ओडिशा के रायगड़ा जिले के पद्मपुर इलाके में एक भयानक हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक नए निर्मित सेप्टिक टैंक के भीतर दम घुटने से तीन लोगों की जान चली गई है। यह पूरी दुर्घटना तब हुई जब ये मजदूर उस बंद टैंक के अंदर से सेंट्रिंग का सामान निकालने के लिए उतरे थे। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया है और मातम का माहौल छा गया है।
एक को बचाने उतरे बाकी साथी भी फंसे
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में केवल एक व्यक्ति ही उस टैंक के अंदर गया था। कुछ देर बीतने के बाद उसे भीतर सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस होने लगी। इस स्थिति को देखकर दूसरे लोग भी अपने साथी की सहायता करने के लिए एक-एक करके टैंक के भीतर उतर गए। लेकिन हैरानी और दुर्भाग्य की बात यह रही कि अंदर कदम रखते ही वे सभी बेहोश हो गए और वापस बाहर नहीं लौट पाए। जब इस बात की भनक लगी तो मौके पर भगदड़ और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
घटना की खबर मिलते ही तुरंत फायर सर्विस की टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए फौरन राहत और बचाव अभियान चलाया और तीनों अछूते मजदूरों को टैंक से बाहर निकाला। इसके बाद उन सभी को तुरंत चिकित्सकीय सहायता के लिए पद्मपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टरों ने सभी की जांच करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतकों की हुई पहचान
इस भीषण हादसे में अपनी जान गंवाने वाले तीनों मजदूरों की पहचान कर ली गई है। मृतकों के नाम हरिश्चंद्र बीर, आलोक कराड़ा और प्रकाश लिमा बताए गए हैं। इस आकस्मिक निधन से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
जहरीली गैस या ऑक्सीजन की भारी कमी
शुरुआती अनुमानों में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि बंद टैंक के भीतर दम घुटने के कारण ही इन मजदूरों की जान गई है। हालांकि, यह जांच का गंभीर विषय है कि क्या उस टैंक के अंदर कोई घातक जहरीली गैस जमा हो गई थी या फिर ऑक्सीजन के स्तर में भारी गिरावट आ जाने की वजह से यह हादसा हुआ।
सुरक्षा मानकों पर उठ रहे बड़े सवाल
इस हृदयविदारक घटना ने बंद और सीमित हवा वाले स्थानों में काम करते समय बरती जाने वाली सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। नए बने टैंकों, सीवेज चैंबरों या अन्य तंग जगहों पर यदि पर्याप्त वेंटिलेशन न हो, तो वहां सांस लेने के लिए जरूरी ऑक्सीजन कम हो सकती है या फिर खतरनाक गैसों का निर्माण हो जाता है। ऐसे जोखिम भरे स्थानों पर बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के उतरना सीधे तौर पर जान जोखिम में डालने के समान है।



















