देश के बाहर बैठकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले गैंगस्टर्स पर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में मलेशिया में ठिकाना बनाकर भारत विरोधी और संगीन वारदातों को अंजाम दे रहे दविंदर बंबीहा गिरोह के तीन कुख्यात गुर्गों को आखिरकार दबोच लिया गया है और उन्हें मलेशिया से भारत डिपोर्ट कर दिया गया है। जैसे ही ये आरोपी विमान से उतरकर देश की जमीन पर पहुंचे, वैसे ही सुरक्षा में तैनात पंजाब पुलिस ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया और पूछताछ के लिए पंजाब रवाना कर दिया।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दी बड़ी सफलता की जानकारी
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के इस बड़े ऑपरेशन की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए साझा की गई है। मंत्रालय के अनुसार, मलेशिया से डिपोर्ट किए गए इन तीनों अपराधियों की पहचान जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल, अजय सिंह और पवनदीप सिंह के रूप में हुई है, जो कुख्यात दविंदर बंबीहा गैंग से जुड़े हुए हैं। इन पर रंगदारी वसूलने, सीमा पार से अवैध हथियारों की तस्करी करने, मादक पदार्थों का धंधा चलाने और पंजाब के लुधियाना शहर में ग्रेनेड हमले की एक बड़ी साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं।
गृह मंत्रालय ने अपने आधिकारिक पोस्ट में बताया कि भारतीय एजेंसियों के अथक प्रयासों से मलेशिया में छिपे इन तीनों वांछित अपराधियों को पकड़कर स्वदेश लाया गया और तुरंत पुलिस हिरासत में सौंप दिया गया। बयान में यह भी रेखांकित किया गया कि एक सुरक्षित देश के विजन के तहत काम करते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अकेले 2026 के दौरान ही कुल 51 कुख्यात अपराधियों को विदेशों से वापस लाने में बड़ी सफलता हासिल की है।
फरीदकोट के जसप्रीत सिंह का आपराधिक सफर
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल जसप्रीत सिंह मूल रूप से पंजाब के फरीदकोट जिले का रहने वाला है। पुलिस के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक, वह जून 2019 में देश छोड़कर मलेशिया चला गया था। वहां पहुंचने के बाद उसकी मुलाकात एक अन्य फरार अपराधी से हुई, जिसके जरिए वह दविंदर बंबीहा गिरोह के संपर्क में आ गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि वक्त गुजरने के साथ जसप्रीत इस आपराधिक नेटवर्क का एक बेहद अहम और सक्रिय ऑपरेटिव बन गया तथा विदेश में रहकर ही पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में गैंग की गतिविधियों को संचालित करने लगा।
स्वदेश लौटने के बाद पंजाब पुलिस ने उसे साल 2025 में हुई यादविंदर सिंह और उसके चालक जीवंजोत सिंह चहल उर्फ जुगनू की सनसनीखेज हत्या के मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब उससे इस दोहरे हत्याकांड की साजिश के पीछे छिपे तमाम राज उगलवाने और गिरोह के अन्य छिपे हुए चेहरों के बारे में गहनता से पूछताछ कर रही है।
राजस्थान के अजय और पवनदीप की भूमिका
मलेशिया से पकड़े गए अन्य दो आरोपियों की पहचान अजय सिंह और पवनदीप सिंह के तौर पर हुई है, और दोनों ही राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के निवासी हैं। पुलिस की शुरुआती जांच से यह बात सामने आई है कि ये दोनों मलेशिया में बैठकर ही दविंदर बंबीहा गिरोह के लिए काम कर रहे थे। इन दोनों पर विदेश में बैठकर अपने आपराधिक सिंडिकेट के जरिए भारत में मौजूद स्थानीय गुर्गों को अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सीधे निर्देश देने का गंभीर आरोप है। विशेष तौर पर लुधियाना में अंजाम दी जाने वाली हैंड ग्रेनेड हमले की साजिश में इन दोनों की संदिग्ध भूमिका जांच के दायरे के केंद्र में बनी हुई है।
लुधियाना ग्रेनेड हमले की नाकाम साजिश
पंजाब पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2025 के दौरान लुधियाना में एक घातक हैंड ग्रेनेड हमला करवाने की खतरनाक योजना तैयार की गई थी। इस पूरी साजिश के पीछे मलेशिया में छिपे बैठे अजय सिंह और पवनदीप सिंह का हाथ बताया जा रहा है, जिन्होंने भारत के भीतर अपने गुर्गों के माध्यम से इस नापाक मंसूब्रे को अमलीजामा पहनाने का प्रयास किया था।
हालांकि, मुस्तैद लुधियाना कमिश्नरेट पुलिस ने इस बड़ी साजिश को वक्त रहते विफल कर दिया। पुलिस ने 27 अक्टूबर 2025 को इन गैंगस्टर्स के दो स्थानीय साथियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की थी और उनके कब्जे से एक P86 चीनी हैंड ग्रेनेड भी बरामद किया था। अब इन दोनों मुख्य आरोपियों के भारत आ जाने के बाद पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस हमले के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे, ये हथियार देश में कहां से पहुंचे और मलेशिया से इन हैंडलर्स का स्थानीय नेटवर्क कितना बड़ा फैला हुआ था।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े तार
जांच के दौरान पंजाब पुलिस के हाथ कुछ ऐसे अहम सुराग भी लगे हैं जिनसे इन तीनों आरोपियों का संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि दविंदर बंबीहा गिरोह के विदेशी ठिकानों का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने के लिए हथियार, नशीले पदार्थ और अन्य आपराधिक गतिविधियों को सीमा पार से प्रायोजित करने के वास्ते किया जा रहा था।
इन तीनों खतरनाक गैंगस्टर्स को धर दबोचने और भारत की धरती तक लाने में केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका बेहद अहम रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पिछले कई महीनों से लगातार इन अपराधियों की हर गतिविधि और लोकेशन पर कड़ी नजर रखी जा रही थी और खुफिया तंत्र के जरिए लगातार डेटा जुटाया जा रहा था। इसके बाद मलेशियाई प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर इनकी गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन की कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया गया। भारत पहुंचने पर इन्हें तुरंत पंजाब पुलिस की विशेष हिरासत में ले लिया गया।
विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ जारी है अभियान
पंजाब पुलिस की ओर से पिछले काफी समय से उन तमाम गैंगस्टर्स के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है जो विदेश की धरती पर बैठकर पंजाब राज्य में अपराध का काला साम्राज्य चला रहे हैं। राज्य के उच्च स्तर पर दिए गए निर्देशों के तहत चलाए जा रहे इस अभियान के जरिए विदेशों में पनाह लिए बैठे अपराधियों और उनके स्थानीय मददगारों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल 2026 के दौरान ही देश की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने 51 कुख्यात अपराधियों को वापस लाने में सफलता पाई है। बंबीहा गिरोह के इन तीन गुर्गों का डिपोर्टेशन भी इसी व्यापक मुहिम का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अब पंजाब पुलिस का अगला फोकस इन आरोपियों के पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई करने वालों, ड्रग्स तस्करी के चैनलों और अन्य पेंडिंग मामलों की तह तक जाने पर है।



















