उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय पर सोमवार दोपहर को जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की संयुक्त टीमों ने मिलकर अचानक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। सुरक्षा और घेराबंदी को पुख्ता करने के लिए करीब 50 पुलिसकर्मी बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर मौके पर पहुंचे और परिसर के दोनों प्रवेश द्वारों को तुरंत बंद करवा दिया गया। अचानक हुई इस छापामार कार्रवाई से वहां मौजूद लोगों और कथित दलालों में भारी भगदड़ मच गई। कुछ लोग इधर-उधर छिपने की कोशिश करने लगे तो कई ने परिसर की दीवारें फांदकर भागने की राह चुनी। हालांकि सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए खदेड़कर कुल 22 संदिग्ध दलालों को मौके पर ही दबोच लिया।
तीन घंटे तक चली गहन छानबीन
यह पूरी छापामार कार्रवाई लगभग तीन घंटे तक लगातार चलती रही। इस समयावधि के दौरान टीम ने कार्यालय के भीतर विभिन्न विभागों की फाइलों, दस्तावेजों, कंप्यूटरों, लैपटॉप और डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाला। इसके अलावा प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने मुख्य परिसर के बाहर संचालित होने वाली अवैध वेंडरों की दुकानों की भी जांच की। इस प्रशासनिक हलचल की भनक लगते ही कई वेंडर अपनी दुकानें बीच में ही बंद करके सुरक्षित ठिकानों की ओर निकल गए।
चालान बाबू के पास मिली नकदी में गड़बड़ी
कार्यालय के भीतर प्रवर्तन कक्ष में तैनात चालान बाबू मृदुल मिश्रा के पास से लगभग एक लाख रुपये की नकद राशि बरामद होने की बात सामने आई। जांच के दौरान अधिकारी जब इस रकम के संबंध में पूछताछ करने लगे, तो वह मौके पर कोई संतोषजनक जवाब या दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इसके बाद टीम ने इस नकदी और उससे जुड़े कागजातों को अपने कब्जे में लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया। वहीं दूसरी ओर, जब कैश विभाग की रकम का मिलान किया गया तो वहां भी अंतर पाया गया। कैश डिपार्टमेंट के बाबू विपिन कुमार के पास निर्धारित राशि से करीब 15 हजार रुपये कम होने की जानकारी दी गई। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्यालय में अलग-अलग जगहों पर रखी गई रकम की गिनती और मिलान करने पर करीब 5 से 7 हजार रुपये समेत अन्य मामलों में भी अंतर मिला है, जिनकी गहराई से पड़ताल की जा रही है।
आरआइ से बंद कमरे में पूछताछ और बायोमीट्रिक काउंटर की जांच
इस पूरी कार्रवाई के दौरान एडीसीपी स्पेशल ऑपरेशन सुमित सुधाकर रामटेके ने आरटीओ के रीजनल इंस्पेक्टर संतोष यादव से एक बंद कमरे में काफी देर तक पूछताछ की। इसके साथ ही अधिकारियों की टीमों ने अलग-अलग अनुभागों में जाकर वहां तैनात अन्य कर्मचारियों से भी जरूरी जानकारियां जुटाईं। डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए कंप्यूटर और लैपटॉप के डेटा को खंगाला गया ताकि यह साफ हो सके कि कार्यालय के भीतर चल रही अनियमितताओं का दायरा असल में कितना बड़ा है। इसके अलावा पुलिस और प्रशासनिक दल ने सारथी भवन का भी रुख किया जहां काउंटर नंबर-6 पर पहुंचकर वाहनों के लाइसेंस से जुड़े बायोमीट्रिक कार्यों की जांच की गई। वहां तैनात कर्मचारी मुजाहिद फारुकी से पूछताछ करने पर यह बात सामने आई कि दोपहर 12 बजे तक किसी तकनीकी समस्या के कारण मुख्य साइट काम नहीं कर रही थी, जिस वजह से बायोमीट्रिक प्रक्रिया में बाधा आई। इसके बाद दोपहर 12 बजे से लेकर 3:30 बजे के बीच लगभग 15 लोगों के बायोमीट्रिक कार्य पूरे किए जाने की बात बताई गई।
