कॉन मंदिर में भी जाकर पूजा करने की थी। उसने अपने दोस्त से कहा कि वे पहले कुछ देर पार्क में बैठकर चिप्स खा लेते हैं और उसके बाद दूसरे मंदिर की तरफ चलेंगे। जैसे ही वे दोनों पार्क के अंदर पहुंचे और एक बेंच पर बैठकर चिप्स का पैकेट खोला, तभी वहां तीन लड़के आ धमके जिनकी उम्र लगभग 30 से 35 साल के बीच थी। उन तीनों ने आते ही उसके दोस्त को पकड़ लिया और उसे जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। जब दोनों ने हिम्मत जुटाकर उनसे सवाल किया कि वे कौन हैं, तो उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को पुलिसकर्मी बताया। उन्होंने यह सवाल भी किया कि वे इस समय पार्क में क्यों आए हैं और उन्हें यहां बैठने की अनुमति क्यों नहीं है। इसके बाद उनमें से एक लड़के ने पीड़िता के दोस्त समीर को जबरन दूसरी तरफ खींच लिया और उनके मोबाइल फोन भी अपने पास रख लिए। इसके बाद बाकी दो लड़कों ने पास की झाड़ियों की तरफ इशारा करते हुए पीड़िता को उस तरफ चलने का आदेश दिया। इस अचानक हुए हमले से वह बेहद डर गई और उसने उन लोगों से कहा कि उन्हें जो भी पूछताछ करनी है, वे यहीं करें और चाहें तो उसकी मां से फोन पर बात कर लें।
हथियार और चाकू के बल पर सुनसान जगह पर ले जाने की दरिंदगी
हालाँकि, उन बदमाशों पर उसकी किसी भी गिड़गिड़ाहट का कोई असर नहीं हुआ। तभी उनमें से एक ने अपने साथी को आवाज लगाते हुए कहा कि आसिफ भाई, गन निकाल। जिस शख्स को आसिफ कहकर संबोधित किया गया था, उसने बैंगनी रंग की शर्ट पहनी हुई थी और वह उन तीनों में सबसे अधिक तगड़े शरीर का था। आसिफ नाम के उस आरोपी ने काले रंग की एक बंदूक निकाली और कुछ सेकंड दिखाने के बाद उसे वापस अपनी जेब में रख लिया। इसके बाद बाकी दोनों लड़कों ने भी अपने पास से चाकू निकाल लिए और उसे पार्क के एक सुनसान तथा अंधेरे हिस्से में खींचकर ले गए। मुख्य आरोपी आसिफ ने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसे एक लाल रंग की बेंच पर लेटने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद उसने अपने साथी को हिदायत दी कि हेमू, तुम यहीं नजर रखना ताकि इस तरफ कोई आ न सके। आसिफ ने सुरक्षा उपाय का इस्तेमाल किया और पीड़िता की गर्दन पर तेज धार वाला चाकू रखकर उसके साथ जबरदस्ती की। वह दर्द से बुरी तरह तड़प रही थी और लगातार रो रही थी, लेकिन दरिदों को उस पर जरा भी दया नहीं आई। इसके बाद आसिफ ने इस्तेमाल की गई सामग्री को बेंच के पास ही फेंक दिया और हेमू से कहा कि अब वह अपनी बारी संभाले क्योंकि वह खुद दीपू के पास जा रहा है।
तीनों आरोपियों की बर्बरता और पुलिस की मदद
आसिफ के बाद हेमू उसे खींचकर पास की ही एक दूसरी बेंच पर ले गया। उसने भी अपनी हरकत दोहराते हुए पीड़िता की गर्दन पर चाकू अड़ा दिया और उसके साथ जबरदस्ती की। इसके बाद तीसरा आरोपी वहां पहुंचा, जिसे दोनों साथी दीपू नाम से पुकार रहे थे। उसने भी वहीशीपन की सारी हदें पार करते हुए पीड़िता की गर्दन पर चाकू रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने के बाद उसने बेंच के पास ही मिट्टी पर अपना वीर्य गिरा दिया। इसके बाद उन दरिंदों ने उसे जल्दी से अपने कपड़े पहनने का निर्देश दिया। उन्होंने उसे उसकी टी-शर्ट और जींस तो वापस दे दी, लेकिन उसकी ब्रा अपने पास ही रख ली और उसे नहीं लौटाया। कपड़े पहनने के बाद वे लोग उसके दोस्त समीर को भी वापस वहां ले आए और उनके मोबाइल फोन उन्हें लौटा दिए। जाते-जाते उन्होंने धमकी दी कि अगर वे जल्दी से यहां से नहीं भागे तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा और इस पूरी घटना के बारे में किसी को भी भूलकर कुछ न बताने की चेतावनी दी। इसके बाद वे उन्हें पार्क से बाहर ले गए, जहाँ से छूटने के बाद पीड़िता ने समीर को अपने साथ बीती पूरी आपबीती रोते हुए बताई। इसके तुरंत बाद समीर ने पुलिस कंट्रोल रूम की पीसीआर पर कॉल करके मदद मांगी और कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुँच गई।



















