राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में उस समय सरगर्मी तेज हो गई, जब एक लोकप्रिय यूट्यूब शो के एक वीडियो क्लिप को लेकर मामला सीधे पुलिस थाने तक जा पहुंचा। आजाद समाज पार्टी की तरफ से कड़ा दबाव बनाए जाने के बाद दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में यूट्यूबर अजीत भारती के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी/एसटी एक्ट, आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से इंटरनेट और राजनीतिक मंचों पर बहस छिड़ गई है, जिससे एक बार फिर सवर्ण और दलित राजनीति से जुड़े समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है। सांसद चंद्रशेखर आजाद और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संदर्भ में की गई टिप्पणियों को आधार बनाकर यह शिकायत दी गई थी।
एफआईआर के बाद अजीत भारती की प्रतिक्रिया और तीखे सवाल
यह कानूनी कदम आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की ओर से दी गई औपचारिक शिकायत के आधार पर उठाया गया है। मुकदमा दर्ज होने के तुरंत बाद अजीत भारती ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक लंबा बयान जारी कर अपना पक्ष जनता के सामने रखा। उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ किया कि उनके परिवार को लेकर बेहद आपत्तिजनक और भद्दी टिप्पणियां की गई थीं, और ऐसी मानसिक प्रहार की स्थिति में चुप बैठना किसी भी भाई या पुत्र के लिए मुमकिन नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी तरफ से किसी भी जातिसूचक शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और पुलिस जांच में वे पूरा सहयोग करेंगे।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने सैनिक स्कूल के दिनों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका मनोबल इतनी आसानी से नहीं टूटने वाला है। उन्होंने सवर्ण समाज के सामने भी यह बड़ा सवाल खड़ा किया कि क्या वैचारिक दबाव या राजनीतिक डर के कारण किसी को भी अपनी मां-बहनों पर किए जा रहे भद्दे कमेंट्स को चुपचाप सहन कर लेना चाहिए। उनका यह पलटवार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
विवाद की शुरुआत और कानूनी धाराएं
यह पूरा कानूनी विवाद 22 अगस्त 2026 को प्रसारित किए गए एक वीडियो से शुरू हुआ था, जिसे अजीत भारती ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया था। इस वीडियो का शीर्षक ‘SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti’ था। इस सिलसिले में दर्ज की गई एफआईआर संख्या 0030/2026 में पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न उप-धाराओं के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं को शामिल किया है।
शिकायत दर्ज कराने वाले पक्ष का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ खास जातियों से जुड़े शब्दों का अपमानजनक रूप से इस्तेमाल किया गया और सांसद चंद्रशेखर आजाद तथा डॉ. बी.आर. अंबेडकर के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियां की गईं। पुलिस को सौंपी गई शिकायत में डिजिटल सबूतों का भी हवाला दिया गया है, जिसमें वीडियो का यूआरएल, मेटाडेटा और उस समय तक मिले व्यूज का रिकॉर्ड भी शामिल है।
जंतर-मंतर का प्रदर्शन और मुख्य मांगें
यह एफआईआर उस घटना के ठीक दो दिन बाद दर्ज की गई है, जब 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण हटाओ आंदोलन के बैनर तले एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में अजीत भारती एक प्रमुख वक्ता और चेहरे के रूप में सामने आए थे। जंतर-मंतर पर उन्होंने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा को लेकर दस सूत्रीय मांग पत्र पेश किया था, जिसमें कई बड़े सुझाव दिए गए थे।
उस मांग पत्र में मुख्य रूप से यह सुझाव शामिल था कि आरक्षण के पिछले आठ दशकों के प्रभावों की समीक्षा के लिए सरकार को एक श्वेत पत्र लाना चाहिए। इसके अलावा, आरक्षित वर्गों के भीतर भी सबसे पिछड़े और वंचित तबकों तक लाभ पहुंचाने के वास्ते कोटे के भीतर कोटा लागू करने की बात कही गई थी। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस के लिए समान सहायता और आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों के वास्ते न्यूनतम योग्यता अंक तय करने की मांग भी उठाई गई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी के राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।


