एक ट्रक चालक की शिकायत पर कसी गई नकेल
एसडीएम सदर अनुभव सिंह के मुताबिक, परिवहन विभाग के कामकाज को लेकर जिला प्रशासन को लंबे समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इस पूरी कार्रवाई की असली शुरुआत एक ट्रक चालक कामता प्रसाद की तरफ से दी गई शिकायत के बाद हुई। पीड़ित चालक काताना ने बताया कि वह अपना ट्रक लेकर जा रहा था और भौंती बाईपास के नजदीक उसे आरटीओ की चेकिंग टीम ने रोक लिया। वाहन चालन से जुड़े विभिन्न नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उस पर कार्रवाई की गई। चालक का मुख्य आरोप यह था कि अधिकारियों ने उससे कुल 26,700 रुपये वसूले, जबकि उसे जो रसीद थमाई गई उस पर केवल 21,700 रुपये ही दर्ज थे। इस तरह उसने भुगतान की गई कुल राशि और रसीद पर लिखी रकम के बीच 5 हजार रुपये के अंतर का गंभीर आरोप लगाया।
सीट बेल्ट और हॉर्न के चालान पर भी खड़े किए गए सवाल
शिकायतकर्ता कामता प्रसाद ने प्रशासन को यह भी बताया कि उसके ट्रक पर केवल कागजों की कमी का ही नहीं बल्कि सीट बेल्ट और हॉर्न के नियमों के कथित उल्लंघन का भी चालान मढ़ा गया था। उसका कहना था कि वाहन में सीट बेल्ट को लेकर जिस तरह की कार्रवाई की गई, उसने उस पर मौके पर ही अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके अलावा चालक ने इस बात पर भी जोर दिया कि उसके पास भारी वाहन चलाने के लिए पूरी तरह वैध लाइसेंस मौजूद था। इसके बावजूद उससे तय रकम से अधिक पैसे वसूले गए और कम राशि की रसीद दी गई। इसी शिकायत के आधार पर जिला प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टीम का गठन किया और सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे आरटीओ कार्यालय पर अचानक धावा बोल दिया।
ड्रोन से निगरानी और पुलिस हिरासत में दलाल
कार्यालय परिसर के भीतर चल रही इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस बल ने सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने और किसी को भी भागने से रोकने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद से आसमान से निगरानी रखी। इसका मुख्य उद्देश्य परिसर के आसपास के सभी संभावित रास्तों और छिपने की जगहों पर पैनी नजर बनाए रखना था। अचानक हुई इस कार्रवाई के कारण परिसर में काफी देर तक गहमागहमी और तनाव का माहौल बना रहा। इसी बीच, पुलिसकर्मियों और एक स्थानीय वकील के बीच तीखी नोकझोंक होने की भी जानकारी सामने आई, हालांकि प्रशासनिक टीम ने बिना किसी रुकावट के अपनी जांच की प्रक्रिया को जारी रखा।
काकादेव थाने भेजे गए पकड़े गए लोग
लगभग तीन घंटे तक चली इस व्यापक जांच-पड़ताल के बाद पुलिस ने शिकंजे में आए सभी 22 कथित दलालों को हिरासत में ले लिया और उन्हें आवश्यक कार्रवाई के लिए काकादेव थाना पुलिस के हवाले कर दिया। हालांकि कुछ लोग मौका पाकर वहां से फरार होने में भी कामयाब रहे। पुलिस अब पकड़े गए इन सभी संदिग्धों से पूछताछ करके यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वे आरटीओ कार्यालय के किस अनुभाग में सक्रिय थे और भीतर के किन कर्मचारियों या अन्य संपर्कों के साथ उनकी साठगांठ थी। जांच दल ने मौके से तमाम जरूरी दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। अधिकारियों का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि शुरुआती छानबीन में ही कैश के रखरखाव और वित्तीय लेन-देन में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं।



















